Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

कोसी का घटवार : अधूरे प्रेम की कसक की कहानी गुसाईं का मन चिलम में भी नहीं लगा। मिहल की छाँह से उठकर वह फिर एक बार घट (पनचक्की) के अंदर आया। अभी खप्पर में एक-चौथाई से भी अधिक गेहूँ शेष था। खप्पर में हाथ डालकर उसने व्यर्थ ही उलटा-पलटा और चक्की के पाटों के वृत्त में फैले हुए आटे को झाड़कर एक ढेर बना दिया। बाहर आते-आते उसने फिर एक बार और खप्पर में झाँककर देखा, जैसे यह जानने के लिए कि इतनी देर में कितनी पिसाई हो चुकी है, परंतु अंदर की मिकदार में कोई विशेष अंतर नहीं…

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Job in Haldwani Uttarakhand : हल्द्वानी स्थित बगुना एंटरप्राइजेज कंपनी को घरेलू उपकरणों की मरम्मत और स्थापना के क्षेत्र में काम करने के लिए एक अनुभवी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की आवश्यकता है। यह नौकरी उन उम्मीदवारों के लिए एक बेहतरीन अवसर है, जो इस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। नौकरी की मुख्य जानकारी ( Job in Haldwani Uttarakhand ) :- पद का नाम: इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (घरेलू उपकरण मरम्मत और स्थापना) अनुभव: 3 वर्ष नौकरी स्थान : हल्द्वानी वेतन : ₹18,000 + यात्रा भत्ता (TA) अनिवार्य योग्यता : दोपहिया वाहन (2 व्हीलर) का होना आवश्यक है। कंपनी का विवरण :…

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गढ़वाल मंडल के पौड़ी जनपद में स्थित पंच भैया खाल (Panch bhaiya khal ) एक ऐतिहासिक स्थल है, जो गढ़वाल की मध्यकालीन राजनीति की एक महत्वपूर्ण घटना का साक्षी रहा है। यह स्थान कर्णप्रयाग से श्रीनगर के पैदल यात्रा मार्ग पर गुलाबराय चट्टी और नगरकोटा के बीच एक धार (ridge) पर स्थित है। इसका नाम पंच भैया खाल पड़ा है, जिसका अर्थ है ‘पांच भाइयों की मृत्यु का स्मारक’। यह स्थान न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि यह गढ़वाल के इतिहास की एक रोमांचक और दुखद घटना को भी समेटे हुए है। पंच भैया खाल का ऐतिहासिक महत्व…

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उत्तराखंड के भैरव देवता : उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, लोकदेवताओं और पौराणिक शक्तियों की भूमि रही है। इस क्षेत्र में भैरव देवता को अत्यधिक मान्यता प्राप्त है। लेकिन क्या उत्तराखंड के भैरू देवता वही पौराणिक भैरव हैं जिनका उल्लेख तंत्रशास्त्र और हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है? इस लेख में हम इस रहस्य का विश्लेषण करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि उत्तराखंड के भैरव देवता का धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप क्या है। भैरव देवता: पौराणिक परंपरा और तांत्रिक महत्व : भैरव को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है, जो शिव…

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गढ़वाली और कुमाऊनी टोपी : आजकल देश विदेशों में बसे गढ़वाली और कुमाऊँनी समुदाय के लोगों के बीच एक नया ट्रेंड छाया हुआ है — वो हैं अपनी संस्कृति का प्रतीक, गढ़वाली और कुमाऊनी टोपी ! यह टोपियाँ न सिर्फ पहाड़ी अस्मिता का गौरव बढ़ा रही हैं, बल्कि परदेस में रहते हुए भी लोगों को अपने गाँव, पहाड़ों और त्योहारों की याद दिला रही हैं। चाहे देहरादून की ठंडी हवाएँ हों या अल्मोड़ा के रंग-बिरंगे मेले, इन टोपियों को पहनकर हर प्रवासी को लगता है — “ये तो घर जैसा एहसास है!” क्यों बढ़ रही है इन टोपियों की डिमांड?…

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“मात प्रथा” (Mat System) उत्तराखंड के पुराने टिहरी रियासत, विशेषकर परगना रवाई-जौनपुर क्षेत्र की एक पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक प्रथा है। यह प्रथा ग्रामीण समाज में जातिगत पदानुक्रम को दर्शाती है और निम्न जाति के मजदूरों तथा उच्च जाति के संरक्षकों के बीच आपसी निर्भरता को उजागर करती है। हालांकि 1971 में इसे आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया था, लेकिन यह प्रथा अभी भी इस क्षेत्र के रूढ़िवादी और परंपरावादी समाज में अघोषित रूप से जारी है। मात प्रथा क्या है? मात प्रथा (Mat System) एक सामंती प्रथा थी, जिसमें कोल्टा और अन्य निम्न जाति के समुदाय उच्च जाति के…

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देहरादून जिले के खाटू श्याम मंदिर सेलाकुई (Khatu Shyam Temple Selaqui, Dehradun) की बढ़ती लोकप्रियता, इसके ऐतिहासिक महत्व, दर्शन का सर्वोत्तम समय और धार्मिक विशेषताओं के बारे में जानें। https://youtu.be/AyrrL2ZjBd8 सेलाकुई खाटू श्याम मंदिर, उत्तराखंड का प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर – देहरादून जिले के सेलाकुई नगर में स्थित खाटू श्याम मंदिर (Khatu Shyam Mandir Selaqui) आजकल भक्तों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रतिदिन हज़ारों श्रद्धालु यहाँ बाबा श्याम के दर्शन के लिए पहुँचते हैं, जिससे मंदिर परिसर में सुबह-शाम भक्तिमय माहौल बना रहता है। यह मंदिर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत में खाटू श्याम धामों के…

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रामनगर का परिचय: प्रकृति और इतिहास की गोद में बसा नगर (Introduction to Ramnagar) रामनगर (Ramnagar), उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल (Kumaon Division) के नैनीताल जनपद में स्थित एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर है। यह नगर 29°23’35” उत्तरी अक्षांश (North Latitude) और 79°10’9″ पूर्वी देशांतर (East Longitude) पर कोसी नदी के दक्षिणी तट पर समुद्र तल से 1204 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां की जलवायु समशीतोष्ण है, जो गर्मियों में सुहावनी और सर्दियों में हल्की ठंडी रहती है। 1850 में अंग्रेज कमिश्नर सर हैनरी रैमजे (Sir Henry Ramsay) द्वारा स्थापित यह शहर, कुमाऊं के पाली पछाऊं क्षेत्र और दक्षिण-पूर्वी…

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उत्तराखंड (Uttarakhand) अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं (Cultural Traditions) के लिए प्रसिद्ध है। यहां की लोक संस्कृति में रितुरैण (Riturain) और चैती गीत (Chaiti Songs) का विशेष स्थान है। ये गीत न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक बंधनों को मजबूत करने का भी काम करते हैं। रितुरैण और चैती गीत क्या हैं? (What are Riturain and Chaiti Songs? ) – रितुरैण उत्तराखंड के पारंपरिक गीत हैं जो विशेष रूप से वसंत ऋतु (Spring Season) में गाए जाते हैं। इन गीतों को चैत्र मास (Chaitra Month) में गायक-वादक समूह, औजी (Auji), वादी (Vadi), और मिराशी…

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फूलदेई त्यौहार 2025 :- उत्तराखंड के बाल लोक पर्व के रूप में प्रसिद्ध फूलदेई त्यौहार 2025 में 15 मार्च 2025 को मनाया जायेगा। उत्तराखंड में बच्चों के त्यौहार के रूप में प्रसिद्ध इस त्यौहार में बच्चे गांव में सभी की देहली पर पुष्पार्पण करके उस घर की मंगलकामना करते हैं। बदले में उस घर के लोग या गृहणी उन्हें चावल ,गुड़ और भेंट देती हैं। कुमाऊँ मंडल में इस त्यौहार को फूलदेई कहा जाता है। गढ़वाल के कई हिस्सों में इसे फुलारी त्यौहार कहते हैं। कुमाऊं में यह त्यौहार एकदिवसीय होता है जबकि गढ़वाल क्षेत्र में कही ये पर्व 8…

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