Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

उत्तराखंड की तराई में बाँस का एक बड़ा वन था। वहाँ बहुत सारे हाथी रहते थे। सभी हाथी मिल-जुलकर प्रेम से रहते। हाथियों के उस झुंड़ में अनेक बच्चे भी रहते थे। हाथी उन्हें भी प्रेम और सहानुभूति पाठ पढ़ाते। एक बार सारे बच्चे जिद करने लगे कि वे नदी में नहाने के लिए जाएँगे। झुंड की एक बूढ़ी हथिनी को उनके साथ भेज दिया। बच्चे चाह रहे थे कि वो अकेले ही जाएँ, क्योकि बूढ़ी दादी माँ के रहते वे मनमाने ढंग से नहीं नहा पाते, शरारत नहीं कर पाते। बच्चो के नेता टप्पू ने कहा भी-“अब तो हम…

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गंगोलीहाट के हिमांशु ने हमे एक सुंदर सी कुमाउनी कविता भेजी है। आइये सर्वप्रथम हिमांशु की सुंदर कविता का आनंद लेते हैं। कुमाउनी कविता का शीर्षक- आहा रे कतु याद उँ लेखक – हिमांशु पन्त उ दौर ले कमाल छी, यो दौर ले कमाल छु, तब जिंदगी में खुशी छी, अब जिंदगी बडी दुखी छु। आहा रे कतु भल लागछि… जब बुजुर्ग नकि बात सुणछ्यां, आब् सब मोबाइल में व्यस्त छन और बुढ़ बाढ़ि हमन देखि पस्त छन, उ घरक बिजलीक लंफु आज ले याद ऊँ, ज्या में हाथ लगा भेर झाव लागछि खोर लगा भेर चड़चड़ाट हुंछि। आब् तो…

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उत्तराखंड के निवासी छोटी छोटे आयोजनों पर और कार्यों के समापन पर खुशियां मनाने का अवसर नही छोड़ते हैं। ऐसा ही कार्य संपन्न होने की खुशी में मनाए जाने वाला त्यौहार है ,हई दशौर (कृषक दशहरा)। यह कुमाऊं के किसानों का स्थानीय  त्यौहार माना जाता है। यह त्यौहार सौर पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष मागशीष माह की दशमी तिथि के दिन मनाया जाता है। जिस प्रकार दशहरे के दिन हथियारों की पूजा होती है, ठीक उसी प्रकार हई दशौर (कृषक दशहरा) के दिन कृषि उपकरणों कि पूजा की जाती है। और विभिन्न प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं। यह त्योहार…

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मेरी जन्मभूमी उत्तराखंड मेरी जन्मभूमी उत्तराखंड, यह नाम सुनते ही शरीर में एक बड़ी प्यारी सी सिहरन उठ जाती है, लगता है कि जैसे किसी ऐसी चीज के बारे में बात हो रही है जो कि हमारी अपनी है, हमारा हिस्सा है, हमारे प्राण जिसमें बसते हैं ऐसी कोई चीज है, लेकिन यह नाम है हमारे प्यारे प्रदेश का, यह नाम है हमारी मातृभूमि, जन्मभूमि का। उत्तराखंड के बारे में काफी लोग (जो इसको अच्छे से जानते हैं) यह राय रखते हैं कि यह अपने आप में एक सम्पूर्ण राज्य है। यहाँ की प्राकृतिक सम्पदाएँ, यहां के लोगों का स्वभाव,…

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मेरी छैला वे मेरी छबीली गोपाल बाबू गोस्वामी जी का वह प्रसिद्ध गीत था ,जिस पे बॉलीवुड की फेमस अभिनेत्री ने कोर्ट केस कर दिया था। आइये दोस्तों पहले इस गीत के लिरिक्स और वीडियो देख लेते हैं ,फिर उस रोचक वाकये पर बात करेंगे। छैला वे मेरी छबीली गीत लिरिक्स अरे छैला वे मेरी छबीली। ….ओ मधुली ईजा .. अरे छैला वे मेरी छबीली, ओ मेरी हेमा मालिनी। . अरे आखि तेरी काई काई काई , नशीली हाई ,हाई हाई। . अरे आखि तेरी काई काई काई , नशीली हाई ,हाई हाई -२ ओ मेरी छैला छबीली ,मेरी हेमा…

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बेडू पाको बारो मासा गीत उत्तराखंड की पहचान है। या यु कहिये यह गीत उत्तराखंड का पहला अघोषित राज्य गीत है। जब कोई उत्तराखंड का निवासी कही अपनी पहचान बताता है तो, बेडू पाको बारो मासा गीत से स्वयं को जोड़ कर खुद का परिचय देता है। आज इस लेख में इसी प्रसिद्ध गीत के बारे में संक्षिप्त जानकारी व बेडू पाको बारोमासा  गीत के बोल संकलित कर रहे हैं। स्वर्गीय श्री बिजेंद्र लाल शाह मंच पर गीत प्रस्तुत करते हुए। बेडू पाको बारो मासा सांग लिरिक्स – बेडू पाको बारो मासा , नरेण काफल पाको चैत मेरी छैला। बेडू…

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उत्तराखंड सरकार ने अपनी सरकार पोर्टल / अपणि सरकार,और उन्नति पोर्टल का आरम्भ किया। इन  पोर्टल का उट्घाटन से सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड में डिजिटल कार्यों को बढ़ावा देना है। यह पोर्टल उत्तराखंड वासियों को उनकी आवश्यक सेवाओं का ऑनलाइन लाभ देने के लिए विकसित किया गया है।  इस पोस्ट में हम  जानेंगे  उत्तराखंड अपनी सरकार पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कैसे करें ? इस पोर्टल किन किन सेवाओं का लाभ मिलेगा? Apni sarkar portal Uttarakhand के साथ उत्तराखंड सरकार ने उन्नति पोर्टल उत्तराखंड भी लॉन्च किया है। अपनी सरकार पोर्टल उत्तराखंड में ऑनलाइन कार्यों को बढ़ावा देने की दिशा में एक…

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उत्तराखंड की ‘पामीर’ कही जाने वाली तथा चमोली, गढ़वाल एवं अल्मोड़ा जिलों में फैली दूधातोली शृखला बुग्यालों, चरागाहों और सघन बाँज, खर्सू, उतीश व कैल वृक्षो से आच्छादित 2000-2400 मीटर की ऊँचाई का वन क्षेत्र है। दूधातोली से पक्षिम रामगंगा, आटा गाड़, पक्षिम व पूर्वी नयार तथा विनो नदी का उदगम होता है। आटागाड़ लगभग 30 किलोमीटर बहने के बाद सिमली (चमोली) में पिंडर से मिलती है। विनो भी यही दूरी तय कर केदार (अल्मोड़ा) में रामगंगा की सहायक नदी बनती है। तो पूर्व-पक्षिमी नयार नदीयां भी गंगा में समाहित हो जाती है। दूधातोली से निकलने वाली सबसे बड़ी पक्षिमी रामगंगा, चमोली, अल्मोड़ा एवं…

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राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में उत्तराखंड के निवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उत्तराखंड के कई आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजो की दासता से हमे मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उत्तराखंड की सालम क्रांति ,देघाट में क्रांति और कुली बेगार आंदोलन जैसे कई आंदोलन उत्तराखंड की धरती पर हुए और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का भी देवभूमि के साथ विशेष जुड़ाव रहा। उत्तरखंड में अँग्रेजी शासनकाल – जिस प्रकार भारत के दूसरे क्षेत्रों में अंग्रेजों के आने से अनेक प्रकार की उथल-पुथल हुई, उसी प्रकार उत्तराखंड के इतिहास, संस्कृति तथा जीवन को भी अंग्रेजों ने प्रभावित…

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09 नवंबर सन 2000 को उत्तराखंड राज्य का देश के 27वे राज्य के रूप में निर्माण हुवा। अनेक आंदोलनकारियों ने इस राज्य के निर्माण में अपना बलिदान दिया। प्रस्तुत लेख में उत्तराखंड का इतिहास का आदिकाल से लेकर उत्तराखंड के राजवंशो का तथा उत्तराखंड में गोरखा शाशन का संशिप्त क्रमबद्ध वर्णन संकलित किया गया है। उत्तराखंड में अंग्रेजो का शाशन तथा उत्तराखंड के निर्माण के का इतिहास अगले लेख में संकलित करने की कोशिश करेंगे। आदिकाल- चतुर्थ सहस्त्राब्दी ईसवी पूर्व से पहले लाखो वर्षो तक फैले युग को प्रागैतिहासिक कहते हैं। इस दीर्घकाल में ,उत्तराखंड भू -भाग में मानव -गतिविधियों…

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