Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

फूलदेई त्यौहार पर निबंध – उत्तराखंड का प्रसिद्ध बाल लोक पर्व फूलदेई प्रकृति प्रेम, नववर्ष के स्वागत और लोकसंस्कृति का सुंदर प्रतीक है। यह पर्व चैत्र मास की संक्रांति पर बच्चों द्वारा फूलों से देहरी सजाकर और लोकगीत गाकर मनाया जाता है। इस निबंध में फूलदेई त्योहार का महत्व, इतिहास, मनाने की परंपरा और इससे जुड़ी लोककथाओं के बारे में विस्तार से जानिए। फूलदेई का इतिहास, निबंध और  महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए देखें यह विडियो: https://youtu.be/EbGklD2dM4M प्रस्तावना : उत्तराखंड वासियों का प्रकृति प्रेम जगविख्यात है। चाहे पेड़ों को बचाने के लिए हुआ चिपको आंदोलन हो, पेड़ लगाने की प्रेरणा देने…

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जोगी आयो शहर में व्योपारी (Jogi Aayo Shahar Mein Vyapari Lyrics)-कुमाऊँ अंचल का एक लोकप्रिय कुमाऊनी होली गीत है, जो बैठकी होली और खड़ी होली दोनों में गाया जाता है। इस गीत में एक जोगी (योगी/साधु) के रूप में आए व्यापारी का चंचल संवाद दिखाया गया है, जो नथ-वाली (पारंपरिक आभूषण पहने महिला) से हास्यपूर्ण अंदाज़ में भोजन, पानी और विश्राम की मांग करता है।यह गीत पारंपरिक कुमाऊनी लोक-संस्कृति की झलक देता है, जहाँ श्रृंगार, भक्ति और हास्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। https://youtu.be/6eEWkLo6f1I?si=Sq9XtlL3ZCXMZHq- Jogi Aayo Shahar Mein Vyapari Lyrics (कुमाऊनी होली गीत 2026) जोगी आयो शहर में…

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हा हा मोहन गिरधारी” कुमाऊँ अंचल की एक बेहद लोकप्रिय कुमाऊनी खड़ी होली है। यह गीत कई स्थानों पर बैठकी होली में भी गाया जाता है। कुमाऊनी होली की खासियत यही है कि यहाँ पहाड़ी क्षेत्र में अवधी और ब्रज भाषा के होली गीतों को शास्त्रीय सुरों में गाया जाता है। यह गीत भगवान श्रीकृष्ण के चंचल, नटखट और प्रेममय स्वरूप का वर्णन करता है, जहाँ गोपियों के साथ उनकी होली की लीला का मधुर चित्रण मिलता है। हा हा मोहन गिरधारी लिरिक्स ( ha ha mohan girdhari holi lyrics ) हाँ हाँ हाँ मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ…

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सीता वन में अकेली कैसे रहीसीता वन में अकेली कैसे रही – कुमाऊनी होली गीत लिरिक्स (Sita van me akele kaise rahe lyrics in Hindi) https://youtu.be/iN2Jb8y6swQ कुमाऊँ की बैठकी होली में गाया जाने वाला यह भावपूर्ण गीत सीता के वनवास के त्याग, धैर्य और संघर्ष को लोक-संगीत के माध्यम से सामने रखता है। यह रचना रामायण की कथा से प्रेरित है, लेकिन कुमाऊनी लोकभाव में ढली हुई — जहाँ भक्ति, विरह और संवेदना एक साथ बहती है। यह गीत खास तौर पर कुमाऊनी होली के दौरान सामूहिक गायन में गाया जाता है, और हर अंतरे के साथ वही सवाल लौटता…

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गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी एक बेहद लोकप्रिय पारंपरिक कुमाऊनी होली गीत है, जिसे हर साल होली के मौसम में पूरे उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में गाया जाता है। कुमाऊनी होलियाँ अपनी अलग पहचान रखती हैं — यहाँ ब्रज भाषा मिश्रित स्थानीय बोली में भगवान राम, सीता और रावण प्रसंगों पर आधारित होलियाँ गायी जाती हैं। यही कारण है कि कुमाऊनी होली केवल त्योहार नहीं बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है। आज इस पोस्ट में हम “गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी” Kumaoni Holi Lyrics का पूरा संकलन प्रस्तुत कर रहे हैं। गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी |…

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कुमाऊनी होली का इतिहास : देश में ब्रज के बाद सबसे ज़्यादा होली उत्तराखंड की प्रसिद्ध मानी जाती है। बैठकी होली यानी जो होली बैठ कर गायी जाती है और खड़ी होली जोकि खड़े होकर सामूहिक नृत्य के साथ आंगनों –चौराहों में गायी जाती है। https://youtu.be/iN2Jb8y6swQ खड़ी होली ग्रामीण अंचल की ठेठ सामूहिक अभिव्यक्ति है जबकि बैठकी होली को नगर होली भी कहा जाता है। बैठकी होली शास्त्रीय संगीत की बैठकों के तरह होते हुए भी लोकमानस से इस प्रकार जुड़ी है कि उस महफिल में बैठा हुआ प्रत्येक व्यक्ति उसमें अपने को गायक मानता है और श्रोता के बीच…

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भरतु दाई देहरादून का पहला गैंगस्टर कैसे बना? एक साधारण पहाड़ी छात्र से दून के डॉन बनने तक की पूरी कहानी पढ़ें – गैंगवार, शूटआउट, बैंक लूट और 14 नवंबर 1978 की आख़िरी घटना सहित। आपने बिहार और झारखंड के खूनी गैंग-वार पर बनी फिल्म Gangs of Wasseypur देखी होगी. आपने बॉम्बे के अंडरवर्ल्ड के वो हिंसक किस्से सुने होंगे, जिन्हें सुनकर इस माया नगरी से प्यार नहीं, बल्कि डर लगने लगता था. आपने पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर्स और गैंगस्टर्स की आपसी खूनी अदावतों की खबरें भी खूब पढ़ी होंगी. और सत्तर के दशक में आई हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर…

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कुमाऊनी शिव भजन ;- उत्तराखंड की लोक-भक्ति परंपरा में कुमाऊनी शिव भजन लिरिक्स का विशेष स्थान है। इन्हीं में से एक अत्यंत लोकप्रिय भजन है — शिव हरी कैलाशा। . यानी “शिव हरी कैलाशा… तेरो डमरू बाजो डम–डमा”। यह पारंपरिक पहाड़ी शिव भजन ढोलक की ताल पर गाया जाता है, इसलिए इसे लोग प्यार से ढोलक वाला शिव भजन उत्तराखंड भी कहते हैं। शिवरात्रि, कीर्तन, चौमास और गाँव की संध्याओं में यह Kumaoni Shiv Bhajan Lyrics in Hindi आज भी उतनी ही श्रद्धा से गाया जाता है। यह भजन भगवान शिव की महिमा, उनके डमरू की नाद-ध्वनि और माँ पार्वती…

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आज इस पोस्ट में हम कुमाऊनी शिव भजन लिरिक्स पोस्ट कर रहें है। इसके साथ – साथ इस कुमाऊनी शिव भजन का वीडियो लिंक भी प्रस्तुत कर रहें हैं। कुमाऊं के सुप्रसिद्ध गायक गोपाल मठपाल जी की आवाज में यह भजन बहुत कर्णप्रिय है। कुमाऊनी शिव भजन ( Kumaoni shiv bhajan lyrics )  – म्यर शिवज्यू महादेवा।  पी बे भंग प्याला ! हैं गई मतवाला ! तस निरंकारी द्यप्ता म्यर शिवज्यू महादेवा। तस निरंकारी द्यप्ता म्यर शिवज्यू महादेवा। गले सर्प माला , अरे  डमरू बजाला ! अरे गले सर्प माला , हाई डमरू बजाला ! उत्तराखंड हिमाला ,म्यर शिवज्यू महादेवा।…

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उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी कहानी सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं। यह है काली माता मंदिर, जो हर की पौड़ी से लगभग 300 मीटर दूर भीमगोडा रोड पर एक ऊँचे पहाड़ की गुफा में स्थित है। खास बात यह है कि इस मंदिर के ठीक नीचे से रेलवे लाइन गुजरती है , और मान्यता है कि यहाँ से निकलने वाली हर ट्रेन पहले माँ काली को “सलामी” देती है, फिर आगे बढ़ती है। महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है यह काली माता मंदिर – स्थानीय जानकारों और श्रद्धालुओं की मान्यता…

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