मंगलाछू ताल – उत्तराखंड को यूं ही देवभूमी नहीं कहा जाता है। यहां की भूमी प्राकृतिक सुन्दरता के साथ अनजान अनदेखे रहस्यों से भी भरी पडी है। क्या आपने कभी देखा या सुना है ? कि किसी तालाब या बावड़ी के किनारे सीटी या ताली बजाने से बुलबुले उठे? आज उत्तराखंड के ऐसे ही एक रहस्यमय ताल मंगलाछू ताल के बारे में बात करेंगे। इस ताल के किनारे ताली या सीटी बजाने से यह ताल बुलबुलों के रूप में प्रतिक्रिया देता है। अर्थात जब हम इस किनारे ताली या सीटी बजाते हैं, तो इस ताल में से बुलबुले निकलते हैं।…
Author: Bikram Singh Bhandari
कोदो की नेठाउण- श्रीअन्न मडुवा, कोदो को समर्पित जौनसार का लोकपर्व कोदो की नेठाउण मनाया जाता हैं। यह उत्तराखंड के देहरादून जनपद के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के कृषकों का एक लोकउत्सव है, जो वर्षाकाल में मडुवे की गोड़ाई की समाप्ति पर मनाया जाता है। वस्तुतः मडुवा यहां के कृषि उत्पादों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण उत्पाद रहा है। उत्तराखंड लोकजीवन में मडुवा विशेष स्थान रहा हैं। मडुवा को स्थानीय भाषा मे कोदो कहा जाता है। कोदा एक पौष्टिक मोटा अनाज है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को मोटा अनाज का अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया है। इस…
Harela festival उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध लोक पर्व है। हरेला पर्व प्रकृति को समर्पित लोकपर्व या त्यौहार है। उत्तराखंड का हरेला पर्व प्रतिवर्ष कर्क संक्रांति को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में harela festival 16 जुलाई को मनाया जायेगा। यह पर्व मुख्यतः उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में अधिक मनाया जाता है। पुरे वर्ष भर कुमाऊं मंडल में तीन प्रकार के हरेले मनाये जाते हैं। लेकिन उत्तराखंड के चौमास यानि जुलाई में मनाये जाने वाले हरेला त्यौहार का विशेष महत्व होता है। इस दिन से पहाड़ियों ( पहाड़ के निवासियों ) सावन शुरू हो जाते हैं। हिमाचल ,नेपाल और उत्तराखंड के…
हरेला पर डिकर पूजा – डिकर का मतलब है पूजा के लिए मूर्ति या वनस्पतियों से बनाई गई दैवी मूर्तियां। इनका निर्माण मुख्यतः कुमाऊं मंडल में हरेला त्यौहार, और सातू-आठु, जन्माष्टमी पर किया जाता है। कुमाऊं के पुरोहित वर्गीय समाज में हरेले को शिव-पार्वती के विवाह का दिन माना जाता है। अतः इस दिन शिव परिवार के सभी सदस्यों के मिट्टी के डिकरे बनाकर उन्हें हरियाले के पूड़ों के बीच में स्थापितकरके उनका विधिवत पूजन किया जाता है। इसी प्रकारश्री कृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण, गायें, गोवर्धन पर्वत आदि के डिकरे बनाकर पूजे जाते हैं। कैसे बनाये जाते हैं हरेले के…
उत्तराखंड में रोजगार की आस में बैठे युवाओं के लिए ख़ुशख़बरी आई है। उत्तराखंड समूह ग 2023 (Uttarakhand group C vacancy 2023) की भर्तियों के क्रम में 10 जुलाई 2023 को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने, उत्तराखण्ड रेशम विभाग के अंतर्गत सहकारिता पर्वेक्षक के लिए 2 पदों, और शहरी विकास विभाग उत्तराखंड के अंतर्गत विभिन्न निकायों /निगमों में पर्यावरण पर्वेक्षक के 53 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित कियें हैं। इसके इच्छुक अभ्यर्थी 10 जुलाई 2023 से 31 जुलाई 2023 तक ऑनलाइन आवेदन भर सकते हैं। उत्तराखंड समूह ग 2023 सहकारिता पर्वेक्षक और पर्यावरण पर्वेक्षक से संबंधित प्रमुख तिथियां- विज्ञापन प्रकाशित होने की…
पिछले 4 दिन से समस्त भारत मे बारिश ने कहर बरपा रखा है। उत्तर भारत मे इसका सबसे ज्यादा असर हिमाचल में देखने को मिल रहा है। हिमाचल में जल प्रलय की स्थिति बनी हुई है। यहां के सभी जिलों में बारिश ने अपना कहर बरपा रखा है। और पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी लगातार बारिश चल रही है। प्रशाशन ने 12 जुलाई तक का अलर्ट घोषित किया हुवा है। वही हिमाचल की इस जल प्रलय के बीच हिमाचल का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो एक प्राचीन मंदिर भीषण बाढ़ के बीच अडिग खड़ा है।…
हरेला पर्व उत्तराखंड प्राचीनकाल से अपनी परम्पराओं द्वारा प्रकृति प्रेम और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी और प्रकृति की रक्षा की सद्भावना को दर्शाता आया है। इसीलिये उत्तराखंड को देवभूमी और प्रकृति प्रदेश भी कहते हैं। प्रकृति को समर्पित उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला प्रत्येक वर्ष कर्क संक्रांति श्रावण मास के पहले दिन मनाया जाता है। उत्तराखंड का यह पर्व प्रकृति प्रेम के साथ कृषि विज्ञान को भी समर्पित है। इस त्यौहार में मिश्रित अनाज को उगाया जाता है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाने के बाद दिन बढ़ने लगते हैं। वैसे ही कर्क संक्रांति से सूर्य भगवान दक्षिणायन…
कानाताल भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक छोटा और सुन्दर हिल स्टेशन है। उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित यह हिल स्टेशन, पवित्र शहर ऋषिकेश के पास स्थित है। समुद्र तल से 8500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन,सुन्दर व शान्त हिमालय के पहाड़ों से घिरा हुवा है। दरसल यह एक सुन्दर गांव है। यह शांत हिल स्टेशन मसूरी – चम्बा हाईवे पर स्थित है। यह स्थान मसूरी से 38 किलोमीटर व चम्बा (टिहरी) से 12 किलोमीटर दूर है। वर्तमान में यह शांत हिल स्टेशन काफी प्रसिद्ध हो रहा है। कानाताल दिल्ली से लगभग 300 किलोमीटर दूर…
मित्रों उत्तराखंड में वर्तमान में यातायात काफी सुगम हो गया है। उत्तराखंड भारत के टॉप प्राकृतिक सुंदरता वाले राज्यों में से एक है। उत्तराखंड में परिवहन के अनेक साधन हैं। लेकिन इन सब में सबसे सुविधाजनक और सामान्य बजट में पूर्ण होने वाला यातायात का साधन उत्तराखंड परिवहन निगम की बस सेवा है। उत्तराखंड में टूरिस्ट डेस्टिनेशन अधिक होने के कारण और यहाँ के अधिकतर प्रवासी मैदानी क्षेत्रों में रहने के कारण यहाँ की बसों में भीड़ अच्छी रहती है। ऐसी स्थिति में हम आपको सुझाव देंगे कि यदि आप कम बजट और सुविधाजनक यात्रा के लिए उत्तराखंड रोडवेज से…
“उत्तराखंड में एक से बढ़कर एक वीर भड़ो ने समय -समय पर जन्म लेकर इस पवित्र देवभूमि को गौरवान्वित किया है। इन्ही महान वीर भड़ो में से वीर भड़ गढू सुम्याल की वीर गाथा का संकलन कर रहें हैं। यह लोकगाथा प्रेम ,त्याग ,वीरता ,साहस और षङयन्त्र से युक्त है। गढ़वाल में गढू सुम्याल के पवाड़े गाये जाते हैं। पवाड़े गढ़वाल मंडल में किसी वीर योद्धा अथवा देवता के जीवन से जुड़ी अलौकिक और अद्भुद पराक्रम से सम्बंधित गाथा गीतों को पवाड़े कहा जाता है।” वीर भड़ गढ़ू सुम्याल की वीर गाथा उत्तराखंड के वीर भड़ गढू सुम्याल का जन्म…