Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

आज उत्तराखंड के कई युवा अलग अलग क्षेत्रों में उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण और उसके प्रचार में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहें हैं। उन्ही में से एक नाम है नंदा  सती  का जिन्हे अब उत्तराखंड के लोग मांगल गर्ल के नाम से जानने लगे हैं। उत्तराखंड माँगल गीत जैसा कि हम सब लोगों को पता है , कि मांगल गीत हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग हैं। जैसा कि नाम से पता चल रहा है  उत्तराखंड  में मंगल अवसर पर गाये जाने वाले गीतों को मांगल गीत कहते हैं। शादी ,विवाह ,नामकरण , जनेऊ आदि शुभ कार्यों पर उत्तराखंड…

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उत्तराखंड का राज्य गीत का अनावरण  तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी ने  06  फरवरी 2016  के दिन किया था। 04 मार्च 2016 को इस गीत को राज्यपाल की अनुमति मिल गई थी। उत्तराखंड के राज्यगीत के चयन के लिए ,संस्कृति विभाग ने  जुलाई 2015 में  एक कमेटी बनाई। राज्यगीत चयन कमेटी के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण सिंह बटरोही और इस कमेटी के उपाध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह नेगी थे। चयन कमेटी को देश भर से  203 प्रविष्टियां हुई थी।  इन प्रविष्टियों में से नैनीताल निवासी हेमंत बिष्ट का गीत  चयन हुवा था। अर्थात राज्य गीत के लेखक हेमंत बिष्ट हैं। उत्तराखंड…

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ज्वाल्पा देवी मंदिर के बारे में :- श्री ज्वाल्पा देवी माता मंदिर ,उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल जिले के कफोलस्यू पट्टी के पूर्वी छोर पर पश्चिमी नयार नदी के तट पर स्थित है। कोटद्वार -पौड़ी मुख्य मार्ग पर कोटद्वार से 63 किलोमीटर और पौड़ी से लगभग 33 किलोमीटर पर स्थित है। ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर यह मान्यता है,कि यह मंदिर हिमाचल के कांगड़ा  जिले में स्थित श्री ज्वालामुखी पीठ का उपपीठ बन कर एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ बनकर प्रतिष्ठित हुवा। ज्वाल्पा देवी शक्तिपीठ थालियाल और बिष्ट जाती के लोगो की कुलदेवी मानी जाती है। इस शक्तिपीठ में ग्रीष्म और शीतकालीन…

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पोखु देवता मंदिर उत्तराखंड ,एक ऐसा अनोखा मंदिर जहाँ ,श्रद्धालुओं से लेकर पुजारी तक को देवता की मूर्ति के दर्शन करने की आज्ञा नहीं है। पुजारी और भक्तलोग  पीठ घुमा कर पूजा करते हैं। हमारे उत्तराखंड को यूँ ही नहीं देवभूमि  हैं। आस्था और चमत्कार के अजब गजब बातें और कहानियां यही सुनने और देखने को मिलती हैं। उत्तरकाशी के जिला मुख्यालय से करीबन 160 किलोमीटर दूर ,विकासखंड मोरी में ,टौंस नदी के पास ,सुपिन और रूपिन नदी के संगम में , नैटवाड़ गावं में पोखु  देवता का मंदिर स्थित है। पोखु देवता के बारे में :- पोखू देवता को…

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मित्रों आज आपके लिए उत्तराखंड का प्रसिद्ध गीत ,प्यारी जन्मभूमि मेरो पहाड़  गीत के लिरिक्स और उसका वीडियो लाये हैं। मित्रों यह गीत ,गढ़वाली  गीत मेरी जन्मभूमि मेरो पहाड़  का कुमाऊनी रूपांतरण है। इस गीत का सर्वप्रथम प्रयोग 2003 में आई उत्तराखंडी फिल्म तेरी सौ  में किया था। यह फिल्म उत्तराखंड आंदोलन को समर्पित फिल्म थी। बाद में इसका कुमाऊनी  वर्जन उत्तराखंड के गायक, वर्तमान में इंडियन आइडियल विजेता 2021,पवनदीप राजन  ने गया है। आइये इसके लिरिक्स क्रमशः कुमाऊनी और गढ़वाली में देखते हैं और लिंक द्वारा वीडियो का आनंद भी लेते हैं। प्यारी जन्मभूमि मेरो पहाड़ ,कुमाऊनी गीत प्यारी…

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देवप्रयाग उत्तराखंड के टिहरी जिले में भागीरथी – अलकनंदा नदी के संगम पर स्थित है। देवप्रयाग ऋषिकेश से 70 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित है। 30°-8′ अक्षांश तथा 78 °-39′ रेखांश पर स्थित देवप्रयाग समुद्रतल से 1600 फ़ीट की उचाई पर बसा हुआ है। यह तीन पर्वतों दशरथाचल ,गर्ध्रपर्वत और नरसिंह पर्वत के मध्य ने स्थित है। उत्तराखंड में पवित्र नदियों के संगमों पर पांच प्रयाग बने हैं , जिन्हें पंच प्रयाग कहते हैं। देवप्रयाग इन पंच प्रयागों में सबसे श्रेष्ठ और पहला प्रयाग है। देवप्रयाग का महत्व प्रयागराज के बराबर है।यहाँ का प्रसिद्ध शिलालेख जो यात्रियों की नामावली…

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नारसिंही देवी मंदिर अल्मोड़ा – उत्तराखंड अल्मोड़ा जिले के गोविंदपुर क्षेत्र, गल्ली बस्यूरा नामक गावं में स्थित है माँ नारसिंही देवी का ऐतिहासिक मंदिर। अल्मोड़ा जिला मुख्यालय से लगभग २८-३० किलोमीटर दूर ,अल्मोड़ा -द्वाराहाट मोटरमार्ग के पास स्थित माँ नारसिंही देवी का यह मंदिर अपनी पहचान लिए तरस रहा है। कुमाऊँ के प्रसिद्ध इतिहासकार श्री बद्रीदत्त पांडेय जी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ,”कुमाऊँ का इतिहास ” में इसके बारे में बताया है कि,अल्मोड़ा का यह प्रसिद्ध देवी मंदिर चंदवंशीय राजा देवीचंद ने बनवाया था। https://youtube.com/shorts/ixUoRY90xVo?feature=share मंदिर की बनावट और शैली देख कर ही लगता कि यह मंदिर काफी प्राचीन एवं…

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उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के तिलवाड़ा सौराखाल  रोड पर तिलवाड़ा से लगभग 29 किलोमीटर दूर माता का प्रसिद्ध सिद्धपीठ मठियाणा देवी मंदिर स्थित है। कहा जाता है,कि यह वर्तमान में जाग्रत महाकाली शक्तिपीठ है। मठियाणा देवी मंदिर के बारे में एक लोक कथा प्रचलित है,जिसके अनुसार कई वर्ष पहले मठियाणा देवी भी एक साधारण कन्या थी। उनकी दो माताएं थी । वह बांगर पट्टी के श्रावणी गावँ में रहती थी। उनकी माताओं की आपस मे नही बनती थी। दोनो माताएं अलग अलग रहती थी। उनकी सौतेली माँ गावँ वाले घर मे रहती थी ।और उनकी माँ डांडा मरणा में रहती…

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सुरकंडा देवी मंदिर उत्तराखंड राज्य में टिहरी जिले के ,विकासखंड जौनपुर के ग्राम कद्दूखाल के पास सुरकूट नामक ऊँचे पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर समुद्रतल से 3030 मीटर ऊँचाई पर स्थित है। https://youtu.be/2Sh8dq4UgNM सुरकंडा माता का यह प्रसिद्ध सिद्धपीठ मसूरी से लगभग 40 किलोमीटर और चंबा से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सुरकंडा देवी ,उत्तराखंड के सबसे ऊँचे शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ है।इस मंदिर से उत्तर में त्रिशूल पर्वत, चौखंबा, नंदादेवी,बद्री केदार और गंगोत्री यमुनोत्री के शिखरों के भव्य दर्शन होते हैं। यहाँ से दून घाटी, मसूरी , नई टिहरी, चम्बा,कुंजापुरी,और चन्द्रबदनी के दर्शन भी होते…

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देहरादून में 4 सिद्ध प्रसिद्ध हैं। और इन 4 सिद्धों के चार मंदिर या पीठ देहरादून के 4 कोनो में स्थापित हैं। देहरादून के 4 सिद्धों में , लक्ष्मण सिद्ध , कालू सिद्ध, मानक सिद्ध, मांडुसिद्ध हैं। इनमें से इस लेख में हम लक्ष्मण सिद्ध  के बारे में बताएंगे। देहरादून से 12 किलोमीटर दूर ऋषिकेश मार्ग पर स्थित लक्ष्मण सिद्ध मंदिर , लक्ष्मण बाबा के भक्तों के लिए आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। ऐसी मान्यता है, कि भगवान दत्तात्रेय ने लोककल्याण के लिए अपने 84 शिष्य बनाये थे। और उन्हें अपनी सभी शक्तियां प्रदान की थी। कालांतर में…

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