उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति में प्रकृति, खेती और देवताओं का गहरा सम्बन्ध रहा है। यहाँ के पर्वतीय समाज ने अपने जीवन के प्रत्येक कार्य को किसी न किसी लोकदेवता से जोड़ा है। इन्हीं लोकदेवताओं में एक महत्वपूर्ण नाम है — भदाण देवता। यह गढ़वाल क्षेत्र का एक प्रसिद्ध कृषकीय देवता माना जाता है, जिसकी पूजा विशेष रूप से खेती और जल से जुड़े स्थानों पर की जाती है। लोकमान्यता के अनुसार भदाण देवता भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई हलधर बलराम का ही लोक रूप हैं। भदाण देवता का स्वरूप गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्रों में भदाण देवता को खेतों और कृषि की…
Author: Bikram Singh Bhandari
उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल की संस्कृति केवल त्योहारों और लोकगीतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ जीवन के हर चरण से जुड़ी अनेक लोकमान्यताएँ और परंपराएँ सदियों से प्रचलित रही हैं। इन्हीं में से एक बेहद रोचक और भावनात्मक लोकविश्वास है — “अछौत”या “औछा”। कुमाऊँनी भाषा में इसे अवच्छादन भी कहा जाता है। यह परंपरा शिशु जन्म और परिवार की महिलाओं के प्रसव से जुड़ी हुई है, जिसे पहाड़ के लोग आज भी किसी न किसी रूप में याद करते हैं। क्या होता है अछौत या औछा? लोकमान्यता के अनुसार यदि एक ही परिवार में किसी प्रसूता की देवरानी, जेठानी,…
उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति केवल देवी-देवताओं, मेलों और लोकगीतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ के जनजीवन में अनेक ऐसे पारंपरिक विश्वास भी प्रचलित रहे हैं जो प्रकृति, वास्तु और दैनिक जीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं। इन्हीं लोकविश्वासों में एक महत्वपूर्ण शब्द है “बेध” अथवा “भेद”। यह शब्द उत्तराखण्ड के ग्रामीण समाज में लंबे समय से प्रचलित है और आज भी कई क्षेत्रों में लोग इसे गंभीरता से मानते हैं। क्या होता है “बेध” या “भेद” ? “बेध” शब्द का सामान्य अर्थ होता है ,भेदना या आर-पार होना। किन्तु लोकविश्वासों में इसका लक्ष्यार्थ “अनिष्टकारी प्रभाव” माना जाता है। अर्थात…
उत्तराखंड की लोकसंस्कृति केवल देवी-देवताओं, मेलों और लोकगीतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की परंपराओं में वीरता, संघर्ष और सामूहिक चेतना भी गहराई से समाई हुई है। इन्हीं अनोखी परंपराओं में से एक है पिथौरागढ़ जनपद की चौंदास घाटी में मनाया जाने वाला प्रसिद्ध कंडाली महोत्सव। यह ऐसा अद्भुत लोक उत्सव है जिसे हर वर्ष नहीं बल्कि पूरे बारह वर्ष के अंतराल में मनाया जाता है। धारचूला के निकट काली नदी के किनारे बसे चौंदास क्षेत्र में आयोजित होने वाला यह उत्सव महिलाओं के शौर्य, परंपरा और सामूहिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यहां महिलाएं युद्ध मुद्रा में…
गंगा दशहरा पूरे देश मे मनाया जाता है। गंगा दशहरा जेष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। जेष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा माता स्वर्ग से पृथ्वी लोक को आगमन हुआ था। माँ गंगा के धरती के आगमन के उपलक्ष्य में इस दिन को मनाया जाता हैं। उत्तराखंड कुमाउनी लोग इस दिन अपने द्वार पर विशेष अभिमंत्रित पत्र लगाते हैं। जिसे गंगा दशहरा द्वार पत्र कहते हैं। गंगा दशहरा द्वार पत्र के बारे में विस्तार वीडियो देखिए यहां : https://youtu.be/3RcdJ1hZiS8 गंगा अवतरण की कथा जेष्ठ शुक्ल दशमी के दिन भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने मा गंगा…
चंद्रशेखर लोहुमी उत्तराखंड के लोक वैज्ञानिक : उत्तराखंड की धरती ने समय-समय पर ऐसी महान विभूतियों को जन्म दिया है, जिनकी प्रतिभा और योगदान ने देश-दुनिया को चौंकाया। ऐसी ही एक असाधारण शख्सियत थे चंद्रशेखर लोहुमी, जिन्हें “लोक-वैज्ञानिक” के नाम से जाना गया। उनकी खोज और मेहनत से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने उन्हें अपने आवास पर बुलाकर सम्मानित किया था। दिलचस्प बात यह है कि उत्तराखंड में आज भी बहुत कम लोग उनके बारे में जानते हैं, जबकि पंजाब बोर्ड की कक्षा 12 की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में उनके जीवन और कार्य पर पूरा अध्याय शामिल किया गया…
आदिबदरी धाम का प्रसिद्ध नौठा कौथिग मेला, जिसे उत्तराखंड का लठमार मेला कहा जाता है। जानिए इसका इतिहास, परंपरा और युद्ध से उत्सव बनने की पूरी कहानी। प्रस्तावना उत्तराखंड की पवित्र भूमि में स्थित आदिबदरी धाम भगवान नारायण की तपस्थली रही है। यह वही स्थान है जहां प्राचीन समय में ऋषि-मुनियों ने साधना कर आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत किया। पुरातनकाल में इस स्थान को नारायण मठ के नाम से जाना जाता था, जो इसकी धार्मिक महत्ता को और अधिक प्रमाणित करता है। हरिद्वार से लगभग 213 किलोमीटर की दूरी पर, प्राचीन चांदपुरगढ़ के निकट स्थित आदिबदरी आज भी श्रद्धालुओं और…
उत्तराखंड में अनेक लोक पर्व मनाए जाते हैं। अगल अलग मौसम में अलग अलग त्यौहार मनाए जाते हैं। इनमे से एक लोक पर्व बिखौती त्यौहार ( Bikhoti festival ) है। जिसे उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाता है। और प्रसिद्ध स्याल्दे बिखौती का मेला द्वाराहाट में मनाया जाता है। विडियो देखिए : https://youtu.be/wBl9aTnkJRU बिखौती त्यौहार उत्तराखंड के लोक पर्व के रूप में मनाया जाता है। बिखौती त्योहार को विषुवत संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इसलिए इसे लोक भाषा में बिखौती त्यौहार कहा जाता है। प्रत्येक साल बैसाख माह के पहली तिथि को भगवान सूर्यदेव अपनी श्रेष्ठ राशी मेष राशी…
ऐ जा माता मन मा – गढ़वाल की पवित्र भूमि में माता भगवती के भजन एक अलग ही भाव और ऊर्जा लेकर आते हैं। “ऐ जा माता मन मा” एक बेहद लोकप्रिय गढ़वाली भजन है, जो भक्तों के हृदय की श्रद्धा और माता के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है। इस भजन में भक्त माता से अपने मन में विराजने की प्रार्थना करता है। सुरकंडा माता की लोक कहानी देखिये – https://youtu.be/2Sh8dq4UgNM?si=Ox6YMCjpaJ5hpRxR अगर आप “माता के गढ़वाली भजन लिरिक्स”, Aja Mata Man Ma Garhwali Bhajan Lyrics, या ऐ जा माता मन मा lyrics खोज रहे हैं, तो यहां आपको पूरा…
फूलदेई क्या है? (What is Phooldei Festival) फूलदेई पर्व चैत्र मास की पहली संक्रांति, अर्थात मीन संक्रांति को मनाया जाता है, जो सामान्यतः 14 या 15 मार्च को पड़ती है। 2026 में मीन संक्रांति 15 मार्च 2026 को पड़ रही है इसलिए फूलदेई का त्यौहार 15 मार्च 2026 को रविवार के दिन मनाई जाएगी। https://youtu.be/96YxcYjPyjs इसी दिन पहाड़ी सौर कैलेंडर के अनुसार हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। कुमाऊँ और गढ़वाल में इसे फूलदेई / फूल संग्रांत कहा जाता है, जबकि जौनसार क्षेत्र में इसे गोगा नाम से भी जाना जाता है। जब बच्चे देहरी पर फूल डालते…

