Monday, May 20, 2024
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गज्जू मलारी उत्तराखंड रवाईं घाटी की एक प्रेम कहानी !

चिरातीत काल में देव भूमि उत्तराखंड में अनेक महाविभूतियों ने जन्म लिया। और अन्य राज्यों की तरह यहां भी अमर प्रेम कथाएं बनी। इन्हीं अमर प्रेम कथाओं मे से एक है, उत्तरकाशी की रवाई घाटी की गज्जू मलारी की प्रेम कथा।

उत्तराखंड की प्रमुख प्रेम कथाओं में राजुला मलूशाही, रामी बौराणी की कथाएं प्रचलित हैं। राजुला मालुशाई की कथा पर तो फिल्म भी बन गई है। उत्तराखंड के राजा हरु हीत ,और मालू कि कथा भी बहुत प्रसिद्ध है।आज हम आपको उत्तराखंड की एक और प्रेम कथा  गज्जू मलारी की कहानी सुनाते हैं। यह कथा लोक दंतकथाओं पर आधारित है।यह कथा उत्तराखंड के उत्तरकाशी के रवाई घाटी की दोरी-भीतरी में घटित प्रेमगाथा  है।

बहुत समय पहले की बात है, उत्तरकाशी के रवाईं घाटी में एक चरवहा रहता था, जिसका नाम था गज्जू। वह वहां के जंगलों में अपनी भेड़े चरा कर अपना जीवन यापन करता था। वह घुमक्कड़ जीवन यापन करता था। उधर मलारी सौंदाण की विवाहित पुत्री होती है। मलारी के पिता उसकी शादी बचपन मे ही तय कर देते हैं। मगर मलारी अपनी शादी से खुश नही होती, वह बस  एक आदर्श पुुत्रि बन कर अपने पििता के दिये वचन को ( गज्जू मलारी )

निभाती है। एक प्यार को तड़पती ,अपने पिता के बचन से बधी मलारी जैसे तैसे अपनी जिंदगी काट रही थी। एक दिन मलारी अपनी बहन सलारी के साथ जंगल जाती है । जब वो जंगल मे सुतर बीन रही होती है, अचानक उस पर बाघ हमला कर देता है। और वो मदद के लिए चिल्लाती है,तभी पास में गज्जू अपनी भेड़े चरा रहा था। मलारी की आवाज सुनकर ,वो बिना समय गवाए बाघ से भिड़ जाता है। और बाघ को खदेड़ देता है।

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तब मलारी और गज्जू की पहली मुलाकात होती है। इस मुलाकात पे गज्जू मलारी एक दूसरे से आकर्षित हो जाते हैं। मगर मलारी को अपने विवाहित होने का अहसास भी रहता है। अपने पिता के वचन कि याद भी रहती है। वह 0इस प्रेम पाश से दूर रहने की बहुत कोशिश करती है,मगर प्रेम और स्नेह के बिना जिंदगी जी रही मलारी बहुत समय तक अपने आप को रोक नहीं पाती,और गज्जू के मोह पाश में पड़ जाती है।

गज्जू एक चरवाह था, घुमक्कड़ी उसका जीवन यापन और मलारी सौंदाण की पुत्री। किसकी हिम्मत को सौंदाण की बहू बेटियों कि तरफ नजर भी डाले। एक तरफ समाज की इतनी बड़ी खाई,दूसरी तरफ मलारी  का मोहपाश। इसी विवशता मे जकड़ा गज्जू भी प्रेम की राह में आगे बड़ गया। ( गज्जू मलारी )

गज्जू मलारी उत्तराखंड रवाईं घाटी की एक प्रेम कहानी !

Image credit -http://www.kumaunpost.com

मजबूरियों मे जकड़े दोनों प्रेमी, एक दूसरे को साहस देते हैं। गज्जू कहता है,”मै जानता हूं वास्तविकता क्या है, मगर क्या करू मैं अपने आप को नहीं रोक पाया, और तुमसे प्यार कर बैठा। मै तुम्हारे पिता जी के पैरो मे अपनी सीकोई(पहाड़ी टोपी) रख दूंगा,वो जो कहेंगे मै कर दूंगा। मगर वो मुझे तुमसे दूर ना करें।

इन्हीं मधुर मधुर बातों में दिन कट गए, धीरे धीरे मलारी की अतृप्त प्रेम पिपासा तृप्ति के तरफ रुख करने लगी। दोनों का प्रेम परवान चढ़ने लगा। मलारी की बहिन सलारी ने भी मलारी को समझाया , कि तू शादी शुदा है,तेरा गैर मर्द के साथ प्यार करना अधर्म है। इसके जवाब में मलारी कहती है।

हा बहिन यह सत्य है,की उसकी मेरी शादी हुई है,मगर उसकी मेरी आत्माओं का मिलन हुआ ही कहा है,अभी तक,शरीर का मिलन भी कोई मिलन होता है।जब उसकी जरूरत होती है, मै उसके लिए सोतर की तरह बिछ जाती हूं,अपनी जरूरत पूरी करके,वो अनजान बन जाता है मै उसके लिए।

मै तो बस बाबा का वचन निभा रही हूं। मगर अब मै गज्जू के मोहपाश में बधती। जा रही हूं।गज्जू से मेरा आत्मा का मिलन है। इसी प्रकार गज्जू मलारी का प्रेम परवान चढ़ता जा रहा था। मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक दिन मलारी ने गज्जू को मिला देखने बुलाया।

खुद दोनो बहिनें भी मेला घूमने गई, वहा एक युवक ने मलारी से दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया।यह बात गज्जू को पता चली तो,उसने उस युवक की पिटाई कर दी। दुर्भावना से ग्रसित उस युवक ने गांव में सबको बता दिया कि , गज्जू मलारी की प्रेम प्रसंग चल रहा है। यह बात मलारी के पिता सौंदाण को पता चली,उसने गुस्से में आकर मलारी को घर की चार दिवारी मे कैद कर दिया।

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अब एक तरफ सौंदाण की हठधर्मता और दूसरी तरफ मलारी का अतृप्त प्रेम।उधर गज्जू भी ये उम्मीद मे बैठा रहा,की मेरी मलारी एक दिन पक्का मेरे पास आएगी। लोगो के लाख समझाने पर भी मलारी , गज्जू के प्रेम पाश से बाहर नहीं निकल पा रही थी।उधर पिता का सख्त पहरा था, ईधर गज्जू के लिए मलारी के दिल में अगाथ प्रेम।

मलारी गज्जू से मिलने के लिए, पूरी तरह जिद पर उतर आई। मलारी ने प्राणों कि चिंता किए बिना उसने अन्न जल त्याग दिया। भूखी प्यासी रहने के कारण मलारी बीमार होने लगी ,कमजोर पड़ने लगी।उधर गज्जू मलारी की ये हालत अपने सपनो मे देख लेता, चिंतित हो जाता। परन्तु उसके साथी लुदरू और बलमु उसे समझाते की सपने कभी सच नहीं होते हैं।

इधर पुत्री को मरणासन्न देख , सौंदाण का दिल पसीज जाता है,और खुद गज्जू के पास जा कर उसे मलारी के पास लेकर आता है।गज्जू जैसे ही वहां आता है, मलारी का हाथ थमता है। उसके बाद मलारी की आखे पथराना शुरू हो जाती हैं। गज्जू की आंखे डबडब भर जाती है, उसे अहसास हो जाता है, कि अब मेरी मलारी नहीं बचेगी तब वो बोलता है –

मरी त जाले मलारे, साथ त औंनु आऊँ
सून बणौन पत्यौंउ, टाटौंदी गाड़नु ताऊँ.
ताउलें बोलौं मलारे, फूकी औनुं ताऊँ
सल्ल माथ दिकली, जसी पुन्या जाऊँ।

मतलब, मलारी तू मर भी जाएगी तो, मै तेरे साथ ही आऊंगा, तू सदा मेरी रहेगी, मै तेरी मूर्ति की माला बना कर अपने गले मे धारण करूंगा। हे मलारी !मै ही तेरा अंतिम संस्कार करूंगा। चिता पर भी तू पूर्णिमा के चांद सी दिखेगी।

दोनों प्रेमियों की अंतिम बातचीत के चलती जाती है,मलारी गज्जू को एकटक निहारती रहती है,गज्जू को निहारते हुए,मलारी का मुंह गौरेया की तरह खुलता है, आंखे पथरा जाती हैं। गज्जू अपने कपड़े का टुकड़ा फाड़ के उसका मुंह बंद करता है।

इसी के साथ मलारी निष्प्राण हो जाती है…….

संदर्भ – यह कथा, जनश्रुति ,और विभिन्न पत्र पत्रिकाओं ,एवं किताबों के ज्ञान पर आधारित है। यदि कोई त्रुटि हुई हो तो कॉमेंट के माध्यम से अवगत कराए। हम उचित संशोधन करें। ( गज्जू मलारी )

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Bikram Singh Bhandari
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बिक्रम सिंह भंडारी देवभूमि दर्शन के संस्थापक और लेखक हैं। बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड के निवासी है । इनको उत्तराखंड की कला संस्कृति, भाषा,पर्यटन स्थल ,मंदिरों और लोककथाओं एवं स्वरोजगार के बारे में लिखना पसंद है।
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