जौलजीबी मेला 2025 कब है? जौलजीबी मेला 2025 इस वर्ष 14 नवंबर 2025 से शुरू होकर 24 नवंबर 2025 के आस पास तक चलेगा। यह मेला पर्वतीय संस्कृति, व्यापार और लोककला का प्रमुख केंद्र है। जौलजीबी मेला का परिचय भारत, नेपाल और तिब्बत—इन तीनों देशों की परंपराओं का संगम है अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेला। यह मेळा काली, गोरी और सरयू नदियों के संगम स्थल पर आयोजित होता है और पिथौरागढ़ से लगभग 68 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मेला प्रतिवर्ष 14 नवम्बर से 24 नवम्बर के आस पास तक होता है। यहाँ व्यापारी अपने-अपने देश के स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, ऊनी कपड़े,…
Author: Bikram Singh Bhandari
हम इस लेख में उत्तराखंड की स्थापना पर निबंध का संकलन कर रहें हैं। उम्मीद है हमारा यह संकलन विद्यार्थी मित्रों के लिए सहायक होगा। हिमराज हिमालय के अंचल में फैला हुवा उत्तराखंड प्रदेश अपने गगन चुम्बी हिम शिखरों और रमणीक उपत्यकाओं के कारण प्राचीन काल से ही प्रकृति प्रेमियों ,पवित्र तीर्थस्थलों ,शांति एवं तपसाधना के लिए प्रसिद्ध रहा है। उत्तराखंड नवंबर 2000 से पहले यह उत्तर प्रदेश का एक मंडलीय भाग था। जो 09 नवंबर 2000 को भारत के सत्ताइसवें और हिमालयी क्षेत्रों के ग्यारहवे राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। और 09 नवंबर 2025 को हम उत्तराखंड…
उत्तराखंड स्थापना दिवस 2025 : उत्तराखंड ने 25 वर्षों में विकास, संघर्ष और असफलताओं की मिश्रित यात्रा तय की है। 2000 में बने इस राज्य ने आर्थिक प्रगति तो की, पर पलायन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं अब भी गहरी हैं। रजत जयंती आत्ममंथन और शहीदों के सपनों को साकार करने का अवसर है। प्रस्तावना – उत्तराखंड, जो हिमालय की गोद में बसा हुआ खूबसूरत पर्वतीय राज्य है, 9 नवंबर 2025 को अपनी रजत जयंती यानी 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। इस राज्य का गठन लंबी लड़ाई, आंदोलन और भारी बलिदानों के बाद 9 नवंबर…
वीर पुरुष माधो सिंह भंडारी (Madho Singh Bhandari) गढ़वाल के मध्यकालीन इतिहास के वे वीर हैं जिन्हे सबसे अधिक याद किया जाता है। जिनकी बाहदुरी वीरता ,त्याग और उदारता की कहानियाँ समस्त गढ़वाल में सुनाई जाती हैं। वीर माधो सिंह भंडारी का जन्म सत्रहवीं सदी के अंत और अठ्ठारहवी सदी के प्रारम्भ में माना जाता है। ( तिथि निश्चित नहीं है ) इनका जन्म कीर्तिनगर के निकट मलेथा नामक गांव में हुवा था। शुरुवात में ये गढ़वाल के शाशक राजा महीपतिशाह का एक वीर सैनिक था। जो अपनी वीरता , देशप्रेम और हिम्मत से उसी सेना का उपसेनानायक और बाद…
गणनाथ का अर्थ और धार्मिक महत्व – गणनाथ शब्द का अर्थ है गणों के स्वामी, अर्थात स्वयं भगवान भोलेनाथ। भगवान शिव को समर्पित यह पवित्र स्थल गणनाथ मंदिर अल्मोड़ा जिले के मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर मल्ला स्युनरा गांव में स्थित है। यह पर्वतीय मंदिर समुद्र तल से 2116 मीटर की ऊँचाई पर एक प्राचीन गुफा में विराजमान है। गणनाथ मंदिर तक पहुँचने के दो प्रमुख मार्ग हैं — अल्मोड़ा–सोमेश्वर मार्ग पर रनबन से लगभग सात किलोमीटर की सीधी चढ़ाई द्वारा अल्मोड़ा–बागेश्वर मार्ग पर ताकुला से चार किलोमीटर पैदल चलकर दोनों मार्ग श्रद्धालुओं को प्राकृतिक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान…
बौराणी मेला : दीपावली के ठीक 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को पिथौरागढ़ के बोराणी नामक स्थान पर सैम देवता के मंदिर में लगता है प्रसिद्ध बोराणी का मेला। संस्कृति के अद्भुत रूप दर्शनों के साथ जुवे के लिए भी प्रसिद्ध है यह मेला। यह उत्तराखंड के अन्य मेलों के सामान यह मेला भी धार्मिक और व्यवसायिक है। बौराणी मेला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस मेले के लिए नजदीकी पुलई और चापड़ गांव के बोरा उपजाति के लोग ढोल दमु के साथ नाचते गाते बाइस फ़ीट ऊँची पहाड़ी मशाल ( पके हुए चीड़ के तने से फाड्…
उत्तराखंड की लोक संस्कृति जितनी विविध और सुंदर है, उतनी ही गहराई उसमें छिपे अनुष्ठानों और आस्थाओं में भी है। पर्वतीय जीवन की आत्मा पानी, मिट्टी और देवत्व से जुड़ी है। इन्हीं जीवनदायिनी तत्वों में से एक है धारापूजन, जो विवाह संस्कार के बाद किया जाने वाला एक लौकिक (सांसारिक) अनुष्ठान है। यह न केवल जल के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, बल्कि नवविवाहिता के नए जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और निरंतरता का शुभ संकेत भी है। धारापूजन क्या है ? | What is dhara pujan ? धारापूजन (धारा पूजन) उत्तराखंड की एक प्राचीन और भावनात्मक लोक परंपरा है, जो…
इगास बग्वाल 2025 : उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर पर्व-त्योहारों और लोक परंपराओं से समृद्ध है। इन्हीं पर्वों में से एक है इगास त्योहार या इगास बग्वाल (Egas Festival Uttarakhand / igas bagwal / Egas bagwal)। यह पर्व दीपावली के 11वें दिन कार्तिक शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है। इगास को गढ़वाल और कुमाऊँ के कई हिस्सों में दीपावली का दूसरा रूप और विजयोत्सव माना जाता है। ईगास बग्वाल के बारे में विस्तार से देखिए इस वीडियो में: https://youtu.be/k1oCxhWxc0k?si=hIXnCti3l2BGiGl1 इगास बग्वाल 2025 की तिथि- साल 2025 में इगास बग्वाल 01 नवंबर 2025, शनिवार को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी।…
उत्तराखंड में बगड़ – पर्वतीय धरती अपनी भौगोलिक विविधताओं और सांस्कृतिक विशेषताओं के लिए जानी जाती है। यहां का हर स्थलनाम न केवल किसी स्थान, नदी या क्षेत्र का परिचायक होता है, बल्कि अपनी आंचलिक पहचान और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भ भी समेटे रहता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण उदाहरण है बगड़ जो शिवालिक पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत बहने वाली नदियों-नालों के तटीय भू-भाग को दर्शाता है। उत्तराखंड में बगड़ शब्द का अर्थ और उत्पत्ति – बगड़ शब्द उत्तराखण्ड के पहाड़ी भूभाग की भौगोलिक परिस्थिति से जुड़ा हुआ है। इसे नदियों और नालों के प्रवाह से किनारों पर बनने वाली रेतीली…
डमा डमा डमरू बाजण लेगे वायरल पहाड़ी भजन लिरिक्स – इंस्टाग्राम पर वायरल पहाड़ी भजन “माता पार्वती गौरा नाचण लेगे” के पूरे लिरिक्स के साथ जानें इस मधुर भजन की विशेषताएं वायरल हुआ यह मधुर पहाड़ी भजन – आजकल सोशल मीडिया पर एक खास पहाड़ी भजन तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर दो प्यारी बच्चियों का “माता पार्वती गौरा नाचण लेगे”( mata parvati gora nachan lage lyrics ) गाने का क्यूट अंदाज लोगों के दिलों को छू रहा है। यह भजन मिलियन व्यूज पार करते जा रहा है और नवरात्रि 2025 के शुभ अवसर पर इसकी…


