आदिकाल से हमारे देश में लोगों द्वारा अपनी खुशियों को नृत्य के नृत्य के रूप में प्रकट करने की परम्परा रही है। विशेषकर त्योहारों की खुशियाँ नृत्य के रूप में मनाई जाती हैं। भारत में कई समृद्ध संस्कृतियों का वास है। प्रत्येक संस्कृति/ वर्ग / समुदाय के लोगो द्वारा एक विशेष नृत्य विकसित किया गया है , जो उनकी पारम्परिक संस्कृति का प्रदर्शन करता है। वर्गविशेष या समुदाय विशेष के आम लोगों द्वारा सांस्कृतिक प्रदर्शन को विकसित किये गए नृत्य को लोकनृत्य कहते हैं। भारत में प्रत्येक समुदाय के अपने -अपने विशेष लोक नृत्य हैं। इसी प्रकार उत्तराखंड के प्रत्येक…
Author: Bikram Singh Bhandari
उत्तराखंड के पहाड़ की वास्तविक हालत बताती प्रदीप बिलजवान विलोचन जी की यह गढ़वाली कविता। गढ़वाली कविता का शीर्षक है – “बची खुची बांदरू न उजाड़ी” जनसंख्या बढ़णी छ, अर देखा तब बढ़णी छ। बेरोजगारी यां लई त द्वी हजार रुपिया कु नोट ह्वेगी तीस साल पैली का जनू एक सौ नोटा बरोबरी। यू मिलावटी, खाणु हमन कब तलक खाणी दवाई लै कु हर रोज डॉक्टर का पास कब तलक जाणी बोतल बंद अर चूना मिल्यूं छ यख कू पाणी काम धंधा खेती पाती कन कू क्वी भी नी छ बल त बोला अब हमन कोदा झंगोरा की दाणी द…
आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी भयावह स्थिति का सामना कर रही है ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है पर्यावरण संरक्षण की, उसके लिए हम सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने की आवश्यकता है। हाल ही में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और उसकी सहयोगी संस्था सरकारटेल के सहयोग से महाराष्ट्र में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें आने वाले जल संकट और उसके संरक्षण को लेकर गहन चर्चा हुई। इस दौरान अन्य देशो से आए हुए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम ने जल संकट को एक भयानक वैश्विक संकट मानते हुए इसके समाधान के लिये…
हल्द्वानी में महिला रामलीला – कुमाऊँ के सबसे बड़े आर्थिक, शैक्षिक, व्यापारिक एवम आवासीय केंद्र यानी “कुमाऊँ के प्रवेश द्वार” कहे जाने वाले हल्द्वानी में पहली बार होने जा रहा है महिला रामलीला का मंचन। जी हां साथियों इस बार की रामलीला में समस्त किरदार, भगवान राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न व रावण सहित सभी किरदार महिलाओं द्वारा निभाये जा रहे हैं। 2 अप्रैल 2023 से प्रतिदिन शाम 5 बजे से 8 बजे तक लोग इस रामलीला का आनंद उठा पाएंगे। कुमाऊ में रामलीला का मंचन बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है, यहां हर साल हजारों जगहों पर रामलीला होती…
रामनगर में आयोजित जी-20 सम्मेलन में पहुंचे 20 देशों के G20 प्रतिनिधियों को उत्तराखंड के परिधान यहां की संस्कृति के साथ आएं यहां के खानपान भी बहुत पसंद आए उन्होंने झोड़ा चाचरी का आनंद भी उठाया और सुप्रसिद्ध कुमाऊनी गाना बेडू पाको बारामासा पर ठुमके भी लगाए। लेकिन सबसे खास बात यह है कि उन्हें अल्मोड़े की सुप्रसिद्ध बाल मिठाई जिसके लिए अल्मोड़ा प्रसिद्ध है वो बहुत पसंद आयी और उन्होंने बाल मिठाई की खूब तारीफ की। बाल मिठाई की शुरुआत -आपको बता दें कि अल्मोड़ा की प्रसिद्ध बाल मिठाई को इजात करने का श्रेय जाता है अल्मोड़े के प्रसिद्ध…
The Indian express की तरफ से भारत के 2023 के सौ शक्तिशाली भारतीयों की सूची के बारे में जानने के लिए भारत के राजनीतिज्ञों। व्यवसायियों, खिलाड़ियों और अभिनेताओं के बीच सर्वे कराकर एक सूची का निर्धारण किया गया। 2023 के सौ शक्तिशाली भारतीयों की सूची की लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले स्थान पर और चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ चौथे स्थान पर है। राष्ट्रिय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भगवत छठे नम्बर पर है ,और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चैयरमेन मुकेश अम्बानी नवे स्थान पर हैं। 2023 के सौ शक्तिशाली भारतीयों में तीन उत्तराखंडियों को भी स्थान मिला है। जो अपने आप में…
उत्तराखंड में महिलाओं का स्वर्णिंम इतिहास रहा है। शाशन या सत्ता सहयोग मिले या न मिले, उत्तराखंड की दृढ़ निश्चयी मातृशक्ति ने अपने लिए स्वतंत्र रह चुनी और उस पर सफल होकर दिखाया। उत्तराखंड की महिलाओं की सफलता की कहानिया प्रतिदिन ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से सुन कर मन गौरवान्वित हो जाता है। आज आपको उत्तराखंड की एक ऐसी ही लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं, जो आजकल उत्तराखंड में ढोल गर्ल के नाम से मशहूर हो रही है। कौन है उत्तराखंड की ढोल गर्ल? उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के गडेरा, पीपलकोटी निवासी वर्षा बंडवाल ने अपने लिए…
प्रस्तावना – उत्तराखंड को देवभूमि है। यहाँ कण कण में दैवीय शक्तियों का वास है। यहाँ सनातन धर्म के लगभग ऋषि मुनियो ने सैकड़ों साल की तपस्या करके अपने तप से इसे देवभूमि के रूप में सवारा है। दैवीय शक्तियों ने यहाँ समय समय पर जन्म लेकर ,इस भूमि देवभूमि बना दिया है। माँ धारी देवी भी उत्तराखंड की प्रमुख दैवीय शक्तियों में एक है। धारी देवी (Dhari devi) को उत्तराखंड की रक्षक कहा जाता है। इन्हे उत्तराखंड के चार धामों की रक्षक देवी भी कहा जाता है। यदि आप बिना धारी देवी के दर्शन किये ,चार धाम की यात्रा…
उद्यान निदेशक डाॅ० हरमिंदर सिंह बवेजा के अथक प्रयासों से पंडित दिन दयाल उपाध्याय राजकीय उद्यान चौबटिया रानीखेत को डच गवर्नमेंट (नीदरलैंड) के सहयोग से उत्कृष्टता केंद्र यानी एक्सीलेंस सेंटर के रूप में विकसित किए जाने को लेकर नीदरलैंड से आए वैज्ञानिको द्वारा चौबटिया गार्डन का निरीक्षण व भ्रमण किया गया। इस संबंध में वैज्ञानिकों द्वारा शीघ्र ही विस्तृत कार्य योजना तैयार कर उसकी रिपोर्ट भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।राजकीय उद्यान चौबटिया में नीदरलैंड से आए विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों ने क्षेत्रीय काश्तकारों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के प्रतिनिधियों से वार्ता करते हुए उनके सुझाव लिए गए। वहां पहुंचे…
केदारमण्डले दिव्ये मन्दाकिन्याः परे तटे । सरस्वत्यास्तटे सौम्ये कालीतीर्थमितिस्मृतम् ।। स्कन्द पुराण , केदारखण्ड ,अध्याय -85 अर्थात-केदारमण्डल (उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में) में मन्दाकिनी नदी के दूसरे (पूर्वी) तट और सरस्वती नदी के पश्चिमी तट से सटे स्थल पर कालीतीर्थ है। इसलिए इस क्षेत्र से आगे सरस्वती नदी में कालीशिला से आनेवाली धारा के मिलने के कारण इसका नाम काली नदी हो जाता है। इसी क्षेत्र को कालीमठ क्षेत्र कहते हैं। कालीमठ का पुराना नाम कलंग्वाड़ था। कालीमठ का पौराणिक नाम कालीतीर्थ है। कालीमठ क्षेत्र वर्तमान में उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में पड़ता है। कालीमठ मंदिर – कालीमठ मंदिर (Kalimath mandir), माता…