Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

कहानी का शीर्षक- दाज्यू  लेखक – शेखर जोशी  चैक से निकलकर बाईं ओर जो बड़े साइनबोर्ड वाला छोटा कैफे है वहीं जगदीश बाबू ने उसे पहली बार देखा था।  गोरा-चिट्टा रंग, नीला श़फ्फ़ाफ़ आँखें, सुनहरे बाल और चाल में एक अनोखी मस्ती-पर शिथिलता नहीं. कमल के पत्ते पर फिसलती हुई पानी की बूँद की-सी फुर्ती। आँखों की चंचलता देखकर उसकी उम्र का अनुमान केवल नौ-दस वर्ष ही लगाया जा सकता था और शायद यही उम्र उसकी रही होगी। अधजली सिगरेट का एक लंबा कश खींचते हुए जब जगदीश बाबू ने कैफे में प्रवेश किया तो वह एक मेज पर से…

Read More

पहेली शब्द संस्कृत के प्रहेलिका से बना है। प्रहेलिका का अर्थ है , किसी भी शब्द या वाक्य के बाह्य अर्थ में उसके मूल अर्थ का छिपा होना। मूल अर्थ का प्रकटीकरण या उसका जवाब ही प्रहेलिका या  पहेली है। प्राचीन समय में पहेलियाँ बुद्धि चातुर्य और हाजिर जवाबी के साथ मनोरंजन का का मुख्य साधन रहीं हैं। गढ़वाली और कुमाउनी साहित्य में अनगिनत पहेलियों का संकलन है।  उन्ही में से कुछ गढ़वाली और कुमाऊनी पहेलियाँ यहाँ संकलित कर रहें हैं। कुमाऊनी पहेलियाँ – लाल घोड़ पाणी पीबे आईगो  सफ़ेद घोड़ जाणो।  सिमारक हड़ , न सड़ न बढ़।  काव…

Read More

भगनौल गीत और बैर भगनोल गीत कुमाउनी लोक गीतों की एक विधा है। भगनोल गाने वाले गायक को भगनौली कहते हैं। भगनोल में गायक और उसके साथ उसके सुरों को विस्तार देने वाले (जिसे ह्योव भरना कहा जाता है) दो या तीन साथी होते हैं। और बैर-भगनोल दो पक्षो के बीच एक प्रकार का गेय वाकयुद्ध होता है। जिसमे दोनो पक्ष एक दूसरे को भगनोल गा कर सवाल जवाब करते हैं। गायक की कुशलता उसके ज्ञान,वाकचातुर्य और प्रत्युत्पन्नमतित्व पर निर्भर करती है। आईए जानते हैं प्रसिद्ध कुमाउनी कवि, गीतकार श्री राजेन्द्र ढैला जी के शब्दों में  भगनोल और बैर भगनौल…

Read More

26 जनवरी 2022 गणतंत्र दिवस की परेड में ,इस बार उत्तराखंड की झांकी में नजर आएगी उत्तराखंड के डोबरा चांठी पुल की झांकी। और इस झांकी में डोबरा चांठी पुल के साथ नजर आएगा ,प्रसिद्ध तीर्थ हेमकुंड साहिब ,टिहरी बांध और भगवान् बद्रीविशाल का महँ दरबार। कुमाऊं सांस्कृतिक लोककला दर्पण लोहाघाट के 16 कलाकारों का दल इस झांकी के साथ चलता हुवा नजर आएगा। उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद 12 बार उत्तराखंड राज्य की झांकी गणतंत्र दिवस में भाग ले चुकी है। जिसमे 2003 में फूलदेई की झांकी ,2005 मे नंदा राज जात की झांकी और 2006 में फूलों…

Read More

घर में दैनिक प्रयोग की वस्तुओं में कैलेंडर का बहुत ही अहम् किरदार होता है। कैलेंडर का प्रयोग दैनिक कार्यों को सूचीबद्ध करने से लेकर ,महत्वपूर्ण तिथियों को स्मरण रखने तथा उन तिथियों पर मह्त्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके साथ -साथ यदि कैलेंडर उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति के रंगो से रंगा हो तो ,घर की सुंदरता में चार चाँद लगा देता है। 2022 में कुछ संस्कृति प्रचारको ने ,उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति में रंगे कैलेंडर बनाएं हैं। इन कैलेंडरों को आप आसान कीमत में ऑनलाइन माँगा कर , अपने घर को पहाड़ी संस्कृति के…

Read More

“’लाटी’ शब्द एक स्त्रीलिंग द्योतक शब्द है। उत्तराखंड के कुमाउनी और गढ़वाली दोनों भाषाओँ में इस शब्द का प्रयोग किया जाता है। लाटी शब्द का मुख्य अर्थ है ,वह स्त्री या लड़की जो बोल नहीं सकती। पहाड़ी भाषा में  इस शब्द को सीधी -साधी ,भोली  लड़की या स्त्री के लिए भी प्रयोग किया जाता है। पहाड़ो में माता-पिता अपनी लाड़ली बेटी के लिए स्नेह जताने के लिए भी इस शब्द का प्रयोग करते हैं। प्रस्तुत कहानी लाटी गौरा पंत “शिवानी ” की एक घटना प्रधान कहानी है। आइये पढ़िए उपन्यास कार शिवानी जी की एक और स्त्रीप्रधान मार्मिक कहानी।” कहानी…

Read More

कहानी का शीर्षक – नथ  लेखिका – गौरा पंत “शिवानी ” पुट्टी ने उठकर अपनी छोटी-सी खिड़की के द्वार खोल दिए। धुएं से काली दीवारों पर सूरज की किरणों का जाल बिछ गया। छत से झूलते हए छींके में धरे ताज़े मक्खन की ख़ुशबू से कमरा भर गया और पुट्टी के हृदय में एक टीस-सी उठ गई-क्या करेगी उस ख़ुशबू का जब उस मक्खन को खानेवाला ही नहीं रहा! ऐसे ही ताज़े मक्खन की डली फाफर की काली रोटी पर धरकर खाते-खाते उसके पति ने उसके मुंह में अपना जूठा गस्सा दूंस दिया था-ठीक जाने के एक दिन पहले। उस दिन भी…

Read More

उत्तरायणी, घुघुतिया, मकरैनी आदि नामो से उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस उपलक्ष में एक विशेष पकवान जिसका नाम घुघुत होता है, वह बनाया जाता है। और अगले दिन छोटे छोटे बच्चे , काले कावा काले बोल कर कौओं को बुला कर ,उनको घुघुती खिलाते हैं। घुघुतिया त्यौहार क्यों मनाते हैं ? इसके पीछे एक प्रसिद्ध कहानी भी है। दोस्तों घुघुतिया त्यौहार के बारे में अधिक जानकारी और घुघुतिया की कहानी जानने के लिए और घुघुतिया की शुभकामनाएं 2024 के लिए  यहां क्लिक करें। प्रस्तुत लेख में हम यहाँ उत्तरायणी पर आधारित एक प्रसिद्ध…

Read More

मित्रो उत्तराखंड की वर्तमान सरकार ने चुनाव में जाते जाते, उत्तराखंड के युवाओं के लिए उत्तराखंड समूह ग भर्ती 2022 खोल दी हैं। इस भर्ती में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ( Uksssc ) द्वारा 3 अलग – अलग विज्ञप्तियों द्वारा भर्तियां निकाली गई हैं। जिनका अलग अलग विवरण इस प्रकार है – उत्तराखंड समूह ग भर्ती 2022 :- पद – राजकीय सहकारी पर्यवेक्षक 8 जनवरी 2022 के विज्ञापन के अनुसार , उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ( uksssc ) ने उत्तराखंड सहकारिता विभाग में 73पदों पर समूह ग भर्तियां निकाली हैं। जिसमे राजकीय सहकारी पर्यवेक्षक के 64 पद ,…

Read More

देहरादून बस अड्डे  (ISBT)  से लगभग 15 किलोमीटर दूर पंजाबीवाला  में 02 किलोमीटर की उचाई पर स्थित है ,देहरादून का प्रसिद्ध देवी मंदिर सन्तला देवी का मंदिर। संतला देवी का मंदिर देहरादून का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर को संतोला देवी या संतुला देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर देहरादून में घूमने ,देखने और समय बिताने तथा सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यों हेतु सबसे उपयुक्त है। संतोला देवी मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्रतिदिन सैकड़ो भक्त यहां माता के दर्शनों के लिए आते हैं। संतोलादेवी मंदिर में शनिवार का विशेष महत्व है। यह माना…

Read More