देहरादून: उत्तराखंड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलिमैटिक्स (C-DOT) ने मिलकर राज्य सहित पूरे देश में ‘सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम’ (Cell Broadcasting System) का सफल परीक्षण किया। आज पूर्वाहन 11:46 बजे राज्य के मोबाइल उपभोक्ताओं को इस प्रणाली के माध्यम से एक सफल परीक्षण अलर्ट संदेश प्राप्त हुआ। इस सफल परीक्षण के साथ ही, उत्तराखंड में आपदाओं के दौरान आम जनमानस को त्वरित और लक्षित चेतावनी संदेश पहुँचाने के लिए इस अत्याधुनिक तकनीक का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ हो गया है।
उत्तराखंड सरकार की प्रभावी पहल और मुख्यमंत्री का आभार
उत्तराखंड सरकार मानसून सीजन से पहले ही इस तकनीक को लागू कराने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष लगातार प्रभावी पैरवी कर रही थी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष अनुरोध पर, इस प्रणाली का पहला परीक्षण भी उत्तराखंड में ही किया गया था। उस परीक्षण से प्राप्त महत्वपूर्ण तकनीकी और व्यावहारिक फीडबैक राज्य ने NDMA और C-DOT को उपलब्ध कराए थे। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और NDMA के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।
क्या है ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ तकनीक और क्यों है यह खास?
प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, सेल ब्रॉडकास्ट एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में स्थित सभी मोबाइल उपभोक्ताओं को एक साथ आपातकालीन अलर्ट भेज सकती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इसे बेहद खास बनाती हैं:
- भू-लक्षित अलर्ट: चेतावनी संदेश केवल प्रभावित क्षेत्र के टावरों से जुड़े मोबाइल फोनों पर ही भेजे जाते हैं, जिससे अनावश्यक दहशत नहीं फैलती।
- त्वरित सूचना: कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक सूचना पहुंचाई जा सकती है।
- इंटरनेट-मुक्त: इस अलर्ट को प्राप्त करने के लिए न तो मोबाइल डेटा ऑन रखने की जरूरत है और न ही किसी विशेष ऐप को डाउनलोड करने की।
- निःशुल्क और स्वतः प्राप्त: बिना किसी रजिस्ट्रेशन के, मोबाइल नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति को यह अलर्ट अपने आप प्राप्त होगा।
- स्थानीय भाषा में संदेश: ताकि हर व्यक्ति चेतावनी को आसानी से समझ सके।
यह तकनीक आपातकालीन स्थितियों में चेतावनी की तेजी, सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।
किन आपदाओं की मिलेगी चेतावनी और कैसे काम करता है सिस्टम?
इस प्रणाली के माध्यम से विभिन्न आपदाओं की चेतावनी दी जाएगी, जिनमें शामिल हैं: भारी वर्षा, बादल फटना, आकाशीय बिजली, वनाग्नि, हिमस्खलन, तूफान/चक्रवात, बाढ़/फ्लैश फ्लड और भूस्खलन आदि।
यह सिस्टम SACHET (CAP आधारित प्लेटफॉर्म) के माध्यम से संचालित होता है। वैज्ञानिक संस्थानों जैसे – भारत मौसम विभाग (IMD), डी.जी.आर.ई. (DGRE), भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), और वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा जारी पूर्वानुमान सीधे इस सिस्टम में फीड किए जाते हैं, जिसके बाद अलर्ट मोबाइल पर भेजा जाता है।
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अलर्ट कैसे प्राप्त होगा और आपको क्या करना चाहिए?
जब यह अलर्ट आपके मोबाइल पर आएगा, तो:
- मोबाइल में तेज अलार्म ध्वनि बजेगी और फोन वाइब्रेट करेगा।
- स्क्रीन पर एक पॉप-अप मैसेज दिखाई देगा।
यदि संदेश को फिर से देखना हो, तो आप फोन की ‘सेटिंग्स’ में ‘नोटिफिकेशंस् के एडवांस सेटिंग्स’ में जाकर ‘वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट्स’ पर क्लिक करके ‘इमरजेंसी अलर्ट हिस्ट्री’ में इसे पढ़ सकते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण निर्देश:
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने जनता से अपील की है कि:
- मोबाइल पर आने वाले किसी भी आपदा अलर्ट को नजरअंदाज न करें।
- संदेश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिए गए निर्देशों का पालन करें।
- अपने परिवार, पड़ोसियों और ग्रामीण समुदाय को भी जागरूक करें।
- अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।
याद रखें, हर अलर्ट आपके जीवन की रक्षा के लिए है। आपदा सुरक्षित उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनें।
मानसून और चारधाम यात्रा के लिए वरदान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह तकनीक आगामी मानसून सीजन और चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों और स्थानीय निवासियों को समय रहते सटीक और प्रभावी चेतावनी देने में वरदान सिद्ध होगी। राज्य सरकार का निरंतर प्रयास था कि मानसून से पूर्व यह तकनीक उपलब्ध हो, ताकि संभावित आपदाओं के प्रति जनमानस को सचेत किया जा सके। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने इसे एक “गेम-चेंजर” बताया, जो आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति लाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने पुष्टि की कि USDMA के विशेषज्ञों ने आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है और अब इस तकनीक का प्रदेश में व्यापक उपयोग किया जाएगा।
