देहरादून: राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में विकास कार्यों और निर्माण की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नंदा की चौकी से टोंस नदी तक जाने वाले मार्ग का करीब 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से जीर्णोद्धार किया गया था, लेकिन निर्माण पूरा होने के महज एक महीने के भीतर ही सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है।
मुख्य बिंदु
- स्थान: नंदा की चौकी–टोंस नदी मार्ग, प्रेमनगर (देहरादून)
- परियोजना की लागत: लगभग 16 करोड़ रुपये
- हादसा: निर्माण के एक महीने भीतर ही सड़क का धंसना और विशालकाय गड्ढा बनना
- जनता का आक्रोश: स्थानीय लोग इसे भ्रष्टाचार का नतीजा और ‘पाताल लोक का रास्ता’ बता रहे हैं।
गुणवत्ता की खुली पोल, हादसों को निमंत्रण
सड़क धंसने से बीचों-बीच एक विशालकाय गड्ढा बन गया है, जिसने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। इस अचानक हुए भू-धंसाव के कारण मार्ग पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। सड़क के इस तरह धंसने से न सिर्फ यातायात बाधित हुआ है, बल्कि रात के अंधेरे या बारिश के दौरान इस गड्ढे के कारण किसी बड़े जानलेवा हादसे की आशंका भी काफी बढ़ गई है।
“यह सड़क है या पाताल लोक का रास्ता?”
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को मिली सड़क की यह दुर्दशा देखकर स्थानीय लोगों में भारी रोष है। लोग व्यवस्था पर तंज कसते हुए इस विशाल गड्ढे को ‘पाताल लोक का रास्ता’ कह रहे हैं। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि 16 करोड़ रुपये जैसी बड़ी धनराशि खर्च करने के बावजूद घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका नतीजा यह है कि सड़क एक महीने भी नहीं टिक सकी।
जांच और कार्रवाई की मांग
जनता अब व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- पूरे मामले की एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्था (एजेंसी) के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- निर्माण की अनदेखी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए कब तक और क्या ठोस कदम उठाता है, और क्या जनता के टैक्स के पैसों की इस बर्बादी पर कोई सख्त कार्रवाई होगी या नहीं।



