Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

बुधवार 16 नवंबर 2022 को उत्तराखंड सरकार ने कई अहम प्रस्ताव पास किये, जिनमे प्रमुख है, नैनीताल हाईकोर्ट शिफ्ट होने का प्रस्ताव पर मुहर। प्राप्त सुचना के आधार पर जल्द नैनीताल हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्ट होगा। इसके अलावा इन प्रमुख प्रस्तावों पर धामी कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई। उत्तराखंड कैबिनेट ने धर्मांतरण कानून को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने चंपावत में नया RTO ऑफिस खोलने पर मुहर लगाई है। उत्तराखंड दुकान एवं स्थापन 2022 प्रख्यापन और अग्निशमन नियमावाली को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। उत्तराखंड सरकार कैबिनेट बैठक में कुल 29 प्रस्ताव लाए गए। उत्तराखंड में धर्मांतरण कानून को…

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उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार एक ऐसा गीत रिलीज हुवा है जिसे, उत्तराखंड के लगभग सभी प्रसिद्ध गायकों ने आवाज दी है। चांदनी इंटरप्राइजेज के यूट्यूब चैनल से बेडु पाको गीत का नया वर्ज़न उत्तराखंड स्थापना दिवस के शुभावसर पर देहरादून से रिलीज हुवा है। इस गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, इतिहास में पहली बार कुमाऊं, गढ़वाल, और जौनसार के सभी  दिग्गज लोकगायकों एक साथ एक गीत में अपनी आवाज दी है। उत्तराखंड के इन मोतियों को एक माला में पिरोने का काम किया है ,चांदनी इंटरप्राइजेज के नवीन टोलिया जी ने। उत्तराखंड के अघोषित राज्य…

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उत्तराखंड के नाम पर आधारित पौराणिक कहानी-  हिमालय की गोद में बसा प्राकृतिक प्रदेश उत्तराखंड का गठन 09 नवंबर 2000 को उत्तराँचल नाम से हुवा किन्तु दिसम्बर 2006 को इसका पुनः नाम उत्तराखंड कर दिया गया। पौराणिक ग्रंथो में केदारखंड ,मानसखंड और हिमवंत के नाम से प्रसिद्ध इस भू भाग को उत्तराखंड का नाम महाभारत काल में मिला। उत्तराखंड के नाम के पीछे ये महाभारतकालीन घटना को बताया जाता है। तदनुसार  महाभारत काल में उत्तराखंड के भू भाग में ,राजा विराट राज्य करते थे ,उनकी राजधानी कत्यूरकालीन बैराठ (गेवाड़) थी। महाभारत की कथानुसार हम सबको विदित है कि ,पांच पांडवो…

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उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार 2022 की घोषणा कर दी है। सरकार ने पा अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन योगदान देने वाले पांच विभूतियों को पुरस्कार के लिए चुना है। इनमे से तीन विभूतियों को मरणोपरांत पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इस सम्मान के सम्बन्ध में शाशन ने आदेश जारी कर दिए हैं। इस शाशनादेश के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल, भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी जी को यह पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा स्व. जनरल बिपिन रावत, कवि, लेखक और गीतकार रहे स्व.गिरीश चंद्र तिवारी, साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में…

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गोलू देवता उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लोक देवता हैं। इन्हे उत्तराखंड में न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। प्रस्तुत लेख में हम गोलू देवता का भजन लिरिक्स वीडियो के साथ संकलित कर रहें हैं। इस भजन की लेखिका ,उत्तराखंड अल्मोड़ा निवासी श्रीमती चम्पा पांडे जी हैं। उन्ही के यूट्यूब चैनल पर इस भजन को वीडियो के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शीर्षक : जय गोलू देवता ओ म्यार दुधा धारी बाला गोरिया तुमरी जै जैकार तुमरी जै जैकार देवा छु महिमा अपार -2 कत्यूर वंश राजा झालुराई का  च्यला आठु राणी कलिंगाक गर्भ बटी पैदा-…

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पहाड़ में अक्टूबर नवंबर में पक कर अंदर से एकदम काले रंग के स्वादिष्ठ मेहल या मेलू सबने देखे है ,और इनका स्वाद भी लिया है। नाशपाती परिवार के इस फल को जंगली हिमालयी  नाशपाती कहते है। मेहल या मेलू को पाइरस पशिया भी कहते हैं। Rosaceae परिवार का यह पेड़ छोटे से मध्यम ऊंचाई का पर्णपाती पेड़ होता है। मेहल के बारीक़ दांतेदार अंडे के आकर के पत्ते और लाल किनारी वाले आकर्षक फूल लगते हैं। इसमें वर्ष में एक बार फल लगते हैं। इस पौधे का मूलस्थान दक्षिण एशिया माना जाता है। https://youtube.com/shorts/KVfBX9ilGBY?si=nVQTokGPTjtwKs0m पाइरस पशिया सम्पूर्ण हिमालयी क्षेत्र…

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दीपावली के तीसरे पर्व भाई दूज के शुभावसर पर केदरनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जायेंगे। केदारनाथ के कपाट भाई दूज की सुबह 8 बजे बंद कर दिए जायेंगे। भाईदूज दीपावली पर्व शृंखला का आखिरी त्यौहार होता है । तथा दीपावली के उपरांत ठंड भी बढ़ जाती है।  और  हिमालय क्षेत्र में  निवास करना  मुश्किल हो जाता  है। इसलिए, भाई दूज पर केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप देते हुए भस्म  से ढक देंगे । इस अवसर पर बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति का श्रृंगार करके  चल विग्रह…

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कमलेश्वर महादेव मंदिर नामक भगवान शिव का अतिप्रसिद्ध पौराणिक मंदिर, गढ़वाल की प्राचीन राजधानी श्रीनगर में स्थित है। आबादी से लगभग एक किलोमीटर दूर पक्षिम में रोड और अलकनंदा नदी के बाएं तट पर स्थित है। केदारखंड के अनुसार यह मंदिर हिमालय के पांच प्रमुख महेश्वर पीठों में से एक पीठ है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था। 1960 ई में इस मंदिर का पूर्निर्माण बिड़ला परिवार ने करवाया था। कमलेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड में भगवान् शिव के अलावा ,गणेश और आदि गुरु शंकराचार्य जी की मूर्तियां स्थापित हैं। कमलेश्वर मंदिर का…

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हमारे उत्तराखंड का प्राकृतिक सौंदर्य की बानगी तो सर्वविदित तो है ही है, तभी तो प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड जैसे विदेशी लोग मंसूरी जैसी जगहों पर अपना बसेरा खुद की ही जन्मभूमि को छोड़कर बनाते हैं। इसी तरह हमारे लिए एक गौरव का विषय है कि, देशी-विदेशी पर्यटक यहां आकर के हमारी संस्कृति के कायल हो जाते हैं और हमारे धर्म को स्वीकार कर लेते हैं और हिन्दुत्व को अंगीकार कर लेते हैं । जैसे हमारे जागर सम्राट श्री प्रीतम भरतवाण की सिनसिनाइटी अमेरिका में जहां वे विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर काम करते हैं। और विदेशी अमेरिकन फ्यूलीदास ने…

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आजकल यूट्यूब के जमाने में एक से बढ़कर एक कुमाउनी, गढ़वाली गीत रिलीज हो रहे हैं। इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण, गीत संगीत मनोरंजन आसान हो गया है। यूट्यूब पर पहाड़ से जुड़े गीत और अन्य प्रकार की मनोरंजक सामग्री की एक भीड़ सी हो गई है। इस भीड़ में कुछ लोग हैं ,जो पहाड़ के असली लोकगीतों और पहाड़ की संस्कृति को उसके वास्तविक रूप में दिखा रहे हैं। उनमे से एक है टीम घुगुती जागर ! बहुत कम समय में टीम घुगुती जागर ने अपने पहाड़ की संस्कृति से जुड़े लोकगीतों और अपने मृदु व्यवहार से लोगों…

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