Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

मित्रों अपनी पहाड़ी भाषा के प्रचार प्रसार के लक्ष्य को केंद्रित करते हुए। हम यहाँ कुछ गढ़वाली चुटकुले (Garhwali jokes ) और कुमाऊनी चुटकुले ( kumauni jokes ) का संकलन कर रहें हैं। अगर अच्छे लगे तो अपनी मित्र मंडली में साझा करें। ये गढ़वाली चुटकले व कुमाउनी चुटकले हमने, सोसल मीडिया के सहयोग से सांकलित किये हैं। गढ़वाली चुटकुले ( Garhwali jokes ) 1- धरमु भैजी का मोबाइल मा एक अंनजानकॅाल आयी। दुसरी तरफ से एक नौनी बुनी छायी,नौनी- क्य तुमारी क्वी गर्लफेंडचा? धरमु-: हां पर तुम के बुना छों? नौनी: तुमारी धर्मपत्नी बुनु छों,घार ता आवा फिर बतांदू…

Read More

अपनी उत्तराखंड की भाषा को सशक्त बनाने के लिए हमे सोशल मीडिया पर अधिकतम, गढ़वाली और कुमाउनी भाषा का प्रयोग करना इसी क्रम में आज हमने इस लेख में गढ़वाली सुविचार औऱ कुमाऊनी सुविचार का संकलन किया है।  सर्वप्रथम हम यहां कुमाऊनी सुविचार, ततपश्चात गढ़वाली सुविचार संकलित करेंगे। कुमाऊनी सुविचार हमार समस्याक इलाज हामेरे पास हुंछ । दुसरक पास तो हमरि समस्याक सुझाव हुंछ। जब दुनिया वाल कूनी ,अब तेकैल निहुन। तब उम्मीद हमा्र का्न में कैं , एक बार आई कोशिश कर। कोशिश करनी वालेक कभि हार नि हुनि । अगर तुम सोचनाछा कि चार मैस के कौल ?…

Read More

लक्ष्मी देवी टम्टा उत्तराखंड की पहली दलित महिला स्नातक थी। तथा वे उत्तराखंड की पहली दलित महिला सम्पादक भी थी। हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में लक्ष्मी देवी का योगदान महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड की पहली अनुसूचित जाती की महिला स्नातक का सम्मान प्राप्त लक्ष्मी देवी टम्टा ने समता पत्रिका के माध्यम से अनुसूचित जाती के लोगो की आवाज को बुलंद स्वर प्रदान किया। तथा दलित वर्ग की शिक्षा समानता के लिए सदा प्रयासरत रही। लक्ष्मी देवी टम्टा का जन्म १६ फरवरी १९१२ को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में हुवा था। इनके पिता का नाम गुलाब राम टम्टा और उनकी माता का नाम…

Read More

अल्मोड़ा विश्वनाथ घाट जितना ज्यादा प्रसिद्ध है। उससे भी कई गुना अधिक प्रसिद्ध है ,इस घाट के भूतों की कहानी । वैसे तो सभी श्मशान घाटों पर भूतों का डेरा रहता है, चुकी ये रात होते ही जाग्रत हो जाते हैं, इसलिए रात को घाटों पर जाने की मनाही रहती हैं। औऱ कहते हैं सभी घाटों की तरह विश्वनाथ घाट पर भी उत्पाती ,और परेशान करने वाले भूतों की टोली रहती थी। एक बार अमावस्या की रात की बात थी। विश्वनाथ घाट अल्मोड़ा  के भूत जाग्रत हो गए थे। उन्होंने सारे घाट परिसर में उधम मचाया हुवा था। पहले जमाने मे…

Read More

उत्तराखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट ने 2021 की नई खेल नीति का प्रस्ताव पास कर दिया। उत्तराखंड खेल नीति 2021 में ,खेल सुविधाओं को बढ़ाना , और छोटी उम्र से ही खिलाड़ियों को तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है। नई खेल नीति 2021 में निम्न बिदुओं पर आधारित है। 1. छोटी उम्र से होगा खेल प्रतिभा का विकास नई खेल नीति 2021 के तहत , खेल सुविधाओं को बढ़ाने और खेल प्रतिभाओं का छोटी उम्र से ही विकास पर जोर दिया जाएगा। उत्तराखंड सरकार के अनुसार नई प्रतिभाओं का विकास 8 साल से…

Read More

टेलीप्रॉम्पटर तकनीक का प्रयोग से मोदी जी ही नही बड़े -बड़े नेता और बड़े बड़े वक्ता ,जो मंच पर बिना देखे, बिना पर्चा पढ़े , एक उच्च कोटि ,उच्च स्तरीय भाषण देते हैं ।और अलग अलग भाषाओं का प्रयोग करते हैं। वे अधिकतर अपने भाषणों में इस खास आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हैं। जिससे वे बड़ी आसानी से बड़े बड़े उच्चस्तरीय भाषण दे देते हैं। और श्रोताओं को एकदम सहज लगता है। श्रोता और देखने वालों को लगता है। कि वक्ता भाषण याद कर के बोल रहा है,या अपने मन से बोल रहा है। इस तकनीक का प्रयोग न्यूज़…

Read More

पिछले वर्ष  में तल्लीताल नैनीताल झील के किनारे लगाया I Love Nainital board का बोर्ड लगाया गया था। जिसे लोगों ने काफी पसंद किया और वह नैनीताल का प्रसिद्ध  और आधिकारिक सेल्फ़ी पॉइंट बन गया। उसी तर्ज  दिनांक 01-12-3921 को अल्मोड़ा नगर निगम ने I love Almora board का बोर्ड़ लगाया है। क्या है I love Almora का बोर्ड और क्यों लगाया गया शहर के नाम पर I love you का बोर्ड पहले यूरोपीय देशों और विदेशों में लगाये जाते थे। यह बोर्ड पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनने लगे। इसी तर्ज पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सर्वप्रथम…

Read More

“बधाण देवता या बौधाण देवता उत्तराखंड में पशुओं की रक्षा और समृधि के देवता के रूप में जाने जाते हैं।और उत्तराखंड के कई भागो में नवजात गाय या भैंस के नामकरण की पूजा को बधाण पूजन ,बलाण पूजन या गाड़ चढ़ाना कहते हैं।” बधाण देवता के बारे में प्राचीन परम्पराओ के अनुसार धिनाई ( दूध दही की सम्पनता ) को उतराखण्ड में सबसे बड़ा धन माना गया है। पहले लड़की की शादी के लिए , लड़के के लिए पहली शर्त होती थी, कि उसके घर मे खूब धिनाई होनी चाहिए अर्थात लड़के का घर दूध दही से परिपूर्ण होना चाहिए।…

Read More

आर्किड के फूल, लोक कथा हिमालयी राज्य अरुणाचल प्रदेश की  प्रसिद्ध लोककथा है। देवभूमी दर्शन की कोशिश है, उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति के प्रचार के साथ अन्य हिमालयी राज्यों की सुंदर लोक कथाओं का वर्णन करें। प्राचीन काल में एक ईमानदार राजा राज्य करता था। उसके राज्य में ऊँचे-ऊँचे सुंदर पहाड़, जंगल, हरियाली भरे बगीचे, कल-कल की मधुर ध्वनि करती नदियाँ और सुन्दर पशु-पक्षी थे। राजा अपनी प्रजा का बहुत ख्याल रखता था। उसकी प्रजा बहुत सुखी थी। उसके राज्य में किसी चीज की कमी नहीं थी। राजा का परिवार में एक रानी और एक राजकुमारी थी। राजा का कोई बेटा…

Read More

उत्तराखंड में भूमि के प्रकार – उत्तराखण्ड में भौगोलिक बनावट के आधार पर राजशाही के समय भूमि को सामान्यतः दो भागो में विभक्त किया गया था। पर्वतीय क्षेत्रो की भूमि को राज अभिलेखों में “परवत” और तराई-भाबर ( मैदानी ) कि भूमि को अभिलेखों में “माल” व “चौरासी माल” के नाम से अभिहित किया गया था। इसमें भी शेष भूमि को उसके उपयोग के आधार पर विभिन्न वर्गो में विभाजित किया गया था। जो इस प्रकार से हैं- कुमाउनी राजपूत जातियां ,बिष्ट ,भंडारी और बोरा जातियों के बारे में संक्षिप्त जानकारी। गाड़: यह वह भूमि है, जो छोटी-बड़ी नदियों की…

Read More