Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

कुमाऊं का पुण्यतीर्थ माना जाने वाला रामेश्वर मंदिर उत्तराखंड चम्पावत जिले में टनकपुर -चम्पावत -पिथौरागढ़ रोड पर लोहाघाट से उत्तरपूर्व में सरयू रामगंगा के संगम पर स्थित है। स्कन्द पुराण मानस खण्ड में रामेश्वर पौराणिक महत्व के संदर्भ में लिखा है कि इस स्थान पर अयोध्या के सूर्यवंशी शासक राम द्वारा शिवलिंग की स्थापना किये जाने के कारण इसका नाम रामेश्वर कहा गया है।’ साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि ‘भगवान् राम ने वैकुण्ठधाम प्रस्थान करने से पूर्व इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की थी। इसकी पौराणिक मान्यता के अनुसार , इसके पूजन से भक्तों को…

Read More

उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की राह तक रहे उत्तराखंड के बेरोजगार नवयुवाओं के लिए अच्छी खबर आई है। उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग ने समूह ग के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग में अमीन के 88 पदों हेतु विज्ञापन आवेदन आमंत्रित किये गए हैं। जो अभ्यार्थी उत्तराखंड में अमीन पद हेतू आवेदन करना चाहते हैं वे उत्तराखंड चयन आयोग की वेबसाइट https://sssc.uk.gov.in/ पर 18 जनवरी 2024 से 07 फ़रवरी 2024 तक आवेदन कर सकते हैं। आमीन पद हेतु चयन के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा वस्तुनिष्ठ प्रकार की ऑफलाइन अथवा ऑनलाइन माध्यम में प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कराई जाएगी। प्रतियोगी परीक्षा के…

Read More

आजकल उत्तराखंड में गुलदार की दहशत चारो ओर फैली हुई है। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक गुलदार, तेंदुवे के आतंक की ख़बरें चर्चा का विषय बनी हुई है। पहाड़ो में आये दिन तेंदुवा या गुलदार के हमले से किसी न किसी को अपनी जान गवानी पड़ रही है। अब तो गुलदार आतंक राजधानी तक पहुंच गया है। अभी हाल ही में  राजधानी देहरादून के राजपुर क्षेत्र के कैनाल रोड में एक किशोर पर गुलदार ने हमला कर दिया था। वो तो उसके दोस्त अलर्ट थे उन्होंने उसे समय रहते बचा लिया। लावारिस पशु दे रहें है उत्तराखंड में गुलदार को…

Read More

उत्तराखंड पशुपालन विभाग में निकली है समूह ग भर्ती। उत्तराखंड समूह ग की वर्ष 2024 की पहली भर्ती है। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ( UKSSSC ) ने समूह ‘ग’ के अन्तर्गत पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारी के 120 खाली पदों, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में सहायक प्रशिक्षण अधिकारी के 03 खाली पदों, रेशम विकास विभाग में अधिदर्शक/प्रदर्शक (रेशम) के 10 खाली पदों तथा रेशम विकास विभाग में निरीक्षक के 03 खाली पदों, अर्थात कुल 136 खाली पदों पर सीधी भर्ती द्वारा चयन हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र आमन्त्रित किए हैं। उपरोक्त समूह ग के पदों के लिए अभ्यर्थी…

Read More

गणतंत्र दिवस 2024 की परेड में कर्तव्य पथ पर उत्तराखंड पिथौरागढ़ की हिलजात्रा ( मुखौटा नृत्य ) की झलक देखने को मिलेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार भाव राग ताल अकादमी के निर्देशक प्रसिद्ध रंगकर्मी कैलाश कुमार के नेतृत्व में 9 लोगो का दल यह प्रस्तुति देगा। वे अपने दल के साथ अभ्यास के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। वैसे पारम्परिक हिलजात्रा पुरुषों द्वारा की जाती है , लेकिन गणतंत्र दिवस 2024 की परेड में होने वाली हिलजात्रा में महिलाये भाग ले रही हैं। इस साल गणतंत्र दिवस की थीम महिला सशक्तिकरण की है और इस वर्ष देश भर से अनेकों…

Read More

उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी देहरादून में पांच जनवरी से नौ जनवरी तक  महोत्सव मनाया जायेगा। खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती रेखा आर्य जी से प्राप्त जानकारी के अनुसार 05 जनवरी 2024 से 09 जनवरी 2024 तक राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उत्तराखंड देहरादून के परेड ग्राउंड में 05 जनवरी शुक्रवार को माननीय मुख्यम्नत्री पुष्कर सिंह धामी जी इस महोत्सव का उट्घाटन करेंगे। इस युवा को महोत्सव को यूथ इज जॉब क्रिएटर्स की थीम दी गई है – प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेल व् युवा कल्याण मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने जानकारी दी की युवा महोत्सव…

Read More

ये बहुत कम लोगों को पता है कि ,अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग में भवाली में स्थित कैंचीधाम के अलावा बाबा नीम करौली महाराज ने नैनीताल जिले में एक और मंदिर की स्थापना की थी। इस मंदिर का नाम है हनुमान गढ़ी । समुद्र ताल से 6401 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर हल्द्वानी -नैनीताल हाईवे पर नैनीताल से तीन किलोमीटर दूर स्थित है। नीम करौली बाबा ने की थी हनुमान गढ़ी की स्थापना – पवित्र कैंचीधाम के साथ -साथ बाबा नीमकरौली महाराज ने हनुमान गढ़ी की स्थापना की थी। बताते हैं कि यह मंदिर बनने से पहले यहां मिट्टी का…

Read More

क्या है घेंजा पर्व ? जैसा कि हम सबको ज्ञात है, कि उत्तराखंड के सभी तीज त्यौहार प्रकृति की सेवा व रक्षा, उत्तम स्वास्थ्य और जीव कल्याण को समर्पित होते हैं। इन्ही लोकपर्वों में एक लोक पर्व है घेंजा,जिसे टिहरी ,उत्तरकाशी क्षेत्र में पौष मासांत पर मनाया जाता है।मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाये जाने वाले लोकपर्व में , मोटे अनाज के आटे के घेंजा बनाये जाते हैं। इनकी खासियत यह होती है कि इन्हें बिना तेल के, भाप की सहायता विभिन्न स्वादों में बनाया जाता है। इन्हे स्थानीय भाषा में द्युड़ा भी कहते हैं। और कुमाऊं के घुघुतिया…

Read More

साल के जाते -जाते उत्तराखंड के अल्मोड़ा से एक झकझोर देने वाली खबर मिली। केवल रिटायरमेंट के पैसों के लिए कलयुगी बच्चों ने पिता को मौत के घाट उतार दिया। जिस बाप ने अपनी संतान के उज्जवल भविष्य के लिए अपना जीवन दाव पर लगाया,उनके लिए कष्ट सहा उसी संतान ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया। मृतक सुन्दर लाल तीन माह पहले आई टी बी टी बी से रिटायर हुए थे। और नौ वर्ष पूर्व उनकी पत्नी का देहांत पीलिया बिगड़ने से हो गया था। तब से वे तीनों बच्चों की देखभाल कर रहे थे। उन्होंने अपने बच्चों को…

Read More

छोपती गीत क्या है – छोपती गीत या छोपती नृत्य ( chhopti dance ) गढ़वाल का एक लोक नृत्य है। वर्तमान में यह लोक नृत्य केवल रवाई घाटी और जौनपुर तक ही सिमित रह गया है।इस नृत्य में पहले और तीसरे नर्तक के हाथ दूसरे नर्तक के कमर के पीछे जुड़े होते है।हाथों के जुड़ाव की गोल श्रृंखला नर्तक कंधे से कंधा मिलाकर जुड़े रहते हैं। इस स्थिति में सबके पैर दो कदम आगे और एक क़दम पीछे चलते हैं। इस नृत्य के साथ गाये जाने वाला गीत छोपती गीत कहा जाता है। ये गीत मुख्यतः प्रेम के गीत होते…

Read More