नेपाल में कुदरत का कहर: पड़ोसी मुल्क नेपाल में भारी बारिश और पहाड़ों से गिरते मलबे ने एक बार फिर जनजीवन को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया है। 26 अगस्त को आई भीषण तबाही के असर से देश अभी संभल भी नहीं सका था कि 24 सितंबर से शुरू हुए तेज बारिश के सिलसिले ने मध्य और पश्चिमी इलाकों में विकट स्थिति पैदा कर दी है। पहाड़ी ढलानों के दरकने और नदियों के उफान पर आने से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है।
कई जिलों में भारी तबाही, 3 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट
आपदा प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, अब तक 21 से ज्यादा नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से करीब 3,000 ग्रामीणों को रेस्क्यू कर राहत शिविरों में भेजा है।
- बागलूंग जिले में एक मकान पर मलबा गिरने से एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत 10 लोगों की मौत हो गई।
- म्यागदी में छह और मनांग में हिमलंग हिमाल बेस कैंप के समीप हिमस्खलन की चपेट में आने से दो पर्वतारोहियों के शव निकाले गए हैं।
- पर्वत जिले की एक पूरी बस्ती में लगभग 80 मकान बह जाने की सूचना है। पालपा, नवलपरासी और चितवन में भी भारी नुकसान दर्ज किया गया है।
नारायणी नदी ने तोड़ा छह दशक का रिकॉर्ड
नदियों के रौद्र रूप ने निचले इलाकों में दहशत पैदा कर दी है। चितवन के देवघाट में नारायणी नदी का जलस्तर 11.94 मीटर के पार चला गया, जो 1963 के बाद से दर्ज किया गया सबसे उच्चतम स्तर है। यह सामान्य खतरे के पैमाने (9 मीटर) से लगभग 3 मीटर ऊपर बह रही है। तटीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की हिदायत दी गई है।
बिजली उत्पादन पर ब्रेक, कई मेगावाट प्रोजेक्ट्स ठप
प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के ऊर्जा ढांचे को भी भारी झटका दिया है:
- कालीगंडकी (140 MW), सुपर मादी (44 MW), सेती रिवर (40 MW), अपर मादी (25 MW) और नारजंग मादी (20 MW) समेत प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन एहतियातन रोकना पड़ा है।
- कालीगंडकी ट्रांसमिशन लाइन के खंभे गिरने से करीब 200 मेगावाट बिजली का ट्रांसमिशन बाधित हुआ है।
- म्यागदी में हाल ही में राष्ट्रीय ग्रिड का हिस्सा बने 40 मेगावाट के राहुघाट प्रोजेक्ट को भी बाढ़ के तेज बहाव ने काफी क्षति पहुंचाई है।
दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन
सड़कों के टूटने और पुलों के बह जाने से कई जिलों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है। इसके बावजूद नेपाली सेना, पुलिस और स्थानीय बचाव दल लगातार राहत कार्यों में जुटे हैं। जाजरकोट, म्यागदी और बागलूंग की दुर्गम पहाड़ियों में फंसे लोगों को निकालने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
भारत के सीमावर्ती इलाकों पर सीधा असर
नेपाल की पहाड़ियों पर हो रही मूसलाधार बारिश का असर सीधे तौर पर भारत के सीमावर्ती राज्यों में देखने को मिल रहा है। गंडक और कोसी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से चढ़ने के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी व तराई क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग सीमावर्ती रिवर मॉनिटरिंग स्टेशनों के जरिए चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


