Kedarnath Yatra 2026: उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम में इन दिनों भक्तों का तांता लगा हुआ है। एक तरफ जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हर दिन नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हिमालय के इस संवेदनशील क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर भी उभर कर सामने आई है।
आस्था के नए रिकॉर्ड
धाम में बाबा केदार के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा देखने को मिल रही है।
- आंकड़ों में श्रद्धालु: मंदिर के कपाट खुलने के बाद से अब तक 3 लाख 50 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
- प्रतिदिन की भीड़: हर रोज 17 हजार से अधिक तीर्थयात्री धाम पहुंच रहे हैं, जो यात्रा के इतिहास में एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड है।
प्रदूषण की मार झेलती मंदाकिनी
इस ऐतिहासिक भीड़ का सीधा और नकारात्मक असर केदार घाटी के प्राकृतिक सौंदर्य पर पड़ रहा है।
- संकट में जीवनरेखा: केदारनाथ धाम की जीवनरेखा मानी जाने वाली पवित्र मंदाकिनी नदी आज प्लास्टिक प्रदूषण के बोझ तले कराह रही है।
- लापरवाही का मंजर: यात्रा मार्ग और विभिन्न पड़ावों पर बेतहाशा प्लास्टिक कचरा फैला है। सबसे भयावह स्थिति तब पैदा होती है जब यह कचरा सीधे नदी और घाटियों में फेंक दिया जाता है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
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प्रशासन और एजेंसियों की जमीनी कार्रवाई
पर्यावरण के इस गंभीर संकट से निपटने के लिए सफाई एजेंसियां और प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। इस चुनौती से पार पाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं:
- सफाई अभियान: सुलभ इंटरनेशनल के 400 से अधिक सफाई कर्मी सीतापुर से लेकर केदारनाथ धाम तक दिन-रात सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं।
- प्लास्टिक रीसाइक्लिंग: सोनप्रयाग में प्लास्टिक कचरे को कॉम्पैक्ट करने के लिए विशेष मशीनें लगाई गई हैं। अब तक लगभग 7 टन प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करके रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा चुका है।
- गीले कचरे का प्रबंधन: सूखा कचरा ही नहीं, बल्कि गीले कचरे के निस्तारण पर भी जोर है। प्रतिदिन 5 से 6 डंपरों के माध्यम से गीला कचरा रुद्रप्रयाग स्थित डंपिंग जोन तक पहुंचाया जा रहा है।
केदारनाथ धाम की यात्रा निस्संदेह आस्था का एक महान पर्व है, लेकिन हिमालय की पवित्रता और मंदाकिनी की स्वच्छता बनाए रखना हर श्रद्धालु का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। प्रशासन के प्रयासों के साथ-साथ अब यात्रियों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
