कुमाउनी कविता , अहा रे कदू याद ऊ ..|| पहाड़ी कविता || Kumauni poem

मित्रों जैसा कि देवभूमी दर्शन टीम ने एक पहल शुरू की है।, कि यदि आप उत्तराखंड के बारे  कुछ लेख लिखना चाहते हैं या अपनी कविता और उत्तराखंड में किसी स्थान के बारे में या किसी मंदिर के बारे जानकारी प्रकाशित करवाना चाहते हैं, तो आप अपना लेख हमे भेज सकते हैं। बस लेख धार्मिक विवाद या राजनैतिक लाभ वाला न हो। संपर्क के लिए मेल id इस पोस्ट के अंत मे दी है। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए गंगोलीहाट के हिमांशु ने हमे एक सुंदर सी कुमाउनी कविता भेजी है। आइये सर्वप्रथम हिमांशु की सुंदर कविता का आनंद लेते हैं।

कुमाउनी कविता का शीर्षक-

आहा रे कतु याद उँ

लेखक – हिमांशु पन्त

 

उ दौर ले कमाल छी, यो दौर ले कमाल छु,

तब जिंदगी में खुशी छी, अब जिंदगी बडी दुखी छु।

आहा रे कतु भल लागछि…

जब बुजुर्ग नकि बात सुणछ्यां, आब् सब मोबाइल में व्यस्त छन और बुढ़ बाढ़ि हमन देखि पस्त छन,

उ घरक बिजलीक लंफु आज ले याद ऊँ, ज्या में हाथ लगा भेर झाव लागछि खोर लगा भेर चड़चड़ाट हुंछि।

आब् तो ख्वार है ले मलि एक LED लाइट हूँ, नें तो झाव हूँ, नै हीं कोई चड़चड़ाट हूं।

उ जनव और मडुआ क रोट ले याद ऊँ, ज्या में घ्यू और चीनी लगा भेर एक अलगे स्वाद आ जांछि, आब् तो बढ़िया बढ़िया डिश हुनन लेकिन उस स्वाद कां ले नै मिलन।

आहा रे कतु याद ऊं…..

उ ईजा क लाड़ और बाबू की मार कतु याद उँ,

जब ईज लिखि कयो ल्हि बेर उँछि और हम कोई हथियार समझि बेर डरी जांच्छ्या।

बाबू घर में उँछि तो किताब खोलि बेर बैठि जांच्छ्या।

आब् तो PUBG और FREE FIRE है ई नानतिन नं कें फुर्सत नहां।

आहा रे कतु याद ऊं…..

उ घर पनिकी फसक फराव, उ आठ बखत क चाहा।

उ बूढ़ी बाढ़ि नैकि काटणि, उ हमार कुड़बूती।

उ रात्ते  रात्ते गोरु क डूडाट, उ चाड़ नाक चड़चड़ाट।

उ बुबु कि लट्ठी कि खट खट, उ मडुआ रोट कि पट पट।

उ ग्यूँ मडु चुटण, उ घवाग् भुटण।

उ चीनी लागि मडुवा रवाट, उ भेकुवाक लकड नाक स्वाट।

उ स्कूल क भात, उ बाखई में जोरेकि धात।

उ पहाड़कि हवा, उ बुजुर्ग नैकि प्राकृतिक दवा।

उ पाणिकि तें धार में जाण, उ इजाक हाथक खाण।

उ हमार तीज त्यार, उ हमरि बाखई में चाड़ हजार।

उ च्यूड भुटनैकि भट भट, उ धान कूटनैकि खट खट।

आहा रे कतु याद ऊं…..

आहा रे कतु याद ऊं…

 लेखक के बारे में :-

कुमाउनी कविता हिमांशु पंत द्वारा

उपरोक्त कुमाउनी कविता के लेखक श्री हिमांशु पंत जी है। हिमांशु पंत मूलतः गंगोलीहाट पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं। आई टी कंपनी में कार्यरत हिमांशु पंत , अपने पहाड़ व अपनी दूधबोली कुमाउनी में कविता और लेख लिखने के शौकीन हैं।

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नोट – मित्रों यदि आप भी हमे कुमाउनी और गढ़वाली व जौनसारी में कविता,कहानियां और उत्तराखंड संबंधित लेख व जानकारियां भेजना चाहते हैं तो  आप निम्न मेल एड्रेस पर ईमेल कर सकते हैं।

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