अल्मोड़ा जिले मे जिला मुख्यालय की तरफ रहने वालों को अल्मोड़िया और द्वाराहाट की तरफ रहने वालों को दोरयाव या दोरयाल कहते हैं। अब अल्मोड़ीयों को लगता है कि दोरयाव तेज होते और द्वाराहाट वालों को लगता कि अल्मोड़िये तेज होते है। इसी बात पर एक कुमाऊनी कहावत (Kumauni kahawat) भी है कि,” द्वारहाटक बल्द ले तेज हुनी ” अर्थात द्वाराहाट के बैल भी तेज होते हैं । कहते है एक बार स्याल्दे बिखोती के मेले मे एक अल्मोड़ा वाला अपने बैल के साथ मेला देखने पहुंचा उसका बैल सुन्दर, तेज हट्टा –कट्टा था। शायद वो अपने बैल से प्रतियोगिता…
Author: Bikram Singh Bhandari
हल्द्वानी की ऐतिहासिक नहर – अमूमन सभी नहरे जमीन में खोदी होती है। खेतों के किनारे या नदियों के किनारे खोद के गंतव्य तक पहुंचाई होती है। लेकिन आज हल्द्वानी शहर की एक ऐसी ऐतिहासिक नहर के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं जो कभी हवा में बहती थी। हल्द्वानी शहर को उत्तराखंड की व्यसायिक राजधानी और कुमाऊं का द्वार कहा जाता है। हल्द्वानी शहर का अपना एक समृद्ध इतिहास रहा है। हल्द्वानी को अंग्रेजो की दी गई विरासत हल्द्वानी की ऐतिहासिक नहर – अंग्रेजो ने भारत में वर्षों तक शाशन किया लेकिन उसके साथ -साथ विकास के लिहाज…
तारे का गू ( tare ka gu ) – अक्सर पहाड़ों मे हम देखते हैं, कि जमीन पर, झाड़ियों में, फसलों के बीच, या घास में एक मुलायम स्पंजी अंडे के आकार का थैला जैसी चीज मिलती है। जिसे छूने हमे से ऐसा प्रतीत होता है, कि यह प्लाटिक या उससे मिलते-जुलते तत्वों से बनी होगी । जब हम उत्सुक्तावश घर वालों से इस विचित्र चीज के बारे में पूछते तो, वे ये बताते कि, यह टूटा हुवा तारा है। या तारे का गू , पोटी या मल है। और इसका मिलना शुभ होता है। इसको घर में जमा करने…
सोशल मीडिया के माध्यम से एक अच्छी खबर सुनने को मिल रही है। उत्तराखंड , कुमाऊनी लोक गायिका कमला देवी को अंतर्राष्ट्रीय फ्रेंचाइजी संगीत स्टूडियो कोक स्टूडियो में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। कोक स्टूडियो ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कमला देवी जी के उनके कोक स्टूडियो सीजन 2 प्रतिभाग करने की पुष्टि की है। उनकी ऑफिसियल पोस्ट के अनुसार , ” कमला देवी उत्तराखंड राज्य की निवासी एक शास्त्रीय लोक गायिका है। जिनका अपनी आवाज पर बहुत अच्छा नियंत्रण है। जल्द ही उनकी मधुर आवाज का अनुभव कोक स्टूडियो सीजन -2 में मिलेगा। लोक से…
उत्तराखंड में पहली महिला मुख्य सचिव के रूप में श्रीमती राधा रतूड़ी जी ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वह उत्तराखंड अठारहवीं मुख्य सचिव नई हैं। श्रीमती राधा रतूड़ी उत्तराखंड के सबसे योग्य नौकरशाहों में से एक हैं। वे 1988 बैच की IS अधिकारी हैं। नौकरशाही के उच्च पद पर एक महिला अधिकारी को नियुक्त कर उत्तराखंड सरकार ने महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। उत्तराखंड की पहली महिला मुख्य सचिव राधा रतूड़ी का परिचय – राधा रतूड़ी मध्य प्रदेश के निवासी श्री बीके श्रीवास्तव जी की पुत्री हैं , और उत्तराखंड की बहू हैं। वे उत्तराखंड के…
उत्तराखंड के सुर सम्राट , प्रसिद्ध लोकगायक स्वर्गीय गोपाल गिरी गोस्वामी जिन्हे हम गोपाल बाबू गोस्वामी के नाम से जानते हैं। गोपाल बाबू गोस्वामी उत्तराखंड के कुमाउनी लोक गीतों के प्रसिद्ध गीतकार और गायक थे। उत्तराखंड के लोक गीतों को एक नया रूप नई उचाई देने वाले गोस्वामी जी ,के बिना उत्तराखंड के लोक संगीत ,खासकर कुमाउनी लोक संगीत अधूरा माना जाता है। आइये जानते हैं , अपने गीतों से प्राकृतिक सौंदर्य , लोक सौंदर्य , शृंगार रस , उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को सजाने वाले गोपाल बाबू गोस्वामी जी का संक्षिप्त जीवन परिचय। प्रारम्भिक जीवन – गोपाल बाबू गोस्वामी…
आज उत्तराखंड के कुमाऊं गढ़वाल के इतिहास की एक ऐसी राज नृत्यांगना का परिचय बताने जा रहे हैं ,जिसने अपने समय में अपनी कुटनीतिज्ञता और जासूसी से कई पहाड़ी राज्यों को तबाह किया था। छमना नामक नर्तकी का जिक्र पहाड़ के लगभग सभी राजवंशों में मिलता है । यहां यह कह पाना थोड़ा कठिन हो जाता है कि छमना पातर नाम की एक नर्तकी थी या सभी राजवंश अपनी राजनर्तकी को छमना नाम से संबोधित करते थे । कहा जाता है कि उत्तराखंड की महाप्रेम गाथा राजुला -मालूशाही की सूत्रधार भी एक नृत्यांगना ही थी। उस नृत्यांगना का नाम भी…
आजकल ब्रह्मकमल वाली गढ़वाली टोपी (Garhwali cap) और कुमाऊनी टोपी (Kumauni Cap ) काफी प्रचलन में चल रही हैं। यह परिवर्तन बीते एक दो सालों से हो रहा है। जब से गणतंत्र दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने इसे धारण किया था। वैसे तो इसे गाँधी टोपी कहते हैं लेकिन इसमें ब्रह्मकमल का लोगो लग जाने के बाद ये पारम्परिक गढ़वाली टोपी (Garhwali cap ) और कुमाऊनी टोपी बन गई। हालांकि कुमाऊँ -गढ़वाल में वृद्ध लोग गाँधी टोपी धारण करते हैं और युवा वर्ग इससे पहले पहाड़ी टोपी के नाम पर हिमाचल की पारम्परिक गोल पहाड़ी धारण करते…
प्रस्तुत लेख में हम उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में पूजित असुर बाबा (Asur devta of Pithoragarh Uttarakhand ) के बारे में प्रचलित लोककथाओं और उनकी पूजा पद्धति का संकलन करने जा रहे हैं। असुर देवता के बारे में जानने से पहले असुर कौन थे उनके बारे में संक्षिप्त परिचय जान लेते हैं – असुर कौन थे संक्षिप्त परिचय – विद्वानो के अनुसार पौराणिक काल में असुर शब्द का प्रयोग उन देवताओं के लिए किया जाता था जो मायावी शक्तियों में पारंगत थे। बाद में धीरे -धीरे ये शब्द नकारात्मक प्रवृति के लोगो या दूसरे को नकारात्मक रूप से इंगित करने…
उत्तराखंड उत्तरकाशी के हर्षिल घाटी की मनोरम वादियों में बसा बगोरी गांव बनने जा रहा है उत्तराखंड का पहला मॉडल पर्यटन गांव। उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने school of planning and architecture Delhi ( SPA ) को एक प्रस्ताव भेज दिया है। SPA इस गांव को पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में कार्य करेगा और इसे विशेष रूप से डिजाइन करेगा। उत्तराखंड सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान दे रही है। इसी क्रम में सरकार प्रदेश के 51 सीमावर्ती गावों को विकसित करने के लिए विशेष योजनाएं चला रही है। बगोरी गांव के बारे में -…