रुद्रप्रयाग: विश्व के सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित शिवालय एवं पंचकेदारों में प्रतिष्ठित तृतीय केदार भगवान श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित इस पावन धाम में कपाट बंदी के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए, जिसके साक्षी सैकड़ों श्रद्धालु बने।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई प्रक्रिया
कपाट बंदी के उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण को रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। मुख्य पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधियों के तहत पूजा-अर्चना संपन्न कराई। आरती और भोग अर्पण के उपरांत नियत समय पर गर्भगृह के कपाट आगामी ग्रीष्मकाल तक के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान पूरा चोपता क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।
तीन पड़ाव तय कर शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचेगी उत्सव डोली
कपाट बंद होते ही भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास मक्कूमठ के लिए रवाना हो गई। तय यात्रा कार्यक्रम के अनुसार:
- 6 नवंबर: डोली का पहला रात्रि विश्राम चोपता में रहेगा।
- 7 नवंबर: डोली अपने दूसरे पड़ाव भनकुण्ड पहुंचेगी।
- 8 नवंबर: भगवान की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री मर्कटेश्वर मंदिर (मक्कूमठ) में प्रतिष्ठापित होगी।
आगामी छह माह तक शीतकाल के दौरान भगवान तुंगनाथ की दैनिक पूजा-अर्चना मक्कूमठ में ही संपन्न की जाएगी।
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06 नवंबर का अनूठा संयोग
तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने को लेकर एक रोचक संयोग भी सामने आया है। ऐतिहासिक पंचांग गणना के अनुसार, इससे पूर्व वर्ष 2019 और वर्ष 2025 में भी 06 नवंबर को ही धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हुए थे। इस वर्ष भी इसी तिथि पर कपाट बंद होने की परंपरा पूरी हुई।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ऊखीमठ कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मनोज नेगी, मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और भक्तजन उपस्थित रहे।




