देहरादून: मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण, मिशन वात्सल्य और मिशन शक्ति जैसी अहम योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता के लिए अधिकारियों को कई कड़े और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं।
बैठक के मुख्य अंश एवं निर्देश
- पारदर्शिता पर जोर: ‘टेक होम राशन’ का वितरण पूरी तरह से तकनीकी आधारित होगा।
- बुनियादी सुविधाएं: सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में बिजली और पानी अनिवार्य।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर का सदुपयोग: खाली पड़े पुराने पंचायत भवनों को आंगनवाड़ी केंद्रों में तब्दील किया जाएगा।
- जवाबदेही: बाल देखरेख संस्थाओं का ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ होगा।
टेक होम राशन के लिए लागू होगा ‘फेस रेकग्निशन सिस्टम’ (FRS)
योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि ‘टेक होम राशन’ का 100 प्रतिशत वितरण अब फेस रेकग्निशन सिस्टम (FRS) के तहत किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को इस नई तकनीकी व्यवस्था को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
हर केंद्र में होगी बिजली और पानी की सुविधा
बच्चों के स्वास्थ्य और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में अनिवार्य रूप से विद्युत और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए।
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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि “जिन भी आंगनवाड़ी केंद्रों में बिजली और पानी की सुविधा नहीं है, उनकी सूची संबंधित विभागों को तत्काल उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर अलग से फंड भी उपलब्ध कराया जाएगा।”
अनुपयोगी पंचायत भवनों का होगा सदुपयोग
भवन विहीन आंगनवाड़ी केंद्रों की समस्या को सुलझाने के लिए एक व्यावहारिक कदम उठाते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यदि आस-पास नए पंचायत भवन बनने के कारण पुराने भवन अनुपयोगी पड़े हैं, तो उन्हें आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए दे दिया जाए। विभाग इन भवनों की आवश्यक मरम्मत कराकर इनका उपयोग करे। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि जो पंचायत भवन पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित हो चुके हैं, उन्हें ध्वस्त कर नए सिरे से निर्माण कराया जाए।
संस्थाओं का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट
बाल देखरेख संस्थाओं की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए मुख्य सचिव ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी राजकीय और स्वैच्छिक बाल देखरेख संस्थानों का थर्ड पार्टी ऑडिट (Third Party Audit) कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा, जिला स्तर पर समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जिला स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समितियों की नियमित बैठकें निर्धारित समय पर करने को कहा गया है, ताकि सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।
बैठक में इनकी रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव श्री अमित कुमार सिन्हा, सचिव श्री चन्द्रेश कुमार यादव, डॉ. वी. षणमुगम, श्री रणवीर सिंह चौहान सहित शासन के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
