Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

इगास त्योहार या इगास बग्वाल (egas festival) उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोकपर्व है। यह त्यौहार दीपावली पर्व के 11 दिन बाद मनाया जाता है। 2025 में इगास त्यौहार 01 नवंबर 2025 को  मनाया जाएगा। उत्तराखंड सरकार ने 2025 में भी उत्तराखंड सरकार ने ईगास त्यौहार पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की हैं। इगास की विडियो देखें : https://youtu.be/k1oCxhWxc0k?si=hIXnCti3l2BGiGl1 इगास बग्वाल का अर्थ – इगास का मतलब गढ़वाली भाषा मे एकादशी होता है। और बग्वाल का मतलब पाषाण युद्ध होता है। पहले पहाड़ो में राजा ,मांडलिक बरसात ऋतु खत्म होने के बाद प्रमुख त्योहारों को पत्थर युद्ध का अभ्यास करते थे। और…

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उत्तरकाशी टनल हादसे में अभी भी 40 मजदूरों की जान हलक में अटकी है। तमाम प्रयासों के बावजूद प्रसाशन अभी तक मजदूरों को बाहर निकालने में सफल नहीं हुवा है। इस हादसे का असल कारण क्या था ? वो बाद की तकनीकी जांचों पता चल जायेगा। लेकिन फ़िलहाल स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह हादसा क्षेत्र  शक्तिशाली लोक देवता बौखनाग देवता के प्रकोप के कारण हुवा है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पुराने मनेजमेंट ने पहले टनल के बहार एक देवता का एक छोटा सा मंदिर बनाया था। सभी अधिकारी और मजदूर वहां पूजा करके और सर…

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उत्तराखंड के चार धाम कपाट अपने नियत समय पर बंद होने शुरू हो गए हैं। गंगोत्री ,यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट बंद हो गए हैं। मंगलवार 14 नवंम्बर 2023 को गोवर्धन पूजा के दिन गंगोत्री धाम के कपाट बंद हुए। तय मुहूर्त पर गंगोत्री धाम के कपाट बंद हुए और माँ गंगा की डोली मुखबा के लिए रवाना हुई। अब अगले छह महीने तक माँ गंगा की पूजा और दर्शन मुखबा में होंगे। भाईदूज पर यमुनोत्री धाम कपाट और केदारनाथ के कपाट बंद हुए। माँ यमुना के अगले छह माह तक खरसाली में दर्शन होंगे। तथा इस समयावधि में माँ…

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प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट में अब तक के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उत्तराखंड नैनीताल पहुंच गए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार धोनी नैनीताल में बाबा नीम करोली के दर्शन करेंगे। इससे पहले विराट अनुष्का भी बाबा नीम करौली के दर्शन करने आ चुके हैं। लोग बताते हैं कि बाबा नीम करोली के आशीर्वाद से विराट अपनी जीवन की नई सफलताओं को चूम रहे हैं ,और व्यवहार में भी काफी परिवर्तन है। इनके अलावा कई बड़ी -बड़ी हस्तियां बाबा नीम करोली का आशीर्वाद ले चुकी हैं। कैंची धाम में…

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गोवर्धन पूजा दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाने वाला त्यौहार है। जिसमे वृज के गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। कहते हैं द्वापर युग में भगवान् कृष्ण ने यह पूजा इंद्र देव का घमंड चूर करने के लिए शुरू करवाई थी। तबसे आज तक नियत दिन पर यह पूजा पुरे विधिपूर्वक होती है। मगर क्या आपको पता है ? उत्तराखंड के पहाड़ी हिस्से में  खासकर कुमाऊं मंडल में यह पूजा जा नहीं होती बल्कि गोवर्धन पूजा के नाम पर या उसकी जगह पर गोधन पूजा होती है। जिसमे स्थानीय निवासी अपनी पशुधन की पूजा करते हैं और उनकी सेवा…

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कुमाउनी भाषा प्रेमियों के लिए खुश खबर ! उत्तराखंड कुमाउनी भाषा और संस्कृति के प्रचार -प्रसार में प्रयासरत उज्याव संगठन आगामी 24 दिसंबर 2023 को हल्द्वानी में कुमाउनी भाषा सम्मलेन करने जा रहा है। उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओँ कुमाउनी और गढ़वाली के प्रचार और प्रसार में कई संगठन और  बुद्धिजीवी लोग प्रयासरत हैं। इनका मूल उद्देश्य अपनी क्षेत्रीय भाषा का प्रचार और उसे सविंधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाना है। इन्ही संगठनों में एक संगठन है उज्याव संगठन। जिसका पूरा नाम है उज्याव कुमाउनी भाषा लिजी युवा तराण समिति।  उज्याव कुछ भाषा,संस्कृति प्रेमी  कुमाउनी युवाओं द्वारा गठित संगठन है…

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बूढ़ी दिवाली 2024 :- “देश भर में अपनी अलग और अनोखी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड के जौनसार बावर क्षेत्र और हिमाचल के कुछ क्षेत्रों में दिवाली 01 दिसम्बर 2024 को मनाई जाएगी । जिसे पहाड़ की बूढ़ी दिवाली कहते हैं। यह पर्व दीपावली के ठीक एक माह बाद मनाया जाता है। और इसी के साथ उत्तरकाशी की गंगा घाटी में मंगसीर बग्वाल और यमुना घाटी में देवलांग बड़े धूम धाम से मनाई जाती है। जैसा कि हमे ज्ञात है, कि समस्त गढ़वाल  में 4 बग्वाल मनाई जाती है। इन बग्वालों मे गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार उत्तराखंड की तीनों संस्कृतियों…

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छोटी दीपावली के दिन यमदीप जलाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दक्षिण में चौमुखी दिया जलाने से परिवार में अकालमृत्यु का खतरा कम होता है। इसी प्रकार उत्तराखंड में इस रात यमदीप उत्सव या यमदीप मेला होता है।उत्तराखंड गढ़वाल मंडल के जनपद रुद्रप्रयाग के अन्तर्गत  क्वीलाखाल (2000 मी.) में दीपावली के  एक दिन पहले  कूर्मासनी देवी के मंदिर में मनाया जाने वाला यमदीपोत्सव या यमदीप मेला उत्तराखंड की किसी पुरानी सांस्कृतिक परम्परा का एक महत्वपूर्ण भाग है। इस अवसर पर यहां के ग्रामवासी देवी कूर्मासनी (तुल. कोटासिनी) के सुसज्जित डोले को गाजे-बाजों के साथ गांव के लगभग डेढ़…

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मित्रों आज आपके लिए ,उत्तराखंड के प्रसिद्ध जनकवि  स्व श्री गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की प्रसिद्ध कविता, जनगीत उत्तराखंड मेरी मातृभूमि (Uttarakhand meri matra bhumi lyrics) शब्दों में लाये है। गिरीश तिवारी गिर्दा का यह गीत ( कविता ) उत्तराखंड में बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में, सामूहिक गीतों में, स्कूलों में इस गीत का विशेष प्रयोग होता है। कई उत्तराखंड के कई लोग गिर्दा की कविता व्हाट्सप और फेसबुक स्टेटस बना कर उत्तराखंड के लिए अपना प्यार दिखाते हैं। गिरीश तिवारी गिर्दा – गिरीश तिवारी गिर्दा का जन्म उत्तराखंड, अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक के ज्योली नामक गाँव मे सन 1945 में…

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सारांश (Summary): ऐपण कला (Aipan Art of Uttarakhand) उत्तराखंड की कुमाऊं संस्कृति की एक अत्यंत समृद्ध और आध्यात्मिक लोककला है, जो विशेष रूप से शुभ अवसरों, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में भूमि, दीवारों, मंदिरों और आसनों पर बनाई जाती है। इस कला में चावल के पिसे घोल (विस्वार), गेरू, हल्दी और रोली का उपयोग होता है। ऐपण न केवल सजावटी चित्र हैं, बल्कि ये देवताओं का आवाहन और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी माने जाते हैं। यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी मां से बेटी को हस्तांतरित होती है। आज के युग में इसका व्यवसायीकरण हुआ है, लेकिन इसके पारंपरिक रूप…

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