Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

एक कुमाऊनी लोक कथा में बताया जाता है कि प्राचीन काल में कुमाऊँ के एक राजा के पास धन बाहदुर नामक शक्तिशाली पहलवान था। उसकी ताकत के चर्चे दूर दूर तक थे। कहते हैं एक बार  दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने जबरदस्त कुश्ती का आयोजन किया। यह कुश्ती राष्ट्रीय स्तर पर होनी थी। इसके लिए हिंदुस्तान के सभी राज्यों और राजाओं को कुश्ती के लिए निमंत्रण भेजा गया। कहते हैं औरंगजेब की जबरदस्त कुश्ती आयोजन में कुश्ती लड़ने  निमंत्रण कुमाऊँ के राजा को भी मिला। पहले तो कुमाऊँ के राजा घबरा गए कि कैसे बादशाह के निमंत्रण का मान रखू…

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ओण दिवस – 1990 दशक के बाद उत्तराखंड के पहाड़ों में लगातार आग लगने की घटनाएं लगातार बड़ी हैं। प्रतिवर्ष गर्मियों के सीजन में आग की घटनाओं से पहाड़ो के जलस्रोतों, जैवविविधता और पारिस्थितिक तंत्र को अपूर्णीय हानी होती है। प्रतिवर्ष सैकड़ो हैक्टेयर जंगल जल कर खाक हो जाते हैं। जंगली वन्यजीवों को काफी नुकसान होता है। पूरा पारिस्थितिक तंत्र ही खराब हो जाता है। नदियां पानी की कमी से साल दर साल सूख रही हैं। कभी -कभी पहाड़ों के जंगलों की आग मानवीय बस्तियों की तरफ आ जाती हैं ,जिससे कई बार मानव जीवन भी खतरे में पद जाता…

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लोकसभा चुनाओं का बिगुल बज चुका है। तिथियां तय हो चुकी हैं। सभी उम्मीदार लोकसभा की उम्मीदारी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहें हैं। उत्तराखंड की सभी लोकसभा सीटों से चिर-परिचित उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं वही उत्तराखंड की टिहरी लोकसभा से बॉबी पंवार (Boby panwar ) नामक युवा ने निर्दलयी चुनावी ताल ठोक कर सब को चौका दिया है। चौंकाया ही नहीं बल्कि पर्चा दाखिल करने के दिन अथाह भीड़ के साथ शक्ति प्रदर्शन करके विरोधियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। बॉबी पंवार  का प्रारम्भिक जीवन – सामान्य कृषक परिवार से संबंध रखने वाले ,बॉबी पंवार (…

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खोल दे माता खोल भवानी एक सुन्दर कुमाऊनी झोड़ा गीत है। जिसमे माता और भक्त के बीच का प्यारा भरा संवाद झोड़ा रूप में वर्णित किया गया है। जिसमे एक तरफ भक्त पहाड़वाली माँ से किवाड़ खोलने को बोलता है। ” खोली दै माता खोल भवानी धारमा  केवाड़ा ” तो माँ भी उसके सवाल के प्रतिउत्तर में सवाल करती है , ” मेरे लिए क्या खास भेंट लाया है जो तेरे लिए किवाड़ खोलू। यथा ” के लै रैछे भेंट पखोवा के खोलूं केवाड़ा ” तब भक्त माँ से स्नेह से विनती करते हुए कहता है ,” तेरे दरवार के…

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ओड़ा भेटना – ओड़ा भेटना की प्रथा उत्तराखंड की कुमाऊँ मंडल के द्वाराहाट के स्याल्दे बिखौती मेले के अवसर पर निभाई जाने वाली परम्परा है। ‘ओड़’ का अर्थ है विभाजक चिह्न । द्वाराहाट बाजार में सड़क के किनारे एक पाषाणी संरचना है, जिसे ओड़ा माना जाता है। मेले के दिन इन धड़ों के द्वारा इस पाषाण खण्ड पर लाठियों से मारने की परम्परा है और इसका अपना इतिहास भी है । कहा जाता है कि पिछले समयों में एक बार यहां के शीतलादेवी के मंदिर में पहले दर्शनों को लेकर दो धड़ों के बीच मतभेद हो जाने से उनके बीच…

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उत्तराखंड की संस्कृति विश्व में एक अलग पहचान है। उसकी इस पहचान को शीर्ष पर कायम रखने के लिए उत्तराखंड के तीज त्यौहार और समृद्ध परम्पराओं का विशेष योगदान है। इन्ही परम्पराओं और तीज त्योहारों में से एक है उत्तराखंड की कुमाऊनी होली। कुमाऊनी होली उत्तराखंड का दो माह तक लगातार चलने वाला उत्सव है। कुमाऊनी होली का इतिहास देखिए इस वीडियो में: https://youtu.be/iN2Jb8y6swQ जिसमे पहले बैठकी होली चलती है फिर रंग एकादशी से चलती है कुमाऊनी खड़ी होली। कुमाऊनी होली पर आधारित बहुत सारे लेख हमारे पोर्टल में पहले से संकलित किये गए हैं ,जिनका लिंक नीचे दे रहें…

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उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल ब्लॉक में भगवान् शिव का एक देवालय है। इस मंदिर को छोटा कैलाश कहते हैं। वैसे तो पूरा उत्तराखंड ,पूरा हिमालयी क्षेत्र भगवान भोलेनाथ का घर है। लेकिन पहाड़ों में कुछ स्थान ऐसे हैं जिनका भगवान शिव के साथ खास जुड़ाव है। उनमे से एक खास स्थान भीमताल का छोटा कैलाश धाम है। खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है छोटा कैलाश भीमताल पहुंचने के लिए – छोटा कैलाश के नाम से प्रसिद्ध यह तीर्थ नैनीताल जिले में बहुत ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ पहुंचने के लिए हल्द्वानी से अमृतपुर होते हुए पिनरो गांव पहुंचना होता…

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प्राचीन काल से ही सनातन समाज में विवाह संस्कार जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। सनातन धर्म में अनेक जीवन पद्धतियां ,समाज हैं जिनके विवाह संस्कार मूलतः सनातनी विधि -विधानों पर होने के बावजूद थोड़ा बहुत स्थानीय संस्कृति और परम्पराओं का अंतर आ जाता है। स्थानीय मान्यताओं के आधार पर कुछ परम्पराएं बदल जाती हैं। प्रस्तुत आलेख में कुछ कुमाऊनी विवाह परम्पराओं के बारे में चर्चा करेंगे। वैसे तो कुमाऊँ मंडल में तीन प्रकार  की  विवाह परम्पराएं चलन में रही हैं – १- आँचल विवाह २ -सरोल विवाह ३ -मंदिर विवाह। कुमाऊं में आजकल मुख्यतः आंचल विवाह चलता…

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उत्तराखंड के कुमाऊं में लोक देवता सैम देवता को मंगलकारी कल्याणकारी देव शक्ति के रूप में पूजा जाता है। सैमज्यू अत्यंत सरल और न्यायकारी लोकदेवता हैं। वे अपने भक्तों का कल्याण करते हैं और दुष्टों को दंड देते हैं। सैम का अर्थ होता है स्वयंभू। इन्हे शिवांश या शिव का अंशावतार भी माना जाता है। अल्मोड़ा जागेश्वर के पास झाकर सैम ( jhakar sem mandir ) में इनका परम धाम है। वहां ये स्वयंभू लिंग रूप में अवतरित हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा क्षेत्र के लगभग प्रत्येक गांव में इनका मंदिर होता है। इन्हे देवताओं का मामू या देवो के गुरु…

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट नगर को मंदिरों का नगर उत्तर की द्वारिका भी कहा जाता है। इसी मंदिरो के नगर में काशी विश्वनाथ के महत्त्व के बराबर महत्त्व रखने वाला महादेव का मंदिर है , जिसे विभाण्डेश्वर महादेव (vibhandeshwar mahadev mandir )कहा जाता है। विभाण्डेश्वर भगवान शिव का यह मंदिर उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट नगर से 8 किमी. दक्षिण में नगारधण (नागार्जुन) पर्वत के तलहटी में स्थित है। यह मंदिर नागार्जुन पर्वत से प्रवाहित होने वाली रमनी, सुरभि एवं नन्दिनी नामक सरिताओं के संगम पर स्थित है। विभाण्डेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास  -…

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