Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

बोल हीरा बोल गीत, पहाड़ी गीत लिरिक्स – मित्रो आज के आर्टिकल में हम आपके लिए फेमस कुमाउनी गीत बोल हीरा बोल गीत के लिरिक्स लाये हैं। इस लेख में बोल हीरा बोल गीत का वीडियो भी है। आप इस गीत का दोनो प्रकार से आनन्द ले सकते हैं। बोल हीरा बोल, के छू तेरो मन मा । बोल हीरा बोल , क्या छू तेरो मन मा दिल कि बात बोल , क्या छू तेरो दिले मा ।। किले छे रिसाई तू, के बाते लुकाई तू । बोल हीरा बोल , चुप ना रो नको लागछि। बोल हीरा बोल ,…

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इनर लाइन परमिट क्या है ? इनर लाइन परमिट राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया गया एक आधिकारिक दस्तावेज है जो भारतीय नागरिकों को एक विशिष्ट अवधि के लिए आईपीएल के तहत राज्य में प्रवेश की अनुमति देता है। कुछ राज्यों के बाहर के निवासियों के साथ-साथ विदेशियों के लिए भी राज्य में प्रवेश करने के लिए परमिट का अनुरोध करना अनिवार्य है। हालांकि, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों को आईएलपी दस्तावेज के बिना राज्य में प्रवेश करने की छूट है। इनर लाइन परमिट का अर्थ है, भारत के कुछ राज्यों में घूमने के लिए जाने के लिए भारत…

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धारा 371 के तहत उत्तराखंड में भू कानून उत्तराखंड में भू कानून की मांग आजकल जोर पकड़ रही हैं। अब तो उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने भी राष्ट्रीय चैनलों पर अपने साक्षात्कार में यह कह दिया है, कि आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड भू कानून पर चर्चा करेंगे । इससे साफ हो रहा कि सरकार भी कही न कही समझ गई है,कि उत्तराखंड भू कानून आंदोलन को अब अनदेखा नही किया जा सकता है। अब उत्तराखंड मांगे भू कानून के साथ, उत्तराखंड में धारा 371 की मांग भी जोर पकड़ रही है। या ये…

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उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल जुलाई 2021की सूची पूर्व मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत का  6 माह के अंदर विधानसभा के लिए चयन नही हो पाया इसलिए उन्हे अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ा। उसके बाद विधायक दल की मीटिंग में श्री पुष्कर सिंह धामी जी को मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया। श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने 04 जुलाई 2021, रविवार के दिन उत्तराखंड के 11वे मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। और उनके साथ उत्तराखंड मंत्रिमंडल 2021 के 12 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। उसके अगले दिन  उत्तराखंड…

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कॉमन पीकॉक तितली उत्तराखंड की राज्य तितली है। राज्य तितली का अर्थ है, कॉमन पीकॉक तितली उत्तराखंड की राज्य प्रतीक है। कॉमन पीकॉक उत्तराखंड का पांचवा राज्य प्रतीक है। उत्तराखंड की इस तितली कॉमन पीकॉक को 07 नवंबर 2016 को राज्य के पांचवे चिन्ह ( प्रतीक ) के रूप में राज्य तितली का स्थान प्राप्त हुआ था। तितली को प्रतीक चिन्ह बनाने वाला उत्तराखंड भारत का दूसरा राज्य है। तितली को प्रतीक चिन्ह बनाने वाला भारत का प्रथम राज्य महाराष्ट्र है। महाराष्ट्र ने 2015 में ब्लू मारमान को अपने राजकीय प्रतीक चिन्हों में शामिल किया था। कॉमन पीकॉक तितली हमारे…

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जैसा कि सभी को ज्ञात है, चुनावी वर्ष में चाहे राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार , लास्ट साल में दोनो रामराज्य वाले मूड में आ जाते हैं। ठीक उसी प्रकार उत्तराखंड में भी चुनावी साल होने के कारण ,वर्तमान मुख्यमंत्री महोदय नई घोषणाओं से जनता का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं। वही उनका साथ देते हुए ऊर्जा मंत्री श्री हरक सिंह रावत ने उत्तराखंड में फ्री बिजली की घोषणा की है। उर्जा मंत्री श्री हरक सिंह रावत के अनुसार राज्य में सामान्य जनता को 100 यूनिट तक  फ्री बिजली मिलेगी। और 200 यूनिट तक बिजली के बिल…

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कलबिष्ट देवता की कहानी चलिए दोस्तो आज आपको बताते हैं, कलबिष्ट देवता की कहानी  लगभग 200 साल पुरानी बात है कि केशव कोट्यूडी का बेटा कल्लू कोट्यूडी नामक एक राजपूत ,कोत्युडकोट में रहता था। उसकी माता का नाम दुर्पता था। उसके नाना का नाम रामाहरड़ था। कल्लू बड़ा वीर एवं रंगीला मिजाज का युवक था। वह किसान था। और बिनसर के जंगलों में ग्वाले का काम करता था। लोक कथाओं में उसका नाम कलबिष्ट, कलुवा या कल्याण बिष्ट और कलविष्ट नाम से प्रसिद्ध है। बताते हैं उसके साथ हमेशा निम्नलिखित सामान रहता था  – मुरली बाँसुरी मोचंग पखाई रमटा घुंघराली…

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गिरीश तिवारी गिर्दा को उत्तराखंड का जनकवि के नाम से याद किया जाता है। गिर्दा की कविताओं ने समय समय पर उत्तराखंड के जनांदोलनों को नई धार दी। गिरीश तिवारी गिर्दा की कविता और उनके गीतों में वो शक्ति थी ,जो लोगो के सोये हुए जमीर को भी जगा देती थी। गिर्दा की इतिहासिक जनगीतों और कविताओं में से उनकी प्रसिद्ध कविता हम लड़ने रयां बैणी, हम लड़ते रूलो का संकलन यहाँ कर रहे हैं। गिर्दा की यह कविता निरंतर संघर्ष के लिए प्रेरित करती है। गिरीश चंद्र तिवारी गिर्दा की कविता – हम लड़ने रयां बैणी बैणी फाँसी नी…

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उत्तराखंड भू कानून उत्तराखंड के लोग मांग रहें हैं, उत्तराखंड के लिए एक सशक्त भू- कानून। आज कल सोशल मीडिया पर उत्तराखंड मांगे भू कानून ट्रेंड कर रहा है। सभी उत्तराखंडियों की एक ही कोशिश है, कैसे भी वर्तमान सरकार के कानों में में ये बात पहुँचे। लगातार कई दिन रोज उत्तराखंड मांगे भू कानून ट्रेंड कर रहा है। अब उत्तराखंड भू कानून आंदोलन सोशल मीडिया से रोड पर उतरने लगा है। उत्तराखंड भू-कानून क्यों मांग रहा है? उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2002 तक उत्तराखंड में अन्य राज्यों के लोग, केवल 500 वर्ग मीटर जमीन खरीद सकता था। 2007 में …

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चौमू देवता का अर्थ है, चार मुह वाला देवता। चमू देवता उत्तराखंड के लोक देवता हैं। इनको पशु चारको का देवता माना जाता है। इनको चमू देवता, चौमू देवता ,चौखम देवता,चमू राज आदि नामों से जानते हैं। चौमू देवता का मूल स्थान चंपावत जिले का नेपाल से सटा हुआ क्षेत्र गुमदेश माना जाता है। चंपावत गुमदेश में चौमू देवता का प्रसिद्ध मंदिर है। चमू देवता की कल्पना पशुपतिनाथ शिव की चतुर्मुखी रूप से की जाती है। कहा जाता है, प्राचीन काल मे चंपावत गुमदेश क्षेत्र में बकासुर नामक राक्षस ने आतंक मचाया था। तब एक बृद्ध महिला की करुण पुकार…

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