Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

खोल दे माता खोल भवानी एक सुन्दर कुमाऊनी झोड़ा गीत है। जिसमे माता और भक्त के बीच का प्यारा भरा संवाद झोड़ा रूप में वर्णित किया गया है। जिसमे एक तरफ भक्त पहाड़वाली माँ से किवाड़ खोलने को बोलता है। ” खोली दै माता खोल भवानी धारमा  केवाड़ा ” तो माँ भी उसके सवाल के प्रतिउत्तर में सवाल करती है , ” मेरे लिए क्या खास भेंट लाया है जो तेरे लिए किवाड़ खोलू। यथा ” के लै रैछे भेंट पखोवा के खोलूं केवाड़ा ” तब भक्त माँ से स्नेह से विनती करते हुए कहता है ,” तेरे दरवार के…

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ओड़ा भेटना – ओड़ा भेटना की प्रथा उत्तराखंड की कुमाऊँ मंडल के द्वाराहाट के स्याल्दे बिखौती मेले के अवसर पर निभाई जाने वाली परम्परा है। ‘ओड़’ का अर्थ है विभाजक चिह्न । द्वाराहाट बाजार में सड़क के किनारे एक पाषाणी संरचना है, जिसे ओड़ा माना जाता है। मेले के दिन इन धड़ों के द्वारा इस पाषाण खण्ड पर लाठियों से मारने की परम्परा है और इसका अपना इतिहास भी है । कहा जाता है कि पिछले समयों में एक बार यहां के शीतलादेवी के मंदिर में पहले दर्शनों को लेकर दो धड़ों के बीच मतभेद हो जाने से उनके बीच…

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उत्तराखंड की संस्कृति विश्व में एक अलग पहचान है। उसकी इस पहचान को शीर्ष पर कायम रखने के लिए उत्तराखंड के तीज त्यौहार और समृद्ध परम्पराओं का विशेष योगदान है। इन्ही परम्पराओं और तीज त्योहारों में से एक है उत्तराखंड की कुमाऊनी होली। कुमाऊनी होली उत्तराखंड का दो माह तक लगातार चलने वाला उत्सव है। जिसमे पहले बैठकी होली चलती है फिर रंग एकादशी से चलती है कुमाऊनी खड़ी होली। कुमाऊनी होली पर आधारित बहुत सारे लेख हमारे पोर्टल में पहले से संकलित किये गए हैं ,जिनका लिंक नीचे दे रहें हैं। आप उन उन लिंको के माध्यम से कुमाउनी…

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उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल ब्लॉक में भगवान् शिव का एक देवालय है। इस मंदिर को छोटा कैलाश कहते हैं। वैसे तो पूरा उत्तराखंड ,पूरा हिमालयी क्षेत्र भगवान भोलेनाथ का घर है। लेकिन पहाड़ों में कुछ स्थान ऐसे हैं जिनका भगवान शिव के साथ खास जुड़ाव है। उनमे से एक खास स्थान भीमताल का छोटा कैलाश धाम है। खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है छोटा कैलाश भीमताल पहुंचने के लिए – छोटा कैलाश के नाम से प्रसिद्ध यह तीर्थ नैनीताल जिले में बहुत ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ पहुंचने के लिए हल्द्वानी से अमृतपुर होते हुए पिनरो गांव पहुंचना होता…

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प्राचीन काल से ही सनातन समाज में विवाह संस्कार जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। सनातन धर्म में अनेक जीवन पद्धतियां ,समाज हैं जिनके विवाह संस्कार मूलतः सनातनी विधि -विधानों पर होने के बावजूद थोड़ा बहुत स्थानीय संस्कृति और परम्पराओं का अंतर आ जाता है। स्थानीय मान्यताओं के आधार पर कुछ परम्पराएं बदल जाती हैं। प्रस्तुत आलेख में कुछ कुमाऊनी विवाह परम्पराओं के बारे में चर्चा करेंगे। वैसे तो कुमाऊँ मंडल में तीन प्रकार  की  विवाह परम्पराएं चलन में रही हैं – १- आँचल विवाह २ -सरोल विवाह ३ -मंदिर विवाह। कुमाऊं में आजकल मुख्यतः आंचल विवाह चलता…

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उत्तराखंड के कुमाऊं में लोक देवता सैम देवता को मंगलकारी कल्याणकारी देव शक्ति के रूप में पूजा जाता है। सैमज्यू अत्यंत सरल और न्यायकारी लोकदेवता हैं। वे अपने भक्तों का कल्याण करते हैं और दुष्टों को दंड देते हैं। सैम का अर्थ होता है स्वयंभू। इन्हे शिवांश या शिव का अंशावतार भी माना जाता है। अल्मोड़ा जागेश्वर के पास झाकर सैम ( jhakar sem mandir ) में इनका परम धाम है। वहां ये स्वयंभू लिंग रूप में अवतरित हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा क्षेत्र के लगभग प्रत्येक गांव में इनका मंदिर होता है। इन्हे देवताओं का मामू या देवो के गुरु…

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट नगर को मंदिरों का नगर उत्तर की द्वारिका भी कहा जाता है। इसी मंदिरो के नगर में काशी विश्वनाथ के महत्त्व के बराबर महत्त्व रखने वाला महादेव का मंदिर है , जिसे विभाण्डेश्वर महादेव (vibhandeshwar mahadev mandir )कहा जाता है। विभाण्डेश्वर भगवान शिव का यह मंदिर उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट नगर से 8 किमी. दक्षिण में नगारधण (नागार्जुन) पर्वत के तलहटी में स्थित है। यह मंदिर नागार्जुन पर्वत से प्रवाहित होने वाली रमनी, सुरभि एवं नन्दिनी नामक सरिताओं के संगम पर स्थित है। विभाण्डेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास  -…

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गंगनाथ देवता और गोलू देवता उत्तराखंड कुमाऊं के प्रमुख लोक देवता है। जिस प्रकार गोलू देवता को न्याय के देवता माना जाता है उसी प्रकार गगनाथ देवता को भी कुमाऊं का न्यायप्रिय देवता माना जाता है। अल्मोड़ा क्षेत्र के गांव -गांव में गंगनाथ देवता के मंदिर हैं। ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर इनका नैनीताल जिले में हैं जिसके बारे में मान्यता है कि यहाँ रुमाल बांधने से मनोकामना पूर्ण होती है। नैनीताल में भी है न्याय के देवता गंगनाथ देवता का मंदिर – गंगनाथ देवता की पूजा मुख्यतः अल्मोड़ा जिले के आस पास के गांवों में अधिक होती है। अल्मोड़ा…

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उत्तराखंड की संस्कृति, परम्पराओं में आपसी प्रेम, प्रकृति प्रेम, मानव कल्याण की भावनाये कूट-कूट कर भरी होती है। इसी फेरहिस्त में कुमाऊं उत्तराखंड की एक प्यारी परम्परा है ,जिसमे भांजे और भांजी को परिवार या समाज का सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है। भांजे -भांजी को दक्षिणा देना, दान करना पुण्य माना जाता है। कुमाऊं मंडल में हर शुभ कार्यों में भांजे भांजी को पुरोहित के साथ लगभग उनके बराबर दान-दक्षिणा से सम्मानित किया जाता है। भांजे – भांजी को कुमाऊं में ब्राह्मण माना जाता हैं। बिना भांजे के कोई शुभ काम सफल नहीं होता है। कुमाऊं की ये प्यारी परम्परा…

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पहाड़ों में पुण्यात्माओं की पूजा करने की पुरानी परम्परा है। किसी को श्रद्धावश पूजते हैं तो किसी को अनिष्ट के भय से बचने के लिए पूजते हैं। और पुल्लिंग इंगित करने वाली पूज्य आत्माओं को स्नेह से बुबु जी भी बोलते हैं। जैसे रानीखेत के बुबुधाम के बुबु  ,बेतालघाट के बेताल बुबु  बागेश्वर के मशान बुबु इत्यादि। इन्हीपूज्य बुबु लोगो में एक बुबु और हैं ,और वे है अल्मोड़ा के खमसिल बुबु। उत्तराखंड की संस्कृति नगरी अल्मोड़ा के गंगोला बाजार में एक छोटा सा मंदिर है ,जहा एक हुक्का रखा है। इसे खमसिल बुबु का मंदिर कहते हैं।  खमसिल बुबु…

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