विगत वर्षों की तरह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अपना सर्वस्व योगदान देने वाले चनौदा सोमेश्वर के वीर शहीदों को जनता ने और जनप्रतिनिधियों ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रतिवर्ष 2 सितंबर को चनोदा सोमेश्वर में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी शाहदत देकर हमारी स्वतंत्रता सुनिश्चित करवाने वाले शहीदों को सम्मान और भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ याद किया जाता है। क्या हुवा था उस दिन? चनोदा सोमेश्वर क्षेत्र के अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश की आजादी में और अंग्रेजों के साथ लड़ाई में अपना विशेष योगदान दिया। 8 अगस्त 1942 ई में मुंबई में कांग्रेस के मुख्य कार्यकर्ताओं के…
Author: Bikram Singh Bhandari
भारतीय डाक सेवा: – प्रेम-विनिमय का आज भी एक प्रतीक! ✍️लेख -अशोक जोशी अभी अलविदा मत कहो दोस्तों! क्योंकि बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी फूलों की तरह दिल में बसाए हुए रखना यादों के चिराग़ों को जलाए हुए रखना भाई बहन के निस्वार्थ प्रेम और अटूट विश्वास का त्यौहार रक्षाबंधन कल देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जहाँ बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा का धागा बाँधने का बेसब्री से इंतजार रहता है, तो वहीं दूसरी ओर दूर-दराज बसे भाइयों को भी…
69 National Film Awards में उत्तराखंड के दो युवाओं को उनके बेहतरीन कार्य के लिए Non feature Film category में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिलने जा रहा है। जिसमे सृष्टि लखेड़ा को उनकी फिल्म एक था गांव के लिए और बिट्टू रावत को पाताल ती में बेस्ट सिनेमेटोग्राफर के लिए चयनित किया गया है। सृष्टि लखेड़ा की एक था गांव को National film Awards – उत्तराखंड के पलायन पर आधारित फिल्म “एक था गांव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई है। गढ़वाली और हिन्दी में बनी इस फिल्म मे पलायन से खाली हो चुके गाँव की कहानी…
कुमाऊँ मस्टिफ (Kumaon Mastiff) एक दुर्लभ कुत्तों की प्रजाती है। इस नस्ल की उत्पत्ती भारत के उत्तराखंड राज्य के कुमाऊ मंडल मे मानी जाती है। इसलिए इस प्रजाती का नाम Kumaon mastiff है। इस प्रजाती को साइप्रो कुकुर के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें सर्वप्रथम कुमाऊं के पहाड़ी इलाकों में रखवाली के लिए पाला गया था। एक पुराने अध्ययन के अनुसार भारत में अब केवल 150 से 200 कुमाऊँ मस्टिफ प्रजाती के कुत्ते बचे हैं। यह अध्ययन पुराना है वर्तमान में इनकी संख्या और कम हो गई होगी ।असाधारण रूप से शक्तिशाली ये कुत्ते अत्यंत परिश्रमी और वफादार…
हिलजात्रा उत्सव उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले का प्रमुख उत्सव है। यह सोरघाटी में विशेषतः बजेटी, कुमोड़, बराल गावं, थरकोट, बलकोट, चमाली, पुरान, देवथल, सेरी, रसैपाटा में मनाया जाने वाला लोकनृत्य है। और कुछ परिवर्तनों के साथ हरिण चित्तल नृत्य के रूप में अस्कोट और कनालीछीना में मनाया जाता है। यह लोकनृत्य कृषि व्यवसाय से संबंधित होने के कारण इसमें अभिनय करने वालों का रूप भी उसी के अनुसार होता है। अर्थात इसमें कोई हल जोतते हुए बैल बनता है तो कोई हल जोतने वाला किसान ,कोई ग्वाला ,कोई मेड बांधने वाला तो कोई अन्य पशुओं का रूप…
प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड नैनीताल के प्रसिद्ध मन्दिर कैंची धाम में ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। इसके साथ-साथ कैंची धाम मन्दिर के अन्दर फोटो खीचनें पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। मन्दिर के बाहर और आस पास बोर्ड लगाकर श्रद्धालुओं से विनम्र अनुरोध किया गया है, कि श्री कैंची धाम मन्दिर की पवित्रता और मर्यादा का ध्यान रखते हुए, मन्दिर में मार्यादित वस्तों में प्रवेश करें।अमर्यादित और अशोभनीय वस्त्र पहन कर मन्दिर में प्रवेश न करें। मन्दिर के अन्दर पहुंचते ही मोबाईल silent कर दें और मन्दिर के अन्तर फोटोग्राफी और विडोयोग्राफी न करें।पकड़े जाने पर…
तीलू रौतेली गढ़वाल की एक वीरांगना कन्या थी, जो मात्र पंद्रह वर्ष की आयु में युद्ध में कूद पड़ी। और बाइस वर्ष की आयु तक सात युद्ध लड़ चुकी थी। सम्भवतः तीलू विश्व की सबसे कम उम्र की वीरांगना थी जिसने अपने छोटे से जीवन में सात युद्ध जीते। Teelu Rauteli को गढ़वाल की लक्ष्मीबाई भी कहते हैं। तीलू रौतेली का असली नाम तिलोत्तमा देवी था। तीलू रौतेली पौड़ी गढ़वाल के चौंदकोट के गुराड गावं की निवासी थी। इनका जन्म 8 अगस्त 1663 में हुवा था। इनके पिता का नाम भूप सिंह रावत और माता का नाम मैनावती देवी था।…
सनातनी राखी :- रक्षाबंधन 2023 का त्यौहार आने वाला है। बाजार राखियों से सज चुके हैं। इनमें से कई राखियां विदेशी आती हैं। मसलन चीन का राखी बाजार पर बहुत बड़ा प्रभाव है। लेकिन बिगत कुछ वर्षों से चीन का राखी बाजार पर वर्चस्व कम हुवा है। इसका मुख्य कारण है स्वदेशी को बढ़ावा देना । जनता, सामाजिक संस्थाएं और सरकार अब स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा दे रही है। और कई लोग अब घर मे स्वदेशी हस्तनिर्मित राखियां बना कर घर मे अच्छा रोजगार कमा रहे हैं। इसी प्रकार उत्तराखंड राज्य के विभिन्न लोग, सामाजिक संस्थाएं स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा…
उत्तराखंड एक प्राकृतिक प्रदेश है। यहाँ के निवासियों का और प्रकृति का बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध है। प्रकृति यहाँ के लोगो को एक आदर्श जीवनचर्या के लिए एक माँ की तरह सारी सुविधाएँ देती है। बदले में उत्तराखंड के निवासी समय समय पर प्रकृति की रक्षा और उसके सवर्धन से जुड़े पर्व ,उत्सव मना कर प्रकृति के प्रति अपना आभार प्रकट करना नहीं भूलते। प्रकृति माँ के प्रति आभार प्रकट करने का उत्सव है अंढूड़ी उत्सव, या बटर फेस्टिवल (butter festival) उत्तरकाशी में रैथल ग्रामवासी , मखमली बुग्याल दायरा में भाद्रपद की संक्रांति को अपने मवेशियों के ताजे दूध ,दही ,…
भगवान शिव के पवित्र सावन माह में सभी भाषा संस्कृति के लोग अपनी-अपनी भाषा और संस्कृति में गीत बनाते हैं। अपने अन्दाज में भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। भगवान शिव का घर हिमालय कैलाश में है। और उत्तराखंड देवभूमि में भगवान शिव के कई चमत्कारी मन्दिर और उनका पावन धाम केदारनाथ है। हरियाणवी गायक गुलजार छिंदवाड़ा ने भगवान शिव को समर्पित एक भजन बनाया है, जिसके बोल हैं. “उत्तराखंड के राजा”। हालांकि यह भजन साल 2022 के सावन में रिलीज हो गया था। और यूट्यूब पर टॉप Five में रैंक भी किया था। अभी भी यह हरियाणवी…


