Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

हरेला पर्व उत्तराखंड प्राचीनकाल से अपनी परम्पराओं द्वारा प्रकृति प्रेम और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी और प्रकृति की रक्षा की सद्भावना को दर्शाता आया है। इसीलिये उत्तराखंड को देवभूमी और प्रकृति प्रदेश भी कहते हैं। प्रकृति को समर्पित उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला प्रत्येक वर्ष कर्क संक्रांति श्रावण मास के पहले दिन मनाया जाता है। उत्तराखंड का यह पर्व प्रकृति प्रेम के साथ कृषि विज्ञान को भी समर्पित है। इस त्यौहार में मिश्रित अनाज को उगाया जाता है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाने के बाद दिन बढ़ने लगते हैं। वैसे ही कर्क संक्रांति से सूर्य भगवान दक्षिणायन…

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कानाताल भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक छोटा और सुन्दर हिल स्टेशन है। उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित यह हिल स्टेशन, पवित्र शहर ऋषिकेश के पास स्थित है। समुद्र तल से 8500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन,सुन्दर व शान्त हिमालय के पहाड़ों से घिरा हुवा है। दरसल यह एक सुन्दर गांव है। यह शांत हिल स्टेशन मसूरी – चम्बा हाईवे पर स्थित है। यह स्थान मसूरी से 38 किलोमीटर व चम्बा (टिहरी) से 12 किलोमीटर दूर है। वर्तमान में यह शांत हिल स्टेशन काफी प्रसिद्ध हो रहा है। कानाताल दिल्ली से लगभग 300 किलोमीटर दूर…

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मित्रों उत्तराखंड में वर्तमान में यातायात काफी सुगम हो गया है। उत्तराखंड भारत के टॉप प्राकृतिक सुंदरता वाले राज्यों में से एक है। उत्तराखंड में परिवहन के अनेक साधन हैं। लेकिन इन सब में सबसे सुविधाजनक और सामान्य बजट में पूर्ण होने वाला यातायात का साधन उत्तराखंड परिवहन निगम की बस सेवा है। उत्तराखंड में टूरिस्ट डेस्टिनेशन अधिक होने के कारण और यहाँ के अधिकतर प्रवासी मैदानी क्षेत्रों में रहने के कारण यहाँ की बसों में भीड़ अच्छी रहती है। ऐसी स्थिति में हम आपको सुझाव देंगे कि यदि आप कम बजट और सुविधाजनक यात्रा के लिए उत्तराखंड रोडवेज से…

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“उत्तराखंड में एक से बढ़कर एक वीर भड़ो ने समय -समय पर जन्म लेकर इस पवित्र देवभूमि को गौरवान्वित किया है। इन्ही महान वीर भड़ो में से वीर भड़ गढू सुम्याल की वीर गाथा का संकलन कर रहें हैं। यह लोकगाथा प्रेम ,त्याग ,वीरता ,साहस और षङयन्त्र से युक्त है। गढ़वाल में गढू सुम्याल के पवाड़े गाये जाते हैं। पवाड़े गढ़वाल मंडल में किसी वीर योद्धा अथवा देवता के जीवन से जुड़ी अलौकिक और अद्भुद पराक्रम से सम्बंधित गाथा गीतों को पवाड़े कहा जाता है।” वीर भड़ गढ़ू सुम्याल की वीर गाथा उत्तराखंड के वीर भड़ गढू सुम्याल का जन्म…

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उत्तराखंड अपनी विशेष संस्कृति, मेलों और त्योहारों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। उत्तराखंड के विशेष मेला त्योहारों में जून अंतिम सप्ताह में होने वाला मौण मेला (Maun mela Uttarakhand) काफी प्रसिद्ध है। मौण मेला मछली पकड़ने से सम्बंधित लोकोत्सव है जो उत्तराखंड के रवाईं, जौनपुर इलाकों में मनाया जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसकी तिथि जून के 21 से 30 के बीच  मानी जाती है। इसकी तिथि का निर्णय स्थानीय आयोजकों द्वारा किया जाता है। मौण क्या है? मौण तिमूर के छिलको को कूटकर तैयार किया गया वह पदार्थ है, जिसके मादक प्रभाव से मछलियां बिहोश हो कर पानी…

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उत्तराखंड की लोक संस्कृति के बारे में चर्चा करने से पहले संस्कृति के बारे में जानना अति आवशयक है। संस्कृति के बारे में प्रसिद्ध विद्वानों का क्या मत है यह जानना आवश्यक है। किसी समाज के  सामाजिक कर्मकांड, समाज की जीवन शैली, रीती रिवाज, कला, विश्वास अन्धविश्वास वह सबकुछ उस समाज विशेष की संस्कृति का अंग है जिसका पालन उस समाज में रहने वाले मनुष्य करते हैं। संस्कृति और लोक संस्कृति की व्याख्या बताती यह वीडियो अवश्य देखें :– https://youtu.be/0CDJm7nMYek अमेरिकन नृविज्ञानी (मानव उत्पत्ति तथा उसके रूप, आकार आदि का विवेचन करनेवाला शास्त्र) ई.बी. टाइलर के अनुसार, संस्कृति उस सम्पूर्ण…

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उत्तराखंड से एक अजीब खबर मिल रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी देहरादून में रहने वाले एक पहाड़ी युवक का अपने मूल धर्म से मोह भंग हो गया और वो बन गया इस्लाम का कट्टर समर्थक। समाचार पत्रों तथा सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड देहरादून का एक आदमी ने पुलिस में शिकायक दर्ज कराई कि उनका बेटा वैभव विल्जवाण कई सालों से एक कमरे में रह रहा है। वह बहुत कम कमरे से बाहर निकलता है। केवल खाने के समय बाहर आता है, और उस समय वो इस्लाम की तारीफ करता है और अपने…

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पहाडों मे लोग मेहनतकश होते हैं। पहले सडकें बहुत कम थी, यातायात के साधन नही थे तो आदमी पैदल चला करते थे। मेहनत करने से नमक की कमी हो जाती होगी तो नमक ज्यादा खाया जाता था। फिर पहाडों मे प्रचुर मात्रा मे फल वगैरह होते थे तो उनके साथ नमक खाया जाता था। पहाड के लोगो ने तब कई प्रकार के मसाले वगैरह मिलाकर नमक को स्वादिष्ट बना दिया। आज भी पहाडों मे कई जगह पहाड़ी पिसी नूण के नाम से नमक बेचकर स्वरोजगार को बढावा दिया जा रहा है और पहाड के नमक  के स्वाद को देश विदेश…

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उत्तराखंड की पहली महिला बॉडी बिल्डर प्रतिभा थपलियाल का चयन नेपाल में होने वाले एशिया बड़ी बिल्डिंग चैम्पयनशिप और साउथ कोरिया में होने वाले वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के लिए हुवा है। उत्तराखंड की प्रतिभा थपलियाल का चयन छह से बारह सितम्बर नेपाल की राजधानी काठमांडू में होने वाली एशिया बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशिप तथा 30 अक्टूबर से 06 नवंबर तक होने वाली वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशिप साउथ कोरिया ,सिओल के लिए हुवा है। प्रतिभा पुरे देश में एकलौती महिला हैं जिनका चयन इस प्रतियोगिता के लिए हुवा है। गोवा में बॉडी बिल्डर फेडरेशन की ओर आयोजित ट्रायल में लगभग 23…

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दुनिया में सभी मानव जातियों की तरह हिमालयी जनजीवन कई सामाजिक व् सांस्कृतिक मान्यताएं मानी जाती हैं। इसी प्रकार उत्तराखंड व् हिमालयी क्षेत्रों में भी अलग अलग मान्यताएं मानी जाती हैं। उनमे से एक मान्यता हिमालयी क्षेत्रों नवजात शिशुओं को लेकर मानी जाती है। पहाड़ों में जब नवजात शिशु (6 माह से छोटे) सुप्तावस्था अथवा जागृत अवस्था में बिना किसी कारण मुस्कराते हैं या रोते हैं , तो बड़े बुजुर्ग कहते हैं उन्हें बिमाता या बिमाई हँसा या रुला रही है। पहाड़ी समाज में यह मान्यता रही है कि नवजात शिशुओं के साथ बिमाता नामक शक्ति रहती है ,जो बच्चों…

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