Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए, उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा अध्यादेश 2023 को अनुमोदन प्रदान किया गया है। उत्तराखंड में नकल विरोधी कानून लागू होने के दिन से प्रभावी होगा। उत्तराखंड की प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनुचित साधनों का करने वालों के खिलाफ दंड का प्रावधान इस प्रकार है –  कोई व्यक्ति, प्रिटिंग प्रेस, सेवा प्रदाता संस्था, प्रबंध तंत्र, कोचिंग संस्थान इत्यादि अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए आजीवन कारावास की सजा तथा 10 करोड़ रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संगठित रूप से परीक्षा कराने वाली संस्था के…

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खुदेड़ गीत – गढ़वाल की विवाहिता नवयुवतियों द्वारा बसंत के आगमन पर अपने मायके की याद में और माता पिता और भाई बहिनो से मिलन की आकुलता में एकाकी गाये जाने वाला गीत खुदेड़ गीत कहलाता है। खासकर यह गीत उनके द्वारा गया जाता है ,जिन्हे मायके में बुलाने वाला कोई नहीं होता है। यह गीत अन्यतम कारुणिक गीत होता है । इसमें नायिका पहाड़ो के वन क्षेत्र में अकेले अथवा सहेलियों के साथ करुण स्वर में खुदेड़ गीत गाती हैं। इन गीतों में अभिनय के रूप में केवल भावाभिनय ही होता है।  केवल महिलाओं के विरह को समर्पित हैं…

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उत्तराखंड के नैनीताल जिले में मुक्तेश्वर नामक बेहद खूबसूरत और रमणीय स्थल है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 2286 मीटर है। मुक्तेश्वर से त्रिशूल, नन्दा देवी आदी हिमालयी चोटियों के नयनाभिराम दर्शन होते हैं। इस स्थान को स्थानीय रूप से मोतेश्वर कहा जाता है। यह स्थान नैनीताल जिला मुख्यालय से 52 किलोमीटर और हल्द्वानी काठगोदाम से लगभग 76 किलोमीटर (बाया ज्योलिकोट) पर स्थित है। यह क्षेत्र अपने नैसर्गिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। मुक्तेश्वर में अंग्रेजों ने सन 1890 में विश्व के प्रमुख सस्थान” भारतीय पशु चिकित्सा अनुसन्धान संस्थान” की स्थापना की गयी थी। यह आज भी सक्रीय है लेकिन अब…

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चित्र में आप जो ध्वज देख रहे हैं उसे ‘निशाण’ कहते हैं। ‘निशाण’ हिंदी शब्द निशान से बना है, यानी कि संकेत/चिन्ह। बद्रीदत्त पांडे जी की पुस्तक ‘कुमाऊं का इतिहास’ के अनुसार राजा सोमचंद(700वीं ईस्वी) के विवाह में निशाण पहली बार उपयोग किया गया। उसी समय छोलिया नृत्य भी पहली पहली बार किया गया। कुल मिलाकर निशाण की परंपरा 1000 वर्ष से भी पुरानी है, और अब यह हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। किताब के अनुसार सोमचंद के शासन के बाद से ही जब किसी राजा की पुत्री का चुनाव करने के लिये कोई अन्य राजा अपने राज्य से…

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26 जनवरी 2023 की परेड में शामिल उत्तराखंड की मानसखंड झांकी को सम्पूर्ण देश की झाकियों में प्रथम स्थान मिला है। मानसखंड झांकी में उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के मंदिर ,उद्यान, लोककला, लोक नृत्य का प्रदर्शन किया गया था। उत्तराखंड की  झांकी में जागेश्वर धाम, उद्यान में नेशनल कार्बेट पार्क, लोककला ऐपण बेलों और विशेष सरस्वती चौकी का अंकन किया गया था। लोक नृत्य के रूप में छोलिया नृत्य करते हुए छोलिया दल ने सभी को आकर्षित किया। आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने ट्वीट करके ख़ुशी उत्तराखंड की जनता साँझा की…. गौरवशाली क्षण! गणतंत्र दिवस के शुभ…

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आज कल श्री बागेश्वर धाम के पीठाधीश श्री धीरेन्द्र शास्त्री चर्चाओं में बने हुए हैं। चर्चाओं  का कारण है उनके द्वारा किये जाने वाला चमत्कार! जी हा श्रद्धालु इसे चमत्कार कह रहें हैं, और तथाकथित बुद्धिजीवी इसे विज्ञान या मैजिक ट्रिक कह रहें हैं। उनका चमत्कार या मैजिक ट्रिक यह है कि, वे ये जान लेते हैं सामने वाले के मन में क्या चल रहा है? वह किस विषय में सोच रहा है? उनकी इसी खूबी के सारे देश के लोग दीवाने हो रहे हैं। और दिन प्रतिदिन उनके समर्थक बढ़ते जा रहे हैं। अब वे चमत्कार कर रहे या…

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आज 26 जनवरी 2023 गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर देवभूमि उत्तराखण्ड की मानसखण्ड झांकी नजर आएगी। मानसखण्ड झांकी में प्रसिद्ध जागेश्वर धाम, कार्बेट नेशनल पार्क में विचरण करने वाले पशु पक्षियों के साथ उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘ऐपण’ कला से बनी सरस्वती चौकी ऐपण चार चांद लगाएगी। जैसा कि हम सबको पता है, उत्तराखंड में मानसखंड कुमाऊं मंडल के भाग को बोला जाता है। जागेश्वर धाम भगवान शिव को समर्पित मानसखंड (कुमाऊ उत्तराखंड) का सुप्रसिद्ध धाम है, कहते हैं इस धाम को कत्यूरियों ने एक रात में निर्मित किया था। कार्बेट नेशनल पार्क उत्तराखंड के सबसे बड़े पार्कों में से…

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छोलिया नृत्य क्या है? यह नृत्य ढोल, दमाऊ, नगाड़ा, तुरी, मशकबीन आदि वाद्य यंत्रों की संगति पर विशेष वेश -भूषा में हाथों में सांकेतिक ढाल तलवार के साथ युद्ध कौशल का प्रदर्शन करने वाला , उत्तराखंड कुमाऊं मंडल  का विशिष्ट लोक नृत्य है। इसके नामकरण के बारे में श्री जुगल किशोर पेटशाली जी कहते हैं, “यह नृत्य युद्धभूमि में लड़ रहे शूरवीरों की वीरता मिश्रित छल का नृत्य है। छल से युद्ध भूमी में. दुश्मन को कैसे पराजित किया जाता है, यही प्रदर्शित करना इस नृत्य का मुख्य लक्ष्य है। इसीलिए इसे छल नृत्य, छलिया नृत्य या छोलिया नृत्य कहा…

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अपनी भाषा ,अपनी बोली के प्रचार -प्रसार को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के आदरणीय  शिक्षकों ने ,गढ़वाली और कुमाउनी भाषा में सरस्वती वंदना की रचना करके एक सराहनीय पहल शुरू की है। प्रस्तुत लेख हम गढ़वाली सरस्वती वंदना और कुमाउनी सरस्वती वंदना के बोल संकलित कर रहे हैं। गढ़वाली में सरस्वती वंदना- नमो भगवती मां सरस्वती यनू ज्ञान कू भंडार दे, पढ़ी- लिखीं हम अग्नै बढ़ जऊं श्रेष्ठ बुद्धि  अपार दे। नमो भगवती मां सरस्वती….. कर सकूं हम मनुज सेवा बुद्धि दे विस्तार दे। जाति धर्म से ऐंच हो हम मां यनु व्यवहार दे। अज्ञानता का कांडा काटी ज्ञान…

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ईजू मेरी प्यारी ईजा साल 2023 का बेस्ट कुमाउनी गीत – भगवानो को  रूप भगवान छू ईजा  …… स्वर्ग  को धरती  में  एक  वरदान छू ईजा इस बार साल के पहले महीने ही, कुमाउनी लोक संगीत की दुनिया एक ऐसा गीत रिलीज़ हुवा है ,जिसे अब तक का साल 2023 का बेस्ट कुमाउनी गीत कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। हालाँकि अभी पूरा साल पड़ा है ,और जिस हिसाब से कुमाउनी लोक संगीत इंडस्ट्री में गीत रिलीज़ हो रहे हैं ,दिसंबर 2023 तक एक से बढ़कर एक कुमाउनी गीत आएंगे। लेकिन जनवरी 2023 में टीम घुघूती जागर RD चैनल…

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