देहरादून। राज्य में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) के लिए अब अलग-अलग कैडर तैयार किया जाएगा। कैडर गठन के विस्तृत प्रस्ताव को कार्मिक एवं वित्त विभाग से हरी झंडी मिल चुकी है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में कम होगा शिक्षकों का दबाव
वर्तमान व्यवस्था के तहत एससीईआरटी और डायट में माध्यमिक शिक्षा विभाग से ही शिक्षकों और अधिकारियों को तबादले या प्रतिनियुक्ति के माध्यम से तैनात किया जाता रहा है। इसके अलावा निदेशालय और शासन स्तर से भी यहां नियुक्तियां होती रही हैं।
चूंकि माध्यमिक शिक्षा विभाग स्वयं शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है और व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विद्यालयों में 4,000 से अधिक अतिथि शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं, ऐसे में शिक्षकों को मूल विद्यालयों से हटाकर प्रशिक्षण व शोध संस्थानों में भेजने से शिक्षण कार्य प्रभावित होता था। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए दोनों प्रमुख संस्थानों के स्वतंत्र कैडर की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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ड्राफ्ट फाइनल: एससीईआरटी में प्रोफेसर तो डायट में होंगे प्रवक्ता व प्राचार्य
तैयार ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत पदों का ढांचा इस प्रकार तय किया गया है:
- एससीईआरटी (SCERT): यहां उच्च शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद सृजित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक नेतृत्व के लिए अपर निदेशक और निदेशक के पद होंगे। SCERT में अधिकारियों के लिए मुख्य रूप से प्रशासनिक संवर्ग की व्यवस्था रहेगी।
- डायट (DIET): जनपदों में स्थित डायट में अकादमिक संवर्ग के अधिकारियों व शिक्षकों की तैनाती होगी। यहां प्रवक्ता, उप प्राचार्य और प्राचार्य के पद शामिल किए गए हैं।
अलग सेवा नियमावली और नई भर्तियां
एससीईआरटी निदेशक बंदना गर्ब्याल ने बताया कि कैडर गठन के प्रस्ताव को संबंधित विभागों से सहमति मिल गई है और इसे शीघ्र ही कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा।
कैबिनेट से मुहर लगने के बाद इन संस्थानों के लिए अलग सेवा नियमावली लागू की जाएगी। इसके बाद एससीईआरटी और डायट के लिए स्वतंत्र रूप से सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को वापस शिक्षण कार्य में लगाया जा सकेगा और प्रशिक्षण संस्थानों को भी अपने स्तर पर विशेषज्ञ अकादमिक व प्रशासनिक स्टाफ मिल सकेगा।


