उत्तराखंड में ऑनलाइन बनेगा लाइसेंस और ऑनलाइन होगी RC रिन्यूअल | Online learning licence | Online RC renewal in Uttrakhand

उत्तराखंड कोरोना कर्फ्यू में यदि ड्राईविंग लाइसेंस बनाना है, तो यह समाचार आपके लिए है। अब बनेगा उत्तराखंड में ऑनलाइन लाइसेंस ।

कोरोना की इस विकट महामारी, सभी लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं। सामाजिक दूरी नियम के पालन से संक्रमण की चैन तोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसलिए देश के  लगभग सभी राज्यो में लॉकडौन चल रहा है। इस महामारी में सरकार और सरकारी संस्थान से लेकर , निजी कंपनियां और सभी संस्थाएं , जनता को घर बैठे ऑनलाइन सुविधा देने का विचार कर रही है।

इसी क्रम में परिवहन मंत्रालय ने लर्निंग ड्राइवरिंग लाइसेंस और rc renewal को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। अब आपको लाइसेंस रिन्यूअल  के लिए RTO office के चक्कर नही काटने होंगे।

उत्तराखंड में परिवहन विभाग ,बहुत जल्दी ही, लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने वाले हैं। और ऑनलाइन RC रिन्यूअल हो सकेगा। परिवहन विभाग ने कोरोना की दूसरी लहर के मध्य , कोरोना से जूझ रही जनता के लिए राहत का काम किया है।

परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यो को निर्देश दिए हसीन कि, लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस की परिक्रिया और RC renewal की प्रक्रिया को online किया जाय। इस online सेवा के लिए परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों को गाइडलाइन भेज दी है।

उत्तराखंड में भी  लर्निंग ड्राइवरिंग लाइसेंस और  RC renewal  को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है, कि आने वाले 15 से 20 दिनों में यह ऑनलाइन सेवा शुरू हो जाएगी।

उत्तराखंड में ऑनलाइन लाइसेंस
फ़ोटो साभार – गूगल

कैसे बनेगा उत्तराखंड में ऑनलाइन लाइसेंस –

सबसे पहले परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाना होगा इसके बाद learner लाइसेंस पर क्लिक करना होगा , इसके बाद कि पूरी प्रक्रिया, आपको 15-20 दिन में पता चल जााएगी। और टीम देवभूमि दर्शन की कोशिश रहेगी कि, आपके लिए डेमो पोस्ट बनाये कि ऑनलाइन लाइसेंस कैसे बनाये ?laisence बनाने के साथ , इसकी प्रिंट निकालने की की पूरी प्रक्रिया, घर से ही हो जाएगी।

Online digital प्रमाण पत्र और दस्तावेजों का प्रयोग ,लर्निंग लाइसेंस अप्लाई करने, और Online RC renewal में किया जा सकता है। सरल शब्दों में कहे, तो ऑनलाइन प्रमाण पत्र उपलोड करके, ऑनलाईन लर्निंग लाइसेंस और RC रिन्यूअल के लिए पेश किए जा सकते हैं।

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दोनो भाई सिदुवा और बिदुवा रामोलीहाट पहुँच गए,और गंगू के घर मे पहुँच गए। वहाँ जाकर उन्होंने गंगू को कहा कि हम आपके पुत्र हैं।गंगू ने कहाँ , “अरे तुम मेरे पुत्र कहाँ से हो गए ? मैं तो निसंतान हूँ। तुम मेरी जायजाद हड़पना चाहते हो ? इसलिए मेरे पुत्र बनने का नाटक कर रहे हो । तब सिदुवा बिदुआ ने अपनी मंत्र विद्या से साबित कर दिया, कि वो गंगू रमोला के ही पुत्र हैं। गंगू रमोला ने अपनी दोनों रानियों से पूछा कि बताओ किसके पुत्र हैं? तब दोनो रानियां इजुला और बिजुला दोनो ने कहा कि वो उसके पुत्र हैं। गंगू परेशान हो गया। Read more ……

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पहले प्रिंटिंग प्रेस नही हुआ करते थे, तो पंडित जी , कागजो में बच्चों की स्केच पेन खुद ही , गंगा दशहरा द्वार पत्र बनाते थे। ये पंडित जी के लिए काफी मेहनत भरा काम होता था । क्योंकि उस समय पलायन नही था तो हर एक पंडित जी के पास कम से कम 100 जजमान तो होते ही थे। तो उन सभी के लिए मैनुवली (स्वरचित) 100 पेपर बनाने होते थे।

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