बागेश्वर जिले के कत्यूरों की राजधानी कार्तिकेयपुर में स्थित है भगवान् गोलू देवता का पावन धाम है, जो गागरी गोल के नाम से प्रसिद्ध है। गरुड़ बागेश्वर में स्थित गोल्ज्यू के इस मंदिर के नाम पर इस क्षेत्र का नाम गागरी गोल (gagrigol bageshwar ) पड़ा है। गागरी गोल के बारे में प्रचलित लोककथाएं ,जनश्रुतियां – जैसा की हमको पता है कि बागेश्वर जिले में स्थित गागरी गोल नामक गांव का नाम भगवान् गोल्ज्यू के मंदिर के नाम से पड़ा है। कहते हैं गोल्ज्यू ( गोलू देवता ) यहाँ गागर ( तांबे का पानी भरने का बर्तन ) में आये…
Author: Bikram Singh Bhandari
जी रया जागी रया ( ji raya jagi raya ) – उत्तराखंड के दोनों मंडल, कुमाऊँ मंडल और गढ़वाल मंडल में अनेकों प्रकार के लोक पर्व मनाए जाते हैं। दोनो क्षेत्रों में अपनी अपनी परम्पराओं के साथ बड़े हर्षोल्लासपूर्वक लोक पर्वों को मनाया जाता है। इसी प्रकार कुमाऊं मंडल में कई प्रमुख त्योहारों पर बुजुर्ग अपने से छोटो को, जी रया जागी रया कुमाउनी आशीष वचन देते हैं। इनको कुमाउनी आशीर्वचन भी कहा जाता है। जी राए जागी राए का वीडियो यहां देखें :– https://youtu.be/kZ-mlFuWeUY?si=NcRiDeJGIEiqring कुमाउनी आशीष वचन मुख्यतः चढ़ाने वाले त्यौहारों पर दिए जाते हैं। अर्थात जिन त्योहारों में…
चंद राजाओ के बसाये कैड़ारो में स्थित एक ऊँचे पर्वत पर है गोलू देवता का चमत्कारी मंदिर उदयपुर गोलू देवता मंदिर। यहाँ गोल्ज्यू अपने दरबार में भक्तों के कष्ट हरते हैं ,और उन्हें सन्मार्ग की प्रेरणा देते हैं। कहते हैं भगवान् गोलू देवता यहाँ निसंतान दम्पतियों को संतान सुख भी देते हैं। उदयपुर गोलू देवता मंदिर – उदयपुर गोलू देवता मंदिर कैड़ारौ घाटी में स्थित एक उदयपुर नामक पर्वत पर स्थित है। द्वाराहाट सोमेश्वर मार्ग पर स्थित बिन्ता नामक गांव से लगभग 5 किलोमीटर की थका देने वाली चढ़ाई चढ़ने के बाद आता है भगवान् गोलू देवता का चमत्कारी मंदिर…
घात डालना – वैसे तो घात लगाने का सामान्य अर्थ होता है, ‘शिकायत, चुगली करना अथवा किसी व्यक्ति के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध में कही गयी बात को पीछे से उस तक पहुंचा देना। किन्तु एक वाक्यांश के रूप में इसके साथ प्रयुक्त किये जाने वाले क्रियांश ‘डालना’ से इसका अर्थ बदल जाता है अर्थात् इसका अर्थ होगा ‘किसी व्यक्ति के द्वारा किये गये अन्याय के विरुद्ध न्याय की याचना करने तथा अन्यायी को दण्डित किये जाने के लिए किसी न्याय के देवता के दरबार में जाकर गुहार लगाना।’ गढ़वाल में सामान्यतः घात डालने के प्रक्रिया के लिए…
हरेला पर्व धीरे -धीरे उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का लोकपर्व न होकर पुरे प्रदेश और देश के कई हिस्सों में धूम धाम से मनाया जाने वाला त्यौहार बन गया है। जैसा की हम सबको पता है कि हरेला त्यौहार उत्तराखंड का प्रकृति को समर्पित एक अनन्य लोक पर्व है। इसमें सात या पांच प्रकार के अनाज को दस या ग्यारह दिन पहले मंदिर के पास बंद कमरे में बोते हैं। फिर दस दिन बाद हरेला त्यौहार मनाया जाता है। हरेला त्यौहार की पूर्व संध्या पर डिकारे बनाये जाते हैं। पारम्परिक मिष्ठान छऊवे बनाये जाते हैं। और हरेले की पूजा करके…
वृद्ध जागेश्वर मंदिर – वृद्ध जागेश्वर जागेश्वरधाम से 7 किलोमीटर ऊपर दक्षिण-पश्चिम में पैदल मार्ग एक पहाड़ी पर वृद्ध जागेश्वर (शिव) का मूल स्थान है। जागेश्वर की पवित्र नदी जटागंगा का उद्गम स्थल भी यहीं है। यहां से हिमालय का भव्य दृश्य दृष्टिगोचर होता है। शिखर पर स्थित इस देवालय के 1 किमी. पूर्व दण्डेश्वर महादेव का शिखर शैली का देवालय भी स्थित है। इसके विषय में एक जनश्रुति है कि एक बार जब एक चन्द्रवंशी एक युद्ध के लिए जा रहे थे तो उन्हें यहां पर रात हो गयी और उन्होंने यहीं पर अपना डेरा डाल दिया। जब उनके…
भासर देवता :- भासर देवता का मंदिर गढ़वाल क्षेत्र के टिहरी जनपद की कड़ाकोट पट्टी के कफना नामक गांव में स्थित है। इसका निशान होता है लोहे का त्रिशूल या कटार। इनके बारे में कहा जाता है कि यह नागराजा का मामा तथा अन्य देवताओं का बूढ़ा मामा हैं। माँ चन्द्रवदनी देवी इनकी बहिन है। भासर देवता की माता का नाम मेघमाला है। क्षेत्रपाल, घण्टाकर्ण, नगेल देवता आदि को इनका भाई भी माना जाता है। इसमें असीम शक्ति व सामर्थ्य माना जाता है। बिजली गिराना, पानी को दूध बना देना आदि इनकी शक्ति के परिचायक हैं। अग्नि की ज्वलनशक्ति को…
कुटटी देवी उत्तराखंड गढ़वाल मंडल के सिद्धपीठों में गिना जाने वाला कुटेटी देवी का मंदिर गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी जनपद में उसके मुख्यालय से लगभग 2-3 किलोमीटर की दूरी पर गंगा के उस पार वारणावत पर्वत के शिखर पर स्थित है। कहते हैं उत्तरकाशी का ऐरासूगढ़ भी यहीं पर था। पुरे उत्तराखंड में इसकी बड़ी मान्यता है। यह मंदिर देहरादून से 192 किलोमीटर दूर और टिहरी से 74 किलोमीटर दूर है। उत्त्पत्ति से जुडी कहानी और पौराणिक महत्त्व – इसके विषय में बड़ी चमत्कारिक कथाएं सुनने को मिलती हैं। इसके विषय में जनश्रुति है कि यह मुस्लिम शासनकाल में आत्मरक्षा…
उत्तराखंड के बागेश्वर में जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर सनगाड़ गावं में स्थित है नौलिंग देवता मंदिर। ये इस क्षेत्र के प्रसिद्ध लोकदेवता हैं। इनका देवालय अपनी भव्यता के कारण पुरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ नवरात्रियों में विशेष पूजा अर्चना होती है। यहाँ की धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि कोई संतान हीन महिला यहाँ 24 घंटे अखंड दीप के साथ खड़रात्रि जागरण करती है तो उसे नौलिंग देवता संतान सुख देते हैं। नौलिंग देवता का जन्म – नौलिंग देवता के जन्म के बारे में कहा जाता है कि ये श्री 10008 मूल नारायण भगवान् के पुत्र हैं।…
घंटाकर्ण देवता : बद्रीनाथ के मंदिर के दाहिनी ओर परिक्रमा में बिना धड़ की एक मूर्ति है जिसे घंटाकर्ण की मूर्ति कहा जाता है। घंटाकर्ण का शाब्दिक अर्थ है ‘वह व्यक्ति जिसके कान घंटे के आकार के हैं अथवा जो अपने कानों में घंटे लटकाये रखता है।’ इसके नाम के सम्बन्ध में हरिवंश पुराण में विस्तार से बताया गया है कि यह एक पिशाच योनि का प्राणी था जो कि शिव का ऐसा अनन्य भक्त था कि किसी अन्य देवी-देवता का नाम भी नहीं सुनना चाहता था। उसके कानों में ऐसा कोई नाम सुनाई न पड़ सके इसलिए वह अपने…