गढ़वाली गीत लिरिक्स – इस लेख में हम आपके लिए कुछ सदाबहार गढ़वाली गीत लिरिक्स या गढ़वाली गीतों के बोलों का संकलन कर रहे हैं। उम्मीद है कि हमारा यह संकलन आपको अच्छा लगेगा। प्रसिद्ध सदाबहार गढ़वाली गीतों में सर्वप्रथम हम बीना कुकरेती जी द्वारा गाया हुवा ये सास बहु की नोकझोक वाले से कर रहे हैं। यह गढ़वाल का बहुत पुराना लोक गीत है। इसकी रिकॉर्डिंग चंद्र सिंह राही द्वारा करवाई गई थी। गाडो गुलाबंद गुलबंद को नगीना, गढ़वाली गीत लिरिक्स ( Garhwali song lyrics ) – गाडो गुलाबंद, गुलबंद को नगीना, त्वै तैं मेरी सासू ब्वारी युं की…
Author: Bikram Singh Bhandari
नरशाही मंगल : यह शब्द उत्तराखंड के गोरखा शाशन काल में हुए नृशंश हत्याकांड का बोधक है। उत्तराखंड के चंद शाशकों ने, अपनी प्रजा और सैनिकों को नियंत्रण में रखने के लिए अपनी सेना में , हिमाचल के नगरकोट ,कांगड़ा और अन्य पश्चिमी जिलों से उच्च पदों पर सेनानायक रखे थे। कालान्तर में ये धीरे धीरे यही बस गए और यहाँ के स्थानीय राजपूत परिवारों के साथ बना सम्बन्ध कर यहाँ के निवासी बन गए। इन लोगों को नगरकोटिया कहा जाता था। इनकी बालों की शैली से इन्हे आसानी से पहचाना जा सकता था। इनकी बाल शैली को जुल्फेन कहा…
बूढ़ी देवी : बचपन में जब पहली बार दादी के साथ पहाड़ की ऊँची नीची पगडंडियों पर पैदल सफर पर गया, तो रास्ते में दादी ने हाथ में एक सुखी लकड़ी पकड़ ली, मैंने जिज्ञासा वश पूछ लिया, दादी ये लकड़ी क्यों उठाई? दादी ने बताया आगे बूढ़ी देवी को चढ़ाएंगे। आगे गए दादी ने चौराहे जैसे रस्ते पर बहुत सारी लकड़ियों के ढेर के ऊपर वो लकड़ी डाल दी, और हाथ जोड़ कर आगे बढ़ गई! मै बहुत चकित हुवा , मैंने दादी से पूछा , ये कैसा मंदिर? ना मूर्ति है ना मंदिर है!! फिर बाद में एक…
पिथौरागढ़ जनपद मुख्यालय से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूर, पश्चिम की तरफ समुद्रतल से 6000 फुट की उचाई पर चंडाक में स्थित है, सोर घाटी के शक्तिशाली देवता मोस्टमानु का मंदिर, मोस्टमानु मंदिर। इस मंदिर का प्रभाव क्षेत्र मुख्यतः पिथौरागढ़ जिले के अनेक क्षेत्रों खासकर गौरंग देश, आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुवा है। सुई -बिसुड पट्टी में सुई क्षेत्र का प्रमुख देवता माना जाता है। यहाँ बड़े स्तर पर मोस्टा देवता की पूजा अर्चना की जाती है। गलचौड़ा में भी इनका एक मंदिर अव्यस्थित है। मोस्टा देवता की पूजा चम्पावत जिले के गंगोल पट्टी के जौलाड़ी गावं में…
भगवान भोलेनाथ का पवित्र माह सावन मैदानी क्षेत्रों में 14 जुलाई से शुरू हो रहा है। और पहाड़ी व नेपाली सावन 16 जुलाई से होगा । मैदानी सावन और पहाड़ी सावन में तिथियों में अंतर होने का मूल कारण पंचांग हैं। मैदानी क्षेत्रों में चंद्र पंचांग के आधार पर महीने की शुरुआत होती है। और पहाड़ों में सौर पंचांग के आधार पर महीने की शुरुआत होती है। सावन के शुरू होते ही शुरू हो जाता है, भगवान भोले को जलाभिषेक कराने वाला कावड़ मेला । पिछले दो साल से कोरोना का दंश झेल रहा कावड़ मेला इस साल 2022 में…
जिमदार देवता : जिमदार फारसी के जमीदार शब्द का अभ्रंश कुमाऊनी शब्द है। इसका अर्थ हिंदी के जमीदार की तरह, भूमिधर, या कृषक के साथ साथ कुमाऊनी में जिमदार शब्द कुमाउनी में वर्ण व्यवस्था को इंगित करता है। कुमाउनी वर्ण व्यवस्था के अर्थ में जिमदार का मतलब क्षत्रिय होता है। चंपावत के चराल पट्टी के लोगो द्वारा जिमदार देवता नामक लोकदेवता की भूमिदेवता या ग्राम देवता के रूप में पूजा की जाती है। एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार , एक बार एक गीत संगीत गा कर लोगो का मनोरंजन करने वाला व्यक्ति चंपावत के चरालपट्टी के एक गाँव मे…
चंपावत कुमाऊं के लोक देवता जागुली-भागुली की कहानी :- उत्तराखंड को देवभूमी कहा जाता है। यहाँ कण कण में देवताओं का वास है। सनातन धर्म के लगभग सभी देवताओं को उत्तराखंड वासी पूजते हैं। हिन्दू धर्म के मूल देवताओ के अलावा उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं में अनेकों लोकदेवी देवताओं को पूजते हैं। इनमें से उत्तराखंड कुमाऊं मंडल के चंपावत जिले की गंगोल पट्टी में खेतीखान के आस -पास के क्षेत्रों में खर्कवाल और ओली आदि ब्राह्मण जातियां जागुली-भागुली नामक लोकदेवताओं की पूजा करते हैं। इनके बारे में एक खास बात बताई जाती है, इनके पूजा स्थल पर गौ और…
अपनी मनमोहनी आवाज से मंत्रमुग्ध करने वाले पंकज जीना आजकल सोशल मीडिया की जान बने हुए हैं। उनके स्टेटस वीडियो इंस्टाग्राम रील्स और सोशल मीडिया के सभी मंचों पर काफी पसंद किये जाते हैं। जिंदगी के संघर्षो पर उनके स्टेटस वीडियो ,जिंदगी को नए उत्साह से जीने के लिए प्रेरित करते हैं। पहाड़ो पर बने उनके स्टेटस वीडियो आपको, पहाड़ों की मधुर यादों में खोने पर मजबूर कर देते हैं। पंकज जीना का प्रारंभिक जीवन – सोशल मीडिया से प्राप्त जानकारी के आधार पर पंकज मूलतः उत्तराखंड नैनीताल जिले के ज्योलिकोट के चोपड़ा गांव के रहने वाले है। सामान्य उत्तराखंडी…
उत्तराखंड मे बरसात के मौसम में जब समय से बारिश नही होती या सूखा पड़ने लगता है,तो गढ़वाल मंडल के चमोली जिले में घोग्य पूजा और कुमाऊं के पाली -पछाऊँ ग्वालदेवी की पूजा से बच्चे पहाड़ में बारिश का आवाहन करते हैं। और स्थानीय लोगो की मान्यता है,कि बच्चों की इस निश्छल पूजा से पहाड़ में बारिश होती है। और सूखे से राहत मिलती है। इसके अलावा पहाड़ में बारिश के लिए अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग तरीक़े की पूजा या टोटके करने की परम्पराएँ अभी भी जीवंत हैं। घोग्या पूजा से आती है पहाड़ में बारिश :- घोग्या…
हुड़किया बौल उत्तराखंड के लोकगीतों में पारम्परिक कृषि गीत या श्रम गीत माने जाते हैं। इसमे लोक वाद्य हुड़के को बजाने वाले व्यक्ति को हुड़किया कहा जाता है। और बौल या बोल का अर्थ होता है, सामूहिक रूप से किया जाने वाला कृषि कार्य। इसलिए हुड़किया बौल का अर्थ हुवा, सामूहिक रूप से किये जाने वाले कृषि कार्य के अवसर पर गया जाने वाला लोकगीत। इसमे खेती का काम और गीत की प्रक्रिया एक साथ चलने के कारण इसे अंग्रेजी में एक्शन सांग भी कहते हैं। सामुहिक श्रमगीतों का आयोजन मुख्यतः बरसात के मौसम में खरीफ की फसलों में कृषि…

