मेरी जन्मभूमी उत्तराखंड मेरी जन्मभूमी उत्तराखंड, यह नाम सुनते ही शरीर में एक बड़ी प्यारी सी सिहरन उठ जाती है, लगता है कि जैसे किसी ऐसी चीज के बारे में बात हो रही है जो कि हमारी अपनी है, हमारा हिस्सा है, हमारे प्राण जिसमें बसते हैं ऐसी कोई चीज है, लेकिन यह नाम है हमारे प्यारे प्रदेश का, यह नाम है हमारी मातृभूमि, जन्मभूमि का। उत्तराखंड के बारे में काफी लोग (जो इसको अच्छे से जानते हैं) यह राय रखते हैं कि यह अपने आप में एक सम्पूर्ण राज्य है। यहाँ की प्राकृतिक सम्पदाएँ, यहां के लोगों का स्वभाव,…
Author: Bikram Singh Bhandari
मेरी छैला वे मेरी छबीली गोपाल बाबू गोस्वामी जी का वह प्रसिद्ध गीत था ,जिस पे बॉलीवुड की फेमस अभिनेत्री ने कोर्ट केस कर दिया था। आइये दोस्तों पहले इस गीत के लिरिक्स और वीडियो देख लेते हैं ,फिर उस रोचक वाकये पर बात करेंगे। छैला वे मेरी छबीली गीत लिरिक्स अरे छैला वे मेरी छबीली। ….ओ मधुली ईजा .. अरे छैला वे मेरी छबीली, ओ मेरी हेमा मालिनी। . अरे आखि तेरी काई काई काई , नशीली हाई ,हाई हाई। . अरे आखि तेरी काई काई काई , नशीली हाई ,हाई हाई -२ ओ मेरी छैला छबीली ,मेरी हेमा…
बेडू पाको बारो मासा गीत उत्तराखंड की पहचान है। या यु कहिये यह गीत उत्तराखंड का पहला अघोषित राज्य गीत है। जब कोई उत्तराखंड का निवासी कही अपनी पहचान बताता है तो, बेडू पाको बारो मासा गीत से स्वयं को जोड़ कर खुद का परिचय देता है। आज इस लेख में इसी प्रसिद्ध गीत के बारे में संक्षिप्त जानकारी व बेडू पाको बारोमासा गीत के बोल संकलित कर रहे हैं। स्वर्गीय श्री बिजेंद्र लाल शाह मंच पर गीत प्रस्तुत करते हुए। बेडू पाको बारो मासा सांग लिरिक्स – बेडू पाको बारो मासा , नरेण काफल पाको चैत मेरी छैला। बेडू…
उत्तराखंड सरकार ने अपनी सरकार पोर्टल / अपणि सरकार,और उन्नति पोर्टल का आरम्भ किया। इन पोर्टल का उट्घाटन से सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड में डिजिटल कार्यों को बढ़ावा देना है। यह पोर्टल उत्तराखंड वासियों को उनकी आवश्यक सेवाओं का ऑनलाइन लाभ देने के लिए विकसित किया गया है। इस पोस्ट में हम जानेंगे उत्तराखंड अपनी सरकार पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कैसे करें ? इस पोर्टल किन किन सेवाओं का लाभ मिलेगा? Apni sarkar portal Uttarakhand के साथ उत्तराखंड सरकार ने उन्नति पोर्टल उत्तराखंड भी लॉन्च किया है। अपनी सरकार पोर्टल उत्तराखंड में ऑनलाइन कार्यों को बढ़ावा देने की दिशा में एक…
उत्तराखंड की ‘पामीर’ कही जाने वाली तथा चमोली, गढ़वाल एवं अल्मोड़ा जिलों में फैली दूधातोली शृखला बुग्यालों, चरागाहों और सघन बाँज, खर्सू, उतीश व कैल वृक्षो से आच्छादित 2000-2400 मीटर की ऊँचाई का वन क्षेत्र है। दूधातोली से पक्षिम रामगंगा, आटा गाड़, पक्षिम व पूर्वी नयार तथा विनो नदी का उदगम होता है। आटागाड़ लगभग 30 किलोमीटर बहने के बाद सिमली (चमोली) में पिंडर से मिलती है। विनो भी यही दूरी तय कर केदार (अल्मोड़ा) में रामगंगा की सहायक नदी बनती है। तो पूर्व-पक्षिमी नयार नदीयां भी गंगा में समाहित हो जाती है। दूधातोली से निकलने वाली सबसे बड़ी पक्षिमी रामगंगा, चमोली, अल्मोड़ा एवं…
राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में उत्तराखंड के निवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उत्तराखंड के कई आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजो की दासता से हमे मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उत्तराखंड की सालम क्रांति ,देघाट में क्रांति और कुली बेगार आंदोलन जैसे कई आंदोलन उत्तराखंड की धरती पर हुए और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का भी देवभूमि के साथ विशेष जुड़ाव रहा। उत्तरखंड में अँग्रेजी शासनकाल – जिस प्रकार भारत के दूसरे क्षेत्रों में अंग्रेजों के आने से अनेक प्रकार की उथल-पुथल हुई, उसी प्रकार उत्तराखंड के इतिहास, संस्कृति तथा जीवन को भी अंग्रेजों ने प्रभावित…
09 नवंबर सन 2000 को उत्तराखंड राज्य का देश के 27वे राज्य के रूप में निर्माण हुवा। अनेक आंदोलनकारियों ने इस राज्य के निर्माण में अपना बलिदान दिया। प्रस्तुत लेख में उत्तराखंड का इतिहास का आदिकाल से लेकर उत्तराखंड के राजवंशो का तथा उत्तराखंड में गोरखा शाशन का संशिप्त क्रमबद्ध वर्णन संकलित किया गया है। उत्तराखंड में अंग्रेजो का शाशन तथा उत्तराखंड के निर्माण के का इतिहास अगले लेख में संकलित करने की कोशिश करेंगे। आदिकाल- चतुर्थ सहस्त्राब्दी ईसवी पूर्व से पहले लाखो वर्षो तक फैले युग को प्रागैतिहासिक कहते हैं। इस दीर्घकाल में ,उत्तराखंड भू -भाग में मानव -गतिविधियों…
कंगनी अनाज जिसे हमारे पहाड़ों में कौणी या कौंणी कहा जाता है। यह पहाड़ों की पारंपरिक फसल भी है । वर्तमान में पलायन की मार झेल रहे पहाड़ो में कौंणी लगभग विलुप्त हो गई है। इसका वानस्पतिक नाम Setarika italics है। यह पोएसी कुल का पादप है। यह चीन में मुख्यतः उगाई जाने वाली फसल है। चीन में ई0पु0 600 वर्ष से उत्त्पादन किया जा रहा है। इसलिए “चीनी बाजरा” भी कहा जाता है। यह पूर्वी एशिया में अधिक उगाई जाने वाली फसल है। इसका उपयोग एक घास के रूप में भी होता है। कौणी या कंगनी प्रतिवर्ष होने वाली…
सर्वप्रथम हम यहाँ स्पष्ट करना चाहते हैं, कि यह लेख उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में बहने वाली कोशी नदी के बारे में है । जिसका पौराणिक नाम कौशिकी नदी है। इस कोशी नदी के अलावा नेपाल से निकलने वाली बिहार में बहने वाली कोसी नदी भी है। कोशी नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। यह नदी उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में बहती है। यह रामगंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी है। इस नदी का उद्गम कौसानी के पास धारापानी नामक स्थान है। वहाँ से यह नदी ,सोमेश्वर से अल्मोड़ा की कोशी घाटी हवालबाग , खैरना,गरमपानी ,कैंची के…
कंडोलिया मंदिर पौड़ी गढ़वाल का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पौड़ी गढ़वाल जिला मुख्यालय से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर प्राकृतिक, नैसर्गिक सुंदरता के बीच बसा है। इसके चारों ओर ऊँचे और सुंदर देवदार, बांज आदि के सघन वृक्ष हैं। पौड़ी समुद्र तल से 1814 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस मंदिर के पास कंडोलिया पार्क भी स्थित है। जो उत्तराखंड का पहला लेज़र थीम पार्क है। कंडोलिया मंदिर की चोटी से हिमालय की चोटियों और गंगवारस्यू घाटी के रमणीय दर्शन होते हैं। कहते हैं कि कंडोलिया देवता चंपावत से पौड़ी आये डुंगरियाल नेगी…

