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यमुनोत्री धाम

यमुनोत्री धाम

यमुनोत्री धाम उत्तरकाशी जिले में समुद्रतल से 4421 मी. ऊंचाई पर स्थित एक मंदिर है। यह मंदिर देवी यमुना का मंदिर है।यमुनोत्री का वास्तविक स्रोत जमी हुयी बर्फ की एक झील और हिमनंद (चंपासर ग्लेशियर) है। मंदिर के मुख्य कर्व गृह में माँ यमुना की काले संगमरमर की मूर्ति विराजत है। इस मंदिर में यमुनोत्री जी की पूजा पुरे विधि विधान के साथ की जाती है। यमुनोत्री यमुनोत्री में पिंड दान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस मंदिर के परिसर में अपने पितरो का पिंड दान करते है। यमुनोत्री के बारे मे पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि सूर्य की पत्नी छाया से यमुना और यमराज पैदा हुए यमुना नदी के रूप मे पृथ्वी मे बहने लगीं और यम को मृत्यु लोक मिला। ऐसा कहते हैं कि जो भी कोई मां यमुना के जल मे स्नान करता है वो आकाल म्रत्यु से मुक्त हो जाता है साथ ही मोक्ष को भी प्राप्त कर लेता है।कहा जाता है कि महर्षि असित का आश्रम यही था। वे नित्य स्नान करने गंगाजी जाते थे और यही निवास करते थे। वृद्धावस्था में उनके लिए दुर्गम पर्वतीय मार्ग नित्य पार करना कठिन हो गया। तब गंगाजी ने अपना एक छोटा सा झरना ऋषि के आश्रम के पास प्रकट कर दिया। वह उज्जवल जटा का झरना आज भी वहा है।यमनोत्री मंदिर के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खोले जाते है। तथा कार्तिक के महिने में यम द्वितीय के दिन बंद कर दिए जाते है। क्यो शीतकालीन ऋतु के समय यहा अधिक बर्फबारी होती है जिसके कारण मार्ग अवरूद्ध हो जाता है तथा अधिक सर्दी के कारण यहा रहना भी कठिन होता है। शीतकाल के छ: महिनो के लिए खरसाली गांव के पंडित मां यमनोत्री की पूजा अपने गांव में ही करते है। फिर अक्षय तृतीय को भव्य चांदी की डोली सजाकर तथा हजारो श्रृद्धालु शामिल होकर विधिविधान के साथ यमुनोत्र धाम के कपाट खोलते है।यमुनोत्री में हर तरह के पर्यटकों के लिए अलग अलग देखने लायक जगह है। जहां पर तीर्थयात्रियों के लिए सप्तऋषि कुंड, यमुनोत्री मंदिर, सूर्य कुंड, दिव्य शिला, हनुमान चट्टी, है तो वहीं चंबा, बड़कोट, खरसाली में साहसिक प्रेमियों के लिए ट्रेकिंग भी हैं।

यमनोत्री की कहानी – यमनोत्री धाम की कथा
कहा जाता है कि महर्षि असित का आश्रम यही था। वे नित्य स्नान करने गंगाजी जाते थे और यही निवास करते थे। वृद्धावस्था में उनके लिए दुर्गम पर्वतीय मार्ग नित्य पार करना कठिन हो गया। तब गंगाजी ने अपना एक छोटा सा झरना ऋषि के आश्रम के पास प्रकट कर दिया। वह उज्जवल जटा का झरना आज भी वहा है। हिमिलय में गंगा और यमुना की धाराएं एक हो गई होती  यदि मध्य में दंड पर्वत न आ जाता। देहरादून के समीप ही दोनो धाराएं बहुत पास आ जाती है।
एक अन्य कथा के अनुसार सूर्य की पत्नी छाया से यमुना व यमराज पैदा हुए थे। यमुना नदी के रूप में पृथ्वी पर बहने लगी तथा यम को मृत्यु लोक मिला। कहा जाता है कि यमुना ने अपने भाई यमराज से भाईदूज के अवसर पर वरदान मांगा कि इस दिन जो यमुना में स्नान करे उसे यमलोक न जाना पडे। इसलिए माना जाता है कि जो कोई भी मां यमुना के पवित्र जल में स्नान करता है। वह आकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। और मोक्षं को प्राप्त करता है। इसी किंदवति के चलते यहा हजारो की संख्या में श्रृद्धालु यहा आते है।

यमनोत्री में गर्म जल के कुंड
यहा यमुनोत्री देवी मंदिर के अलावा कई गर्म पानी के कुंड है। जिनका जल खोलता रहता है। यत्री कपडे में चावल बाधंकर इनमें डुबो देते है और वे पक जाते है। इस प्रकार यहा भोजन बनाने के लिए चूल्हा नही जलाना पडता।
इन कुंडो में स्नान करना संभव नही है और यमुना का जल इतना ठंडा है कि उसमे भी स्नान करना मुश्किल होता है। इस लिए यहा गर्म व ठंडे जल को मिलाकर स्नान करने के लिए कई कुंड बने है। बहुत ऊंचाई पर कलिन्दगिरी से हिम पिघलकर कई धाराओ में गिरता है। कलिन्द पर्वत से निकलने के कारण यमुना जी को कालिंदी भी कहा जाता है। यहा ठंड इतना रहता है कि बार बार झरनो का पानी जमता पिघलता है। ऐसे शीत स्थान में गर्म पानी का झरना और कुंड का पानी वो भी उबलता हुआ जिसमें अगर हाथ डाला जाए तो फफोले पड जाएं एक चमत्कार है। यहा के प्रमुख कुंडो में सूर्य कुंड, गौरी कुंड, तथा सप्तश्रषि कुंड प्रमुख है।

इसे भी जाने:- यमनोत्री के निकटवर्ती प्रमुख दर्शनीय स्थल

यमुनोत्री धाम यात्रा का मार्ग परिचय
यमुनोत्री यात्रा का प्रवेशद्वार ऋषिकेश है। यहा से यमुनोत्री मोटर मार्ग की दूरी 227 किलोमीटर है। ऋषिकेश से नरेन्द्रनगर, आगराखाल, चंबा, उत्तरकाशी, धरासु होते हुए फुलचट्टी तक कार द्वारा पहुचां जा सकता है। इससे आगे के यमुनोत्री धाम तक 8 किलोमीटर का पगडंडी रास्ता पैदल तय करना पडता है। वेसै यात्रियो की सुविधा के लिए यहा पालकी और खच्चरो की सुविधा है। जिसमे यात्री।कुछ शुल्क देकर सुविधा का लाभ उठा सकते है

कैसे पहुँचे
वायुमार्ग- देहरादून स्थित जौलिग्रांट निकटतम हवाई अड्डा है।  कुल दूरी 210 किलोमीटर है

रेल- मार्ग :-
ऋषिकेश से 231 किलोमीटर तथा देहरादनू से 185 किलो मीटर की दूरी पर हैं
सड़क मार्ग- ऋषिकेश से बस, कार अथवा टैक्सी द्वारा नरेंन्द्र नगर होते हुए यमुनोत्री के लिए 228 किलो मीटर की दूरी तय करते हुए फूलचट्टी तक पहुंचा जा सकता है। फूलचट्टी से मंदिर तक पहुंचने के लिए 8 किलो मीटर की चढ़ाई चढ़नी पड़ती हैं

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