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अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद क्या है उत्तराखंड के समाज की मनस्थिति

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने  उत्तराखंड को हिलाकर रख दिया है। जैसा की उत्तराखंड के लगभग सभी समर्पित न्यूज़ पोर्टलों और सोशल मीडिया पर संचालित होने वाले पेजों के माध्यम से आपको जानकारी विस्तार से मिल गई होगी। जैसा की आप सबको पता है , यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में वनधारा नामक रिसोर्ट की अंकिता भंडारी नाम  रेसेप्सनिस्ट बीते 5 दिन से लापता थी। सोशल मीडिया और जन दबाव में आनन् फानन में कल राजस्व पोलिस ने राज्य पोलिस को केस ट्रांसफर किया ,और बीते 24 घंटे में पोलिस ने अंकिता की मृत्यु का खुलासा करके मुख्य आरोपियों को पकड़ लिया। आरोपियों की निशानदेही पर चीला डेम के आस पास लाश की तलाश की जा रही है। इस लेख के लिखे जाने तक लाश नहीं मिल पायी थी और लापरवाही बरतने के जुर्म में ,पटवारी विवेक कुमार को निलंबित कर दिया गया है।

अब आते हैं इस केस के बाद उत्तराखंड के समाज की हालत क्या है ? क्या मनस्थिति है उत्तराखंड निवासियों की ? एक तरफ जहा सोशल मीडिया पर #justice for ankita bhandari चल रहा। लोग अलग अलग माध्यमों से और अलग तरह से अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। उधर लक्ष्मणझूला थाने की गाड़ी बीच में रोक कर आरोपियों की पिटाई कर दी। लेकिन इससे भी अलग आज हमे सामान्य जनता के बीच एक अलग और डरवाना सत्य महसूस हुवा।

इस घटना से जुड़ा हुवा एक वाकया आज हमारे टीम मेंबर के साथ हुवा,उनकी जानकारी के आधार पर इस लेख का संकलन किया है। वाकया इस प्रकार है कि ,आज हमारे टीम मेंबर देहरादून में एक बस में यात्रा कर रहे थे। थोड़े समय में उनके बगल में बैठी एक आंटी जी को गढ़वाल से उनकी किसी परिचित भतीजी या कन्या का फोन आया। फोन पर वो कन्या शायद गांव से उनके पास देहरादून आने का आग्रह कर रही थी।  इधर से आंटी जी ने बड़े प्यार जवाब दिया , बाबू  गांव में ही रहो। वही सिलाई कढ़ाई सीखो। यहाँ देहरादून हरिद्वार में माहौल बहुत खराब चल रहा है। नौकरी जिंदगी से बड़ी है क्या ? इधर ऋषिकेश में पौड़ी की नोनी (लड़की ) अंकिता 5 दिन से गायब है बल। पता नहीं क्या हुवा होगा उसके साथ ?!!

अंकिता भंडारी
अंकिता भंडारी

आंटी जी के इस जवाब  ने मन मष्तिष्क को अंदर तक झकझोर दिया। एक तरफ सरकार बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ का नारा देती है। दूसरी तरफ माता -पिता  अपनी  बेटी की सुरक्षा की वजह मजबूरन उसके पैरों में बेड़ियाँ डाल रहें हैं। उसके खुलकर जीने पर पाबंदी लगा रहें हैं। यहाँ सभ्य समाज को इन आपराधिक तत्वों से डरना छोड़ कर एकजुटता से इनका सामना करना चाहिए। समाज में डर का माहौल पुलकित जैसे आपराधिक प्रवृति के लोगों के अंदर होना चाहिए ,न कि निर्दोष माँ बाप और उनकी बच्चियों के अंदर।

सरकार को भी सुनिश्चित करना होगा कि सभ्य समाज के लोगों के अंदर ऐसा डर ना हो जैसा बस में इस आंटी जी के अंदर था।

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