देश, धर्म, जाती के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की यादों को संजोए रखने और उनके नाम को अमर करने के लिए, उनकी याद में स्मारक, मूर्ति या प्रतीक बनाने की परंपरा हर देश हर समाज मे रही है। उत्तर भारत मे इन्हें वीर स्तंभ, कीर्ति स्तम्भ आदी कहा जाता है। इसी प्रकार के वीर स्तम्भ उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों खासकर कुमाऊं मंडल में पाए जाते हैं। जिन्हें स्थानीय भाषा मे बिरखम या बिरखमु ढुङ्ग के नाम से जानते हैं। बिरखम उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में पाए जाने वे पाषाणी प्रतीक है, जो सामान्यतः 4 से 5 फ़ीट ऊंचे…
Author: Bikram Singh Bhandari
मडुवा की बाड़ी उत्तराखंड के पहाड़ी लोगो का खास भोज्य पदार्थ है। इसे खासकर पहाड़ के गरीब लोगों का सुपरफूड कहा जाता है। यह भोज्य पदार्थ बहुत ताकतवर होता है। बाड़ी हलवे के जैसा होता है। जिसे मडुवे के आटे से बनाया जाता है ।कुमाऊं मंडल में यह भोज्य दो प्रकार से बनाया जाता है। एक मिष्ठान रूप में दूसरा नमकीन में। मिष्ठान रूप में इसे हलुवे के जैसे लोहे की कढ़ाही में, घी में भूनकर इसमे गुड़ की पाक (चासनी) का प्रयोग करके बनाते हैं। सर्वप्रथम गुड़ का पाक बना कर रख लेते हैं। फिर लोहे की कड़ाही मे,…
न्यौली गीत क्या हैं? न्यौली उत्तराखंड के कुमाऊं में लोकगीत विधा के अंतर्गत, पर्वतीय वनों के मौन वातावरण में किसी विरही द्वारा एकांत में गाये जाने वाला एक ऐसा एकांतिक विरह गीत है। जिसमे अत्यंत ही गहरी एवं संवेदनात्मक शब्दों में अपने प्रिय के प्रति समर्पण की अभिव्यक्ति की जाती है। इसका रूप संवादात्मक भी होता है और एकाकी भी । संवादात्मक में दोनो महिलाएं भी हो सकती है, या दोनो पुरूष भी हो सकते हैं। या एक महिला और एक पुरूष भी होता है। जरूरी नही कि दोनों एक दूसरे को जानते हो। न्यौली गीत द्वीपदीय मुक्तकों के रूप…
छउवा या चीला एक पहाड़ी मिष्ठ पाक्य भोज्य पदार्थ है। ऐसे खासकर शुभ कार्यों व् त्योहारों पर बनाया जाता है। कुमाऊं में कई स्थानों पर हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर इस पहाड़ी मिष्ठान को बनाने की परम्परा है। यह रोटी के आकर का एक मीठा भोजन है। इसे सावधानी से तवे में बड़ी सावधानी से बनाया जाता है। छउवा या चीला को बनाने की विधि सर्वप्रथम गुड़ को पानी में उबाल कर उसकी पाग बना लेते हैं। फिर उस गुड़ की पाग में गेहू का आटा घोल कर उसका घोल बना लेते है। उसको हलके हाथ से मथ लेते हैं। …
आज आपको सुनाते हैं, हमारे पनदा की कहानी ! वैसे पनदा अल्मोड़ा के सबसे विकसित विधानसभा से आने वाले ठैरे। अब आप पूछोगे ये अल्मोड़ा में विकसित विधानसभा कौन सी है? भगवान कसम दाज्यू हमको बी नई पता ठैरा ! ये तो पनदा खुद अपनी फ़ेसबुक में लिखता है, तभी !हमको बी पता लगा कि अल्मोड़ा में कोई सबसे विकसित विधानसभा बी है ….जहां के पनदा नांतिनो के साथ दिल्ली में सटल हैं। वैसे पनदा हमारे एक नंबर के फ़ेसबुकिया ठैरे , फ़ेसबुक से ही उनको एक दिन पता चला, उनके गांव में भी विकास हो गया है….. 3 किलोमीटर…
खाल और छीना का अर्थ- मित्रों हमारे उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक सभी स्थानों के कुछ न कुछ नाम हैं। और ये नाम उस स्थान की विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर रखे जाते हैं। औऱ लगभग सभी स्थलों की अलग अलग पहचान होने के कारण नाम भी अलग अलग होते हैं। मगर उत्तराखंड के कई स्थानों के नाम मिलते जुलते होते हैं या उनके पीछे एक खास शब्द या प्रत्यय जुड़ा रहता है, जो उनका अर्थ समान कर देता है।आपने ध्यान दिया होगा कि कुमाऊं मंडल के कई स्थानों के नामों के आगे “छीना “…
यह लोक कथा धुमाकोट और गड़ी चम्पावती (चंपावत) की लोक कथा है। इस प्रसिद्व लोक कथा के अनुसार भगवान गोरिया ने आतंकी जटिया मसाण का मान मर्दन करके उसे बंदी बनाया था। लोक कथाओं के अनुसार जब भगवान गोरिया धुमाकोट में सुखपूर्वक शाशन कर रहे थे। उनके सुशाशन उनकी वीरता और उनके न्याय की ख्याति चारों ओर फैलने लगी थी । उसी काल मे चंपावत में नागनाथ नामक एक न्यायकारी और धर्मात्मा राजा शाशन करते थे। राजा बृद्धावस्था में आ गए थे, लेकिन उनकी कोई संतान नही थी। वे अपने उत्तराधिकारी की चिंता में डूबे रहते थे। उधर सैमाण के तालाब…
रानीखेत से लगभग 20 किलोमीटर दुरी पर स्थित बिनसर महादेव मंदिर, बेहद रमणीय और अलौकिक है। चारो और देवदार, पाइन और ओक के पेड़ों से घिरा बहुत ही मनभावन दृश्य प्रस्तुत करता है। इस परिसर में अप्रतिम शांति का अहसास होता है। बिनसर महादेव मंदिर रानीखेत का वीडियो देखें : https://youtu.be/dFmdIljLDLQ?si=Y23Dg07nsIaiaile यहाँ आकर आप ध्यान योग का लाभ ले सकते हैं। इस मंदिर की सुंदरता का वर्णन करना शब्दों में सम्भव नहीं है। यह क्षेत्र सम्पूर्ण कुमाऊं के सबसे सुन्दर क्षेत्रों में आता है। यहाँ से हिमालय की चौखम्बा, त्रिशूल, पंचाचूली, नंदादेवी, नंदा कोट आदि चोटियों का रमणीय दर्शन होते…
पहाड़ की इस घास के नाम पर पड़ा अल्मोड़ा का नाम : अल्मोड़ा उत्तरखंड के कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख जिला व नगर है । चंद राजाओं ने अल्मोड़ा की स्थापना की। अल्मोड़ा का पुराना नाम ,राजापुर और आलमनगर था। कालान्तर में इस क्षेत्र में रुमेक्स हेस्टैटस नामक घास अधिक पाए जाने और इस क्षेत्र में इसका ज्यादा प्रयोग होने के कारण इस घास के कुमाउनी नाम भिलमोड़ा, चलमोड़ा , अल्मोड़ा के नाम पर इस नगर का नाम अल्मोड़ा पड़ा। क्योंकि यह घास अल्मोड़ा क्षेत्र में अधिक पाई जाती है। तत्कालीन समय में कटारमल सूर्य मंदिर में वर्त्तन साफ करने के…
किसी ने सत्य कहा है, धर्म तोड़ने का नही जोड़ने का काम करता है। और इसका सटीक उदाहरण हैं, उत्तराखंड में बसे सिख नेगी जाती के लोग। उत्तराखंड की चमोली में बसा सिखों का सबसे बड़ा तीर्थ हेमकुंड साहिब, प्राचीन काल उत्तराखंड में पहाड़ी समुदाय के बीच सिख समुदाय की बसावट का स्पष्ट सबूत है। इसी सबूत को पुख्ता करते हैं, उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल के मलास्यु पट्टी का पीपली गांव,और बिजौली और हलूनी गांव जहां सिख नेगी परिवार रहते हैं। इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल के अन्य कुछ गांव और कोटद्वार में भी सिख नेगी रहते हैं। पिपली में और अन्य…

