गैस सिलेंडर के दामों में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में सिलेंडर लेकर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।इस दौरान कांग्रेसियों ने भाजपा पर जनविरोधी तथा पूंजीपतियों की सरकार होने का आरोप लगाया तथा केंद्र सरकार व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार का पुतला फूका। हल्द्वानी से कांग्रेस के विधायक सुमित हृदयेश ने सिर पर सिलिंडर रखकर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ़ खूब नारेबाजी की तथा गैस सिलेंडर को श्रद्धांजलि देते हुए लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाकर महिलाओं ने भी विरोध जताया।। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि साल 2014 से…
Author: Bikram Singh Bhandari
फरवरी मार्च के आस पास हिमालयी के पहाड़ों में एक सुन्दर पीला फूल खिलता है। यह फूल पहाड़ों में बसंत का आगाज का प्रतीक माना जाता है। इस फूल को प्योंली फूल या फ्योंली का फूल कहते हैं। फ्योंली फूल से स्थानीय लोगो की भावनाएं भी जुडी हैं।यह फूल हिमालयी संस्कृति में रचा बसा है। इसे एक सुन्दर सुन्दर राजकुमारी का दूसरा जन्म मानते हैं।पथरीले पहाड़ो में उगने वाला यह फूल जिंदगी में सकारत्मकता का सन्देश देता है। फ्योंली फूल की कहानी का यह वीडियो देखें : https://youtu.be/wJnOL8-P9gY?si=cowz8LzX1so7_GEG फ्योंली का फूल का वैज्ञानिक महत्त्व- फ्योंली का फूल का वानस्पतिक नाम…
उत्तराखण्ड में महिलाओं (women of Uttarakhand) को पर्वतीय अर्थव्यवस्था का केंद्रबिंदु कहा जाता है। रोजगार के संसाधनों के अभाव में पुरुष जहां पलायन करने को विवश हैं। वहीं परिवार, खेती-बाड़ी और समाज की जिम्मेदारियां महिलाओं को निभानी पड़ती हैं। अपने कष्टसाध्य जीवन संघर्ष के बूते जीवन जीने वाली उत्तराखण्ड की नारी में हिम्मत, साहस, कर्मठता, निर्भीकता और जुझारूपन की कभी कमी नहीं रही। पहाड़ की माटी से बने उसके शरीर में इतनी सक्षमता होती है कि भाग्य पर रुदन करने की बजाय वह पूरी सामर्थ्य के साथ न सिर्फ घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाती है, बल्कि समाज सेवा, शिक्षा, उद्यम, पर्यावरण…
Chardham opening 2023 – शिवरात्रि पर पंचकालीन गद्दीस्थल श्रीओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में आयोजित धार्मिक समारोह में पंचांग गणना के बाद श्री केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि तय की गई। मंदिर के कपाट 25 अप्रैल को प्रात: 6:20 पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। 20 अप्रैल को भैरवनाथ जी की पूजा होगी। 21 अप्रैल को भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली केदारनाथ प्रस्थान करेगी। इस दिन डोली विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी विश्राम करेगी। 22 अप्रैल को डोली का रात्रि विश्राम फाटा और 23 अप्रैल को गौरीकुंड में होगा। 24 अप्रैल को डोली केदारनाथ धाम पहुंचेगी। 25 अप्रैल को प्रात: विधि-विधान…
भगवान शिव को सनातन धर्म के लोग अपनी अपनी संस्कृति और अपनी बोली भाषा के अनुसार अलग अलग तरीके से मानते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ वासियों से भगवान् शिव का एक अलग ही रिश्ता है। कहते हैं यही भोले का घर और ससुराल दोनों हैं। उत्तराखंड के दोनों मंडलों गढ़वाल और कुमाऊं में भोलेनाथ को अपनी अपनी पद्धतियों से पूजते हैं। तथा ,अपनी अपनी भाषा ,बोली में भगवान शिव का स्तुति गान करते हैं। नाची गेना भोले बाबा,भगवान भोलेनाथ को समर्पित गढ़वाली शिव भजन है ,जो हमे भगवान् शिव की भक्ति में झूमने पर मजबूर कर देता है। इस भजन…
नींबू प्रजाती का यह खास फल माल्टा फल स्वाद में हल्का खट्टा और हल्का मीठा होता है। माल्टा एक पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाला फल है। माल्टा फल का वानस्पतिक नाम citrus Sinesis है। यह फल नींबू के कुल Rutaceae से सम्बन्ध रखता है। https://youtu.be/d0hMvX_Qxgc?si=2_F4wip0dl8M67ue इसका रंग सन्तरे जैसा होता है। इस फल को पहाड़ी सन्तरा या पहाड़ी फलों का राजा भी कहते हैं । सबसे पहले माल्टा का उत्पादन चीन में किया गया था। बाद मे माल्टा का हिमाचल, नेपाल, और उत्तराखंड में उत्पादन शुरू किया गया । माल्टा का पेड़ 6 से 12मीटर तक ऊंचा होता है। इसके…
उत्तराखंड में कोटेश्वर नामक कई शिवालय हैं। इस लेख में हम रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित कोटेश्वर गुफा का वर्णन कर रहें हैं। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में जिला मुख्यालय 4 किलोमीटर आगे अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है यह गुफा। यहाँ चट्टान पर 15 -16 फ़ीट लम्बी और 2 -6 फीट ऊँची प्राकृतिक गुफा है। इस गुफा में कई शिवलिंग हैं। प्रमुख मंदिर में हनुमान जी की आदमकद मूर्ति भी है। कोटेश्वर गुफा का इतिहास – इस गुफा के बारे में यह मान्यता है कि यहाँ भगवान् भोलेनाथ ने तपस्या की थी। इस स्थान…
गलता लोहा – स्वर्गीय श्री शेखर जोशी की कालजयी रचना – मोहन के पैर अनायास ही शिल्पकार टोले की ओर मुड़ गए। उसके मन के किसी कोने में शायद धनराम लोहार के आफर की वह अनुगूँज शेष थी , जिसे वह पिछले तीन-चार दिनों से दुकान की ओर जाते हुए दूर से सुनता रहा था। निहाई पर रखे लाल गर्म लोहे पर पड़ती हथौड़े की धप्-धप् आवाज, ठंडे लोहे पर लगती चोट से उठता ठनकता स्वर और निशाना साधने से पहले खाली निहाई पर पड़ती हथौड़ी की खनक जिन्हें वह दूर से ही पहचान सकता था। लंबे बेंटवाले हँसुवे को लेकर…
उत्तराखंड की लोक कलाएं – लोक कला की दृष्टि से उत्तराखण्ड बहुत समृद्ध है। घर की सजावट में ही लोक कला सबसे पहले देखने को मिलती है। दशहरा, दीपावली, नामकरण, जनेऊ आदि शुभ अवसरों पर महिलाएं घर में ऐपण (अल्पना) बनाती हैं। इसके लिए घर,आंगन या सीढ़ियों को गेरू से लीपा जाता है। चावल को भिगोकर उसे पीसा जाता है। उसके लेप से आकर्षक चित्र बनाए जाते हैं। विभिन्न अवसरों पर नामकरण चौकी, सूर्य चौकी, स्नान चौकी, जन्मदिन चौकी, यज्ञोपवीत चौकी, विवाह चौकी, धूलिअर्घ्य चौकी, वर चौकी, आचार्य चौकी, अष्टदल कमल, स्वास्तिक पीठ, विष्णु पीठ, शिव पीठ, शिव शक्ति पीठ,…
उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए, उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा अध्यादेश 2023 को अनुमोदन प्रदान किया गया है। उत्तराखंड में नकल विरोधी कानून लागू होने के दिन से प्रभावी होगा। उत्तराखंड की प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनुचित साधनों का करने वालों के खिलाफ दंड का प्रावधान इस प्रकार है – कोई व्यक्ति, प्रिटिंग प्रेस, सेवा प्रदाता संस्था, प्रबंध तंत्र, कोचिंग संस्थान इत्यादि अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए आजीवन कारावास की सजा तथा 10 करोड़ रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संगठित रूप से परीक्षा कराने वाली संस्था के…

