देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले दो महीने से देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार सुबह करीब सवा 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश में शोक की लहर छा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री का अंतिम संस्कार कल हरिद्वार में किया जाएगा।
सेना से लेकर राजनीति तक का सफर
भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद से रिटायर होने के बाद भुवन चंद्र खंडूरी ने लगभग 30 वर्षों तक राजनीति में सक्रिय रूप से देश और राज्य की सेवा की। उनके राजनीतिक सफर की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री: वे उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री बने और उन्होंने दो बार (2007 से 2009 और 2011 में) राज्य की कमान संभाली। 2011 में जब राज्य में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए, तो पार्टी ने स्थिति संभालने के लिए उन पर ही भरोसा जताया।
- वाजपेयी सरकार में अहम भूमिका: खंडूरी जी की गिनती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में होती थी। 1999 में अटल सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया था। देश में हाईवे और सड़कों का जाल बिछाने में उनके अभूतपूर्व योगदान की आज भी प्रशंसा की जाती है।
- रक्षा मामलों के अध्यक्ष: 2014 में केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आने पर उन्हें रक्षा मामलों की संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
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मुख्यमंत्री धामी ने जताया शोक
उत्तराखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए लिखा:
“अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। भारतीय सेना में सेवा के दौरान श्री खंडूरी जी ने राष्ट्रसेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका पूरा व्यक्तित्व देशहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा। एक जननेता के रूप में उन्होंने राज्य की प्रगति के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता तथा कार्यकुशलता से जनता के दिलों में विशेष स्थान बनाया।”
पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी को उनके सुशासन, ईमानदार कार्यशैली और पारदर्शिता के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
