बचपन में हमारी अम्मा (दादी जी) जाड़ों में हल्दी ,सुहागा,आदि के मिश्रण से घर का पिठ्या रोली तिलक बनाती थी। फिर घर के शुभ कार्यों में वहीं तिलक प्रयोग में लाया जाता था। ब्राह्मण ज्यू आते थे, पाठ मंत्रोच्चार के साथ सभी को तिलक करते थे। और घर कि महिलाओं को नाख से माथे तक एक लंबा पिठ्या रोली तिलक लगाते थे। पहले हमारी समझ मे नही आता कि इनको, इतना लंबा तिलक क्यों ?बाद में जब रोजी रोटी के लिए परदेश गए, तब देखा,वहां की महिलाएं तो छोटा सा तिलक लगा रही। तब मेरी समझ में आया कि कुमाउनी…
Author: Bikram Singh Bhandari
सभी के जीवन में जन्मदिन ,शादी और सालगिरह का एक अपना महत्व होता है। और जब हम उनको इस खास मौके पर शुभकामनाएं देते हैं तो ,उनको खुशी तो मिलती है । इसके साथ साथ उनके साथ रिश्ता और मजबूत हो जाता है। और यदि हम अपनों को हम अपनी भाषा में संदेश भेजते हैं,तो हमारा आपस का रिश्ता और मजबूत हो जाता है। यानी उसमे और अपनापन आ जाता है।इसी क्रम में हमारी टीम देवभूमि दर्शन ने आपके लिए कुछ पहाड़ी भाषा में संदेश बनाने की कोशिश की है। अगर अच्छे लगे तो शेयर जरुर करें। जन्मदिन की शुभकामनाएं…
उत्तराखंड में लोग कई प्रकार के स्वरोजगार कर रहे हैं। आज हम आप लोगो को एक आसान से स्वरोजगार के बारे बताने वाले हैं,जिसके लिए आपको ना ज्यादा पैसा चाहिए,और ना ज्यादा जगह। अगर गाव मे आपके आस पास खजूर की झाड़ियां है, तो आप बहुत आसानी से खजूर का झाड़ू बना कर बेच सकते हो। उत्तराखंड में खजूर के झाड़ू बना के पैसा कमाया जा सकता है। और यह कार्य शुरू किया है, बेतालघाट निवासी श्री गोधन बिष्ट जी ने। गोधन बिष्ट यूपीएससी की तैयारी करते है। लॉकडाउन के समय उन्होंने अपने आस पास होने वाले खजूर के पत्तों…
चिरातीत काल में देव भूमि उत्तराखंड में अनेक महाविभूतियों ने जन्म लिया। और अन्य राज्यों की तरह यहां भी अमर प्रेम कथाएं बनी। इन्हीं अमर प्रेम कथाओं मे से एक है, उत्तरकाशी की रवाई घाटी की गज्जू मलारी की प्रेम कथा। उत्तराखंड की प्रमुख प्रेम कथाओं में राजुला मलूशाही, रामी बौराणी की कथाएं प्रचलित हैं। राजुला मालुशाई की कथा पर तो फिल्म भी बन गई है। उत्तराखंड के राजा हरु हीत ,और मालू कि कथा भी बहुत प्रसिद्ध है।आज हम आपको उत्तराखंड की एक और प्रेम कथा गज्जू मलारी की कहानी सुनाते हैं। यह कथा लोक दंतकथाओं पर आधारित है।यह…
उत्तराखंड की कामधेनु ,पहाड़ की बद्री गाय। जी हां जिस गाय को कम फायदे की बता कर लोगो ने अपनी गोशाला खाली कर दी । और पलायन करके परदेश चले गए। उसी गाय की उपयोगिता आज सरकार के साथ साथ बाकी लोग भी मान रहे हैं। पहाड़ की बद्री गाय या पहाड़ी गाय – पहाड़ की बद्री गाय केवल पहाड़ी जिलों में पाई जाती है।इसे “पहाड़ी गाय”के नाम से भी जाना जाता है।ये छोटे कद की गाय होती है।छोटे कद की होने के कारण ये पहाड़ो में आसानी से विचरण कर सकती है। इनका रंग भूरा,लाल,सफेद,कला होता है। इस गाय…
कुमाऊनी रायता जी हा नाम से ही अपनी पहचान बता रहा है। भारतीय भोजन शैली में रायते का विशेष स्थान है। शादी,नामकरण,पूजा या तेरहवीं मे सार्वजनिक भोज को अलग अलंकरण देता है।सामान्यतः रायता बूंदी,और मट्ठे, नमक मिर्च मिला कर बनाया जाता है। थोड़ा अलग तरीके से बनाया जाता है। इसमें शुद्ध देसी राई की सनसनाहट होती है । छाछ के माखन कि खटास,और पहाड़ी पकी हुई ककड़ी का स्वाद। अच्छे अच्छे लोगों के मुंह से पानी निकाल देता है ये पहाड़ी खीरे का रायता। कुमाऊनी लोगो को रायता बहुत पसंद होता है। कुमाऊं मण्डल के मेलो में,तथा बाजारों में खीरे का रायता…
कंडोलिया पार्क पौड़ी गढ़वाल की नई पहचान। जी हा गुरुवार 28 जनवरी को मुख्मंत्री जी के कर कमलों द्वारा, यह थीम पार्क पौड़ी की जनता को समर्पित कर दिया गया। कंडोलिया पार्क के बारे में – यह उत्तराखण्ड राज्य के पौड़ी गढ़वाल में स्थित है। पौड़ी गढ़वाल के कमद नामक स्थान पर देवदार के घने पेड़ों के बीच बसा है।यह पार्क भारत का सबसे ऊंचा पार्क है। यह भारत का पहला थीम पार्क है। ये 1750 मीटर के हाई अल्टिट्यूड पर बना है। पौड़ी गढ़वाल के जिलाधिकारी 2019 मे कंडोलिया पार्क को नया रूप देने की योजना बनाई ,इस थीम…
“सोच लोकल,अप्रोच ग्लोबल” के विजन पर “उत्तर के पुत्तर” RJ kaavya उर्फ कवीन्द्र सिंह मेहता लेकर आएं है,उत्तराखंड का पहला डिजिटल रेडिओ ओहो रेडिओ आइये जानते हैं Rj kaavya उर्फ कवींद्र सिंह मेहता जी का जीवन परिचय। वर्तमान में rj kaavya नाम से प्रसिद्ध कवीन्द्र सिंह मेहता उत्तराखंड के नवयुवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन कर उभर रहे हैं। काव्य ने अपना डिजिटल रेडिओ ओहो रेडिओ शुरू करके,उत्तराखंड के नवयुवाओं के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, कि अगर मन मे लगन हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। प्रारंभिक जीवन -: 12 जुलाई 1988 को जन्मे ,कवीन्द्र सिंह…
भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखंड को देवभूमि ( Devbhoomi Uttarakhand ) के नाम से जाना जाता है। इसको देवभूमि कहने के कई तर्क और कारण हैं। यह राज्य हिमालय की गोद मे बसा एक दम स्वर्ग सा दिखता है। हिमाच्छादित ऊँची ऊँची पहाड़ियो से घिरा यह राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। आखिर क्यों कहते हैं उत्तराखंड को देवभूमि – भारत की लगभग सभी पवित्र नदियों का उद्गम हिमालय के इस पवित्र राज्य से है। उत्तराखंड को देवभूमि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां अनेक देवी देवता निवास करते हैं। माना यह जाता है की यहाँ तैतीस करोड़…