हल्द्वानी: राज्य कर विभाग (GST) हल्द्वानी में बतौर सहायक आयुक्त सेवाएं दे रहे उज्जवल डालाकोटी ने अपनी मेधा और कड़ी मेहनत का लोहा मनवाते हुए राज्य सिविल, प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2024 में शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने पूरे राज्य में 8वीं रैंक प्राप्त की है, जिसके चलते उनका चयन अब डिप्टी कलेक्टर (SDM) के सर्वोच्च पद पर हुआ है।
ट्रेनिंग के दौरान की मुख्य परीक्षा की तैयारी
उज्जवल डालाकोटी के लिए सफलता का यह सफर लगातार जारी है। वर्ष 2024 में ही घोषित हुई 2021 राज्य सिविल, प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा के परिणामों के आधार पर उनका चयन राज्य कर विभाग में हुआ था। इसके बाद उन्होंने सहायक आयुक्त के पद पर ज्वाइन किया। एटीआई (ATI) नैनीताल में अपने विभागीय प्रशिक्षण के दौरान ही उन्होंने समय निकालकर पीसीएस-2024 की मुख्य परीक्षा की तैयारी की और यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की।
इससे पहले भी वे कई परीक्षाओं में अपना परचम लहरा चुके हैं:
- 2021: रेंजर परीक्षा में पूरे राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
- 2021: लोअर पीसीएस भर्ती में मार्केटिंग इंस्पेक्टर के पद पर भी चयनित हुए।
अल्मोड़ा से हल्द्वानी तक का सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि
मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के डालाकोट के रहने वाले उज्जवल वर्तमान में हल्द्वानी में मल्ली बमौरी स्थित वृंदावन विहार में रहते हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत रही है। उन्होंने साल 2016 में प्रतिष्ठित जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से बीटेक (B.Tech) किया था।
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उनका परिवार भी सरकारी सेवाओं से जुड़ा रहा है। उनकी माता गीता डालाकोटी वर्तमान में वन विभाग में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं, जबकि उनके पिता स्व. उमेश डालाकोटी भी वन विभाग में ही कार्यरत थे। उज्जवल की पत्नी प्रणिता पांडे बैंक ऑफ बड़ौदा की कालाढूंगी शाखा में काम करती हैं।
पुरानी कमियों से सीखा, पहाड़ के लिए है खास विजन
अपनी इस शानदार सफलता पर बात करते हुए उज्जवल ने बताया कि उन्हें पिछली बार की परीक्षा और साक्षात्कार के अनुभव का काफी फायदा मिला। उन्होंने अपनी पुरानी कमियों का बारीकी से विश्लेषण किया और तैयारी के दौरान समय प्रबंधन (Time Management) पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया।
भविष्य की अपनी प्राथमिकताओं को लेकर उज्जवल बिल्कुल स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उनका लक्ष्य तकनीक और डिजिटलीकरण का बेहतर इस्तेमाल करना होगा। उनका विशेष फोकस पर्वतीय क्षेत्रों में सुलभ और सुगम सेवाएं उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहेगा, ताकि पहाड़ के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले आम लोगों तक प्रशासन की पहुंच और सेवाएं ज्यादा बेहतर तरीके से पहुंचाई जा सकें।
