Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

बूढ़ी दिवाली 2025 में पर्व की तिथि – हिमाचल और उत्तराखंड के जौनसार क्षेत्र में वर्ष 2025 की बूढ़ी दिवाली का पर्वोत्सव 20 नवंबर 2025 से प्रारंभ होगा और 23 नवंबर तक चलेगा साथ ही मार्गशीष बग्वाल भी ऐसी समय मनाई जाएगी। और उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली ( इगास ) 01 नवंबर 2025 को मनाया गया है। हिमालयी पर्वों की अनोखी दीपावली परंपरा और तिथि- भारत के पर्व-परंपराओं में जहां मैदानी क्षेत्रों में कार्तिक अमावस्या को दीपावली धूमधाम से मनाई जाती है, वहीं हिमालयी अंचलों में इसका एक अनोखा, स्थानीय स्वरूप मार्गशीर्ष अमावस्या को देखने को मिलता…

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देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार, 9 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित उत्तराखंड की रजत जयंती समारोह में शामिल होंगे। इस विशेष अवसर पर पूरे राज्य में सुरक्षा और तैयारियों को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, रविवार दोपहर लगभग 12:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी देहरादून पहुंचेंगे और उत्तराखंड राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान वह एक स्मारक डाक टिकट भी जारी करेंगे और जनसमूह को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री लगभग ₹8140 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और…

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उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनायें | Uttarakhand Rajat Jayanti wishesh 2025 9 नवंबर 2000 का दिन इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है ,जब हिमालय की गोद में बसा हमारा प्यारा राज्य “उत्तराखंड” भारत के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे संघर्ष, आंदोलन और सपनों की परिणति थी आज 9 नवंबर 2025, हम उत्तराखंड की रजत जयंती (25 वर्ष) मना रहे हैं — गर्व, संघर्ष और संस्कृति की इस यात्रा पर हर उत्तराखंडी को गर्व है। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं | उत्तराखंड स्थापना दिवस…

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उत्तराखंड का इतिहास: प्रस्तावना – उत्तर भारत में बसे देवभूमि उत्तराखंड का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। हिमालय की गोद में बसा यह क्षेत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, बल्कि यहां की सभ्यता, संस्कृति और शासन व्यवस्था ने भी भारतीय इतिहास को गहराई से प्रभावित किया है। 09 नवंबर 2000 को उत्तराखंड भारत का 27वां राज्य बना। अनेक आंदोलनकारियों के बलिदान और दशकों के संघर्ष के बाद यह पर्वतीय राज्य अस्तित्व में आया। प्रस्तुत लेख में उत्तराखंड का इतिहास आदिकाल से लेकर राज्य गठन तक क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है। आदिकाल: सभ्यता का प्रारंभ -…

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गोविंदपुर – अल्मोड़ा में हवालबाग ब्लॉक में स्थित हमारा दौलाघट – गोविंदपुर क्षेत्र … यह नाम शायद उत्तराखंड के मानचित्र पर अभी तक किसी खास जगह नहीं रखता। लेकिन इस छोटे से क्षेत्र  की कहानी, हर उस युवा की कहानी है जो अपनी जड़ों से दूर, किसी शहर की भीड़ में अपनी किस्मत तलाशता रहा है। आपकी बात बिल्कुल सच है। यहां का जीवन सीमित ही रहा है। दुग्ध व्यवसाय और गाड़ी का काम… बस ये ही तो विकल्प थे हमारे पास। और जब जीविका के साधन सीमित हों, तो पलायन तो अनिवार्य हो जाता है। सदियों से बसा हमारा…

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जौलजीबी मेला 2025 कब है? जौलजीबी मेला 2025 इस वर्ष 14 नवंबर 2025 से शुरू होकर 24 नवंबर 2025 के आस पास  तक चलेगा। यह मेला पर्वतीय संस्कृति, व्यापार और लोककला का प्रमुख केंद्र है। जौलजीबी मेला का परिचय भारत, नेपाल और तिब्बत—इन तीनों देशों की परंपराओं का संगम है अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेला। यह मेळा काली, गोरी और सरयू नदियों के संगम स्थल पर आयोजित होता है और पिथौरागढ़ से लगभग 68 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मेला प्रतिवर्ष 14 नवम्बर से 24 नवम्बर के आस पास तक होता है। यहाँ व्यापारी अपने-अपने देश के स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, ऊनी कपड़े,…

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हम इस लेख में उत्तराखंड की स्थापना पर निबंध का संकलन कर रहें हैं। उम्मीद है हमारा यह संकलन विद्यार्थी मित्रों के लिए सहायक होगा। हिमराज हिमालय के अंचल में फैला हुवा उत्तराखंड प्रदेश अपने गगन चुम्बी हिम शिखरों और रमणीक उपत्यकाओं के कारण प्राचीन काल से ही प्रकृति प्रेमियों ,पवित्र तीर्थस्थलों ,शांति एवं तपसाधना के लिए प्रसिद्ध रहा है। उत्तराखंड नवंबर 2000 से पहले यह उत्तर प्रदेश का एक मंडलीय भाग था। जो 09 नवंबर 2000 को भारत के सत्ताइसवें और हिमालयी क्षेत्रों के ग्यारहवे राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। और 09 नवंबर 2025 को हम उत्तराखंड…

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उत्तराखंड स्थापना दिवस 2025 : उत्तराखंड ने 25 वर्षों में विकास, संघर्ष और असफलताओं की मिश्रित यात्रा तय की है। 2000 में बने इस राज्य ने आर्थिक प्रगति तो की, पर पलायन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं अब भी गहरी हैं। रजत जयंती आत्ममंथन और शहीदों के सपनों को साकार करने का अवसर है। प्रस्तावना – उत्तराखंड, जो हिमालय की गोद में बसा हुआ खूबसूरत पर्वतीय राज्य है, 9 नवंबर 2025 को अपनी रजत जयंती यानी 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। इस राज्य का गठन लंबी लड़ाई, आंदोलन और भारी बलिदानों के बाद 9 नवंबर…

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वीर पुरुष माधो सिंह भंडारी (Madho Singh Bhandari) गढ़वाल के मध्यकालीन इतिहास के वे वीर हैं जिन्हे सबसे अधिक याद किया जाता है। जिनकी बाहदुरी वीरता ,त्याग और उदारता की कहानियाँ समस्त गढ़वाल में सुनाई जाती हैं। वीर माधो सिंह भंडारी का जन्म सत्रहवीं सदी के अंत और अठ्ठारहवी सदी के प्रारम्भ में माना जाता है। ( तिथि निश्चित नहीं है ) इनका जन्म कीर्तिनगर के निकट मलेथा नामक गांव में हुवा था।  शुरुवात में ये गढ़वाल के शाशक राजा महीपतिशाह का एक वीर सैनिक था। जो अपनी वीरता , देशप्रेम और हिम्मत से उसी सेना का उपसेनानायक और बाद…

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गणनाथ का अर्थ और धार्मिक महत्व – गणनाथ शब्द का अर्थ है गणों के स्वामी, अर्थात स्वयं भगवान भोलेनाथ। भगवान शिव को समर्पित यह पवित्र स्थल गणनाथ मंदिर अल्मोड़ा जिले के मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर मल्ला स्युनरा गांव में स्थित है। यह पर्वतीय मंदिर समुद्र तल से 2116 मीटर की ऊँचाई पर एक प्राचीन गुफा में विराजमान है। गणनाथ मंदिर तक पहुँचने के दो प्रमुख मार्ग हैं — अल्मोड़ा–सोमेश्वर मार्ग पर रनबन से लगभग सात किलोमीटर की सीधी चढ़ाई द्वारा अल्मोड़ा–बागेश्वर मार्ग पर ताकुला से चार किलोमीटर पैदल चलकर दोनों मार्ग श्रद्धालुओं को प्राकृतिक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान…

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