Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

प्रस्तुत लेख में हम आपको उत्तराखंड के आदर्श हिल स्टेशन मुनस्यारी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी विस्तार देने की कोशिश करेंगे। यह जानकारी निम्न क्रम में दी जाएगी। मुनस्यारी के बारे में आप जिस विषय मे जानकारी चाहते हैं, दिए गए टेबल में उस लाइन पर क्लिक करें। आप अपने मनपसंद टॉपिक पर पहुँच जाएंगे। मुनस्यारी मुन्स्यारी चारो ओर से पर्वतों से घिरा हुआ, एक ख़ूबसरत हिल स्टेशन है। यह उत्तराखंड के जिला पिथौरागढ़ का सीमांत क्षेत्र है। मुनस्यारी की सीमा एक तरफ तिब्बत और दूसरी तरफ नेपाल से लगा है। मुनस्यारी की समुंद्र तल से उचाई 2200 मीटर है।…

Read More

उत्तराखंड देहरादून की रमणीक वादियों में बसा  महामहीम राष्ट्रपति जी का आशियाना जिसे देहरादून अध्यक्ष बॉडीगार्ड इस्टेट आशियाना के नाम से भी जाना जाता है। अब चार साल बाद फिर वहाँ चहल -पहल होगी क्योंकि 8 दिसम्बर को वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देहरादून आएँगी और देहरादून में लगभग 2 दिन ठहरेंगी। अपने देहरादून यात्रा के दौरान महामहीम देहरादून अध्यक्ष बॉडीगार्ड इस्टेट आशियाना में विश्राम करेंगी। चार साल बाद यह मौका फिर आया है, जब देश के सम्मानीय राष्ट्रपति अपनी उपस्थिति से देहरादून अध्यक्ष बॉडीगार्ड इस्टेट आशियानाकी शान बढ़ाएंगी। समाचारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति महोदया को देहरादून में दो…

Read More

मित्रों इस लोक कथा के पहले भाग में आपने पढ़ा स्यूंराजी बोरा और भ्यूंराजी बोरा का परिचय और स्यूंराजी बोरा ने माल भाबर में बहु मोतिमा लुलानी की मदद से गुज्जरहंस लूल को हराकर, माल भाबर में अपना कब्ज़ा जमाया। इधर भ्यूंराजी बोरा अपनी पत्नी गंगा उर्फ़ गंगुली की चाल में फसकर जैंत भाइयों के हाथों अपनी जान गवा देते है। स्यूंराजी बोरा और भ्यूंराजी बोरा की लोककथा का पहला भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अब पढ़े भाग दो- इधर भ्यूंराजी बोरा के प्राण तोते का रूप लेकर माल भाबर अपने भाई स्यूंराजी बोरा के पास पहुंच गए। और…

Read More

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आज उत्तराखंड कनिष्ठ सहायक के 445 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया गया है। पूर्व निर्धारित परीक्षा कैलेंडर के अनुसार यह भर्ती प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने कुछ दिन पहले कनिष्ठ सहायक और अन्य भर्तियों  के अधिचयन अपूर्ण होने के कारण सुधार के लिए भेज दिए थे। इन पदों में आरक्षण की स्थिति , रिक्त पदों की संख्या या सेवा नियमावली सम्बंधित कमिया थी। ये कमिया कम करके आज बुधवार 30 नवंबर 2022 को  कनिष्ठ सहायक भर्ती विज्ञापन उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट psc.uk.gov.in पर जारी कर…

Read More

कुमाउनी कवि और हास्य व्यंग लेखक विनोद पंत खंतोली जी कि कुमाऊनी भाषा में हास्य व्यंग की किताब फसकटेल बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध हो गई है। मूल रूप से बागेश्वर के खंतोली गाव के निवासी विनोद पंत जी वर्तमान में हरिद्वार में निवास करते हैं। कुमाऊनी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित पंत जी के लेख और कविताएं ऑनलाइन और ऑफलाइन  दोनो प्रकार के माध्यमों में छपते रहते हैं। दुधबोली कुमाऊनी के संरक्षण के लिए प्रयासरत पंत जी ,कुमाऊनी भाषा के संरक्षण के लिए होने वाले सभी कार्यक्रमों में अग्रणीय रूप से भाग लेकर वहां श्रोताओं…

Read More

उत्तराखंड सरकार ने प्रसिद्ध कवि गीतकार ,संवाद लेखक और वर्तमान सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष  पद्मश्री प्रसून जोशी को आधिकारिक रूप से उत्तराखंड का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। कला, साहित्य ,प्रबंधन क्षेत्रों में  श्री प्रसून जोशी जी को काफी अनुभव है। और उत्तराखंड का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त होने के बाद यह अनुभव उत्तराखंड के लिए लाभकारी होगा। प्रसून जोशी उत्तराखंड की संस्कृति ,तीर्थ पर्यटन आदि मामलो में होंगे ब्रांड एम्बेसडर। उत्तराखंड के ब्रांड एम्बेसडर प्रसून जोशी के बारे में बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रसून जोशी जी का जन्म  उत्तराखंड के अल्मोड़ा के दन्या गावं में 16 सितम्बर 1968 को हुवा…

Read More

देवभूमी उत्तराखंड को प्रकृति ने रमणीय सुंदरता के साथ स्थान स्थान पर कई रहस्मयी चीजें भी प्रदान की हैं। यहां एक से बढ़कर एक विशाल पर्वत शिखर सुन्दर बुग्यालों के साथ कई रहस्यों को समेटे एक से बढ़कर एक गुफाएं स्थित हैं। यहाँ पाताल भुवनेश्वर जैसी गुफा है जिसके बारे कहा जाता कि कलयुग के अंत का राज इसी गुफा में छुपा है। आज इस लेख में हम उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित एक ऐसी ही रहस्य्मयी गुफा थकुली उडियार के बारे में रोचक जानकारी साँझा कर रहें हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया से लगभग 13 किलोमीटर…

Read More

मार्गशीर्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह उत्सव ,हिमालयी क्षेत्रों का एक खास त्यौहार है ,जो मैदानी दीवाली के ठीक एक माह बाद मार्गशीष की अमावस्या को मनाया जाता है। हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इसे कहीं बूढी दीवाली कही ,कोलेरी दीवाली ,पहाड़ी दिवाली के नाम से मनाया जाता है। उत्तराखंड के टिहरी ,उत्तरकाशी जनपदों के रवाईं ,जौनपुर उत्तरकाशी ,टनकौर आदि में बग्वाली, मंगसीर बग्वाल और जौनसार बावर में यह पर्व बूढ़ी दीवाली के नाम से पांच दिन मनाया जाता है। इसे पढ़े –  जौनसार की बूढी दीवाली के बारे में विस्तार से यहाँ पढ़े। क्यों मानते…

Read More

मित्रों बचपन में हमने अपने दादा दादी नाना नानी से कई कुमाउनी और गढ़वाली लोकथाएँ सुनी हैं। उन्ही में से एक कुमाऊं के द्वाराहाट क्षेत्र के आस पास की स्यूंराजी बोरा और भ्यूंराजी बोरा की लोक कथा है। यह कहानी इतनी रोमांचक है ,यदि कोई इस लोक कथा पर फिल्म बनाना चाहें तो ,बाहुबली और कांतारा से अच्छी फिल्म बन सकती है ,एक्शन रोमांच ,सस्पेंस सब कुछ है इस लोक कथा में। ..तो शुरू करते हैं…. स्यूंराजी बोरा के पिता का नाम झुपुवा बोरा , माँ का नाम झुपुली बौराणी और भाई का नाम भ्यूंराजी बोरा और चाचा का नाम…

Read More

एक कौए के नौ कौवे एक प्रसिद्ध कुमाउनी लोक कथा है। जनज्यूड़ा गांव में एक खीम सिंह नामक बड़े सीधे -साधे व्यक्ति थे। उन्हें प्यार से लोग खिमदा करके बुलाते थे। वे सुबह दिशा खुलने से पहले, उठ जाते थे। हाथ में लोटा लेकर ,कान में जनेऊ लपेट कर वे दूर जंगल की नित्यकर्म हेतु जाते थे। फिर नाह धोकर  दो तीन घंटे तक पूजा करते थे। एक दिन जब अँधेरा ही था ,खिमदा हाथ में लोटा लेकर नित्यकर्म करने जंगल की ओर गए। जब एक झाड़ी की ओट में  बैठ कर पाखाना करने लगे तो वही एक कौए का पंख…

Read More