Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

झोड़ा उत्तराखंड का लोकनृत्य झोड़ा उत्तराखंड का एक लोकनृत्य गान है। यह उत्तराखंड के कुमाउनी क्षेत्र में गाया औऱ प्रदर्शित किया जाता है। लोकनृत्य गान इसलिए बोला,यह एक ऐसा लोक नृत्य है, जिसमे स्थानीय लोग सामुहिक रूप से हाथ पकड़ कर वृत्ताकार ,पदताल मिलाते हुए नाचते हैं। और साथ – साथ लोक गीत भी गाते हैं। https://youtu.be/g8hCs1wiuQU?si=vUY6QFdmXp7eTk1B बीच मे एक वाद्य यंत्र बजाने वाला होता है। जो पद बोलता है, और गोल घेरे में हाथ पकड़ कर ,एक विशेष चाल में नाचने वाले स्त्री पुरूष उन पदों को दोहराते हैं। और कहीं -कही स्त्री दल एक पद की शुरुआत करते…

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सन 2003 में निर्माता निर्देशक अनुज जोशी जी ने भी ,उत्तराखंड आंदोलन पर आधारित और मुख्यतः 2 अक्टूबर 1994 के मुजफ्फरनगर कांड पर आधारित उत्तराखंडी फ़िल्म तेरी सौं बनाई थी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन की पृष्ठभूमि पर बनी इस फ़िल्म में आंदोलन के समय ,उत्तराखंड के लोगों पर हुई बर्बरता का चित्रण बड़ी मार्मिकता से किया गया । इस फ़िल्म के निर्माता निर्देशक श्री अनुज जोशी स्वयं एक आंदोलनकारी रहे हुए हैं। इस फ़िल्म में मुजफ्फरनगर कांड को एक काल्पनिक प्रेम कहानी के साथ जोड़कर बनाया गया है। इसमे उत्तराखंड आंदोलन में  सबसे छोटे शहीद सत्येंद्र चौहान का चरित्र भी दिखाया…

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कुमाऊनी होली गीत – जैसा की हम सबको पता है उत्तराखंड की फेमस कुमाऊनी होली पुरे भारत में प्रसिद्ध है। लगभग दो माह तक चलने वाला यह रंग भरा त्यौहार है। इस लेख में कुछ कुमाऊनी होली गीत लिखे हैं। होली उत्सव के दौरान आप इनको गा कर अपना होली का आनंद दुगुना कर सकते हैं। कुमाऊनी होली का वीडियो देखें :  https://youtu.be/iN2Jb8y6swQ कुमाऊनी होली गीत शिव के मन माही बसे काशी उत्तराखंड में होली के शुरुआत, मंदिरों से होती है। मंदिरों मे भगवान शिव की प्रसिद्ध होली जरूर गाई जाती है। यह  प्रसिद्ध कुमाऊनी होली भगवान् शिव की स्तुति…

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फूलदेई के गीत – फूलदेई उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोक पर्व है। प्रकृति को समर्पित इस प्रसिद्ध त्योहार के दिन छोटे छोटे बच्चे अपने थालियों में या झोले में फूल रख कर ,सबकी देहरी पर “फूलदेई छम्मा देई ” फुलदेई के गीत गाते हैं। लोगो को शुभ आशीष देते है।यह त्यौहार चैत्र संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष शुरू होता है। प्रस्तुत लेख में फूलदेई के गीत और पारंपरिक कविताएं व फूलदेई की शुभकामनायें फोटो , का संकलन किया है। फूलदेई के गीत कुमाउनी भाषा में – उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में बच्चे फूल देई के…

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मित्रों कहा जाता है कि , पहाड़ों में होने वाले प्रमुख वृक्ष चीड़ के पेड़ को श्राप (फिटकार ) मिला होता है। यह श्राप कैसे मिलता है? आइये जानते हैं इस पहाड़ी लोककथा के माध्यम से ! चीड़ के पेड़ को श्राप पहाड़ी लोककथा – यह पहाड़ी लोककथा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ क्षेत्र से सम्बंधित है। पिथौरागढ़ में भादो के माह में सातू -आठु पर्व मनाया जाता है। यह पर्व गौरा – महेशर (महादेव ) के ससुराल आने की ख़ुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है। यह कहानी भी गौरा के मायके आने पर आधारित है। एक बार गौरा अपने मायके…

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हमारे उत्तराखंड में ढोल दमाऊ का एक विशेष ही महत्व है। जिसकी झलक हमें प्रायः शुभ कार्यों में देखने को मिलती है। इस महत्वपूर्ण आलेख में जो मैंने कुछ तथ्यों को अपने चिंतन मनन से सत्यता की कसौटी पर खरा पाकर एक नवीनता में समाहित करने की कोशिश की है। ढोल दमाऊ का उत्तराखंड के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन मे महत्व – इसके बारे में मैं आज आपको कुछ गूढ़ और रहस्यात्मक तथ्यों में से कुछ तथ्यों से रूबरू कराने की कोशिश करूंगा, क्योंकि एक बड़ी विडंबना है कि इसकी महत्ता से हमारी पीढ़ी के युवा और आने वाली जेनरेशन…

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उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के क्षेत्रों में कुमाउनी और गढवाली बोलते समय अक्सर पहाड़ी शब्द बल का प्रयोग करते हैं। पहाड़ी शब्द बल और ठैरा, उत्तराखंडी पहाड़ियों की प्रमुख पहचान है। बल और ठैरा शब्द, अनजान शहर में एक दूसरे पहाड़ी को पहचानने का अच्छा साधन है। इस शब्द का प्रयोग कुमाउनी गढ़वाली भाषा के साथ साथ, उत्तराखण्डी लोग हिंदी बोलते समय भी बल और ठैरा शब्द का प्रयोग करते हैं। ये दोनों शब्द एक परदेशी को परदेश में भी अपनी पहचान दिला देते हैं। जब परदेश में किसी की मधुर वाणी से अचानक बल और ठैरा का…

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मित्रों उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 नजदीक हैं। चुनाव आयोग की तिथि के अनुसार 14 फरवरी 2022 को उत्तराखंड में मतदान होना सुनिश्चित है। 28 जनवरी 2022 नामांकन की अंतिम तिथि थी। मैदान सज चुका है। प्रत्याशी मैदान में उतर गए हैं। राजनीति दलों ने अपना पूरा जोर लगा रखा है। उधर चुनाव आयोग अपनी पूरी तैयारी के साथ लगा हुआ है। सबकी तैयारी हो गई है। तो क्या मतदाताओं की भी तैयारी पूरी हो गई ? अब आप वोट जिसको भी दो, वो आपकी मर्जी और आपका अधिकार है। लेकिन वोट देने के लिए जो आवश्यक चीजें हैं वो आपको…

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मित्रों सबको अपने मतदान का प्रयोग करना जरूरी है। अपने मत का प्रयोग करने के लिए सबसे मुख्य आवश्यक चीज होती है, voter ID card जिसे भारत का चुनाव आयोग ( election commission of India ) जारी करता है। यदि आपका वोटर कार्ड किसी कारणवश खो गया या भूल गए तो आप ऑनलाइन वोटर आईडी कार्ड डाऊनलोड करके अपना काम चला सकते हैं। या id प्रूफ  के रूप में प्रयोग के कर सकते हैं। प्रस्तुत लेख में हम ऑनलाइन वोटर आईडी कार्ड करना और अपना वोटर आईडी नंबर ऑनलाइन निकालना सीखेंगे। यह लेख आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता…

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2022 के पद्म पुरस्कारों में ,उत्तराखंड की डॉ माधुरी बर्थवाल को भी पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया है। लोक गीतों और लोक संगीत के संरक्षण और प्रचार के लिए भारत सरकार ने डॉक्टर माधुरी बर्थवाल जी को  पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया है। डॉक्टर माधुरी आल इंडिया रेडिओ में पहली महिला संगीतकार के रूप में जानी जाती हैं। इनको वर्ष 2019 के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉक्टर माधुरी जी उत्तराखंड के लोकसंगीत के संरक्षण के लिए बरसों से काम कर रही हैं। प्रस्तुत लेख में जानते हैं डॉक्टर माधुरी बड़थ्वाल…

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