कैलुवा विनायक – भगवान गणेश का जन्मदिन गणेश चतुर्थी आ रही है और उत्तराखंड की सर्वमान्य लोकदेवी नंदा देवी का जन्मोत्सव नंदा अष्टमी के उपलक्ष में नंदा लोकजात का आयोजन चल रहा है। नंदा राजजात एशिया की सबसे लम्बी पैदल यात्रा है। यह राजजात बारह वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। नंदा राजजात पहाड़ अनेक पड़ावों से होते हुए हिमालयी क्षेत्र में प्रवेश करती है। और हिमालयी क्षेत्र में प्रवेश से पहले एक पड़ाव पड़ता है कैलुवा विनायक। जैसा की नाम से स्पष्ट है विनायक मतलब है यह पड़ाव भगवान् गणेश से जुड़ा है। कैलुवा विनायक – नन्दा…
Author: Bikram Singh Bhandari
कुमाऊं में पैसे को डबल कहते हैं – पहाड़ो में अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग स्थानीय भाषा या बोली का प्रयोग होता है। उत्तराखंड के पहाड़ी हिस्सों में मुख्यतः तीन भाषाओं या तीन बोलियों का प्रयोग होता है। जिसमे गढ़वाली , कुमाऊनी और जौनसारी भाषा प्रमुख है। इन स्थानीय भाषाओं में दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाली कुछ चीजों के लिए ऐसे अजीब शब्दों का प्रयोग जिनका वास्तविक अर्थ समझने में बहुत परेशानी होती है या समझ में ही नहीं आता। क्योंकि पहाड़ की स्थानीय भाषाएँ या बोलियां देवनागरी में लिखी जाती हैं इसलिए काफी हद तक समझ में…
बकरी और सियार की कहानी एक प्रसिद्ध कुमाऊनी लोक कथा है। अक्सर पहाड़ो में दादा , दादी ,नानी अपने बच्चों को सुनाया करती है। पहाड़ की प्रसिद्ध लोक कथाओं में चल तुमड़ी बाटो बाट , सास बहु का खेत ,और बकरी और सियार प्रमुख हैं। आज इस पोस्ट में आनंद लीजिये बकरी और सियार की कहानी का – कुमाऊनी लोक कथा बकरी और सियार – एक जंगल में एक बकरी अपने पति के साथ रहती थी। उसी जंगल में एक सियार भी रहता था। जब भी बकरी के बच्चे होते थे, सियार उन्हें खा जाता था। असहाय बकरी और बकरा…
यह सर्वविदित है कि उत्तराखंड देवभूमि के नाम से विश्व विख्यात है। और उत्तराखंड में एक से बढ़कर एक देवालय हैं जो अपने आप में अनेकों रहस्य और पौराणिक इतिहास समेटे हुए हैं। आज उत्तराखंड के एक ऐसे मंदिर वंशी नारायण मंदिर के बारे में जानकारी संकलित करने जा रहे हैं ,जिसके बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार रक्षाबंधन के दिन खुलते हैं। वंशी नारायण मंदिर की स्थिति – भगवान् विष्णु को समर्पित वंशी नारायण मंदिर गढ़वाल मंडल के चमोली जनपद की उरगम घाटी के अन्तिम ग्राम बांसा (2080 मी.) से…
घी संक्रांति का दूसरा नाम घी त्यार है। इसे ओलगिया त्यौहार भी कहते हैं। यह लोकपर्व भाद्रपद माह की सिंह संक्रांति को उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाता है। यह उत्तराखंड के कृषक वर्ग और पशुपालक वर्ग का प्रमुख पर्व है। घी त्यार ( ghee tyar ) – घ्यूसग्यान या ओलगिया त्यौहार यहां की कृषक-पशुपालक ग्रामीण जनता का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इसे ‘घी संक्रान्ति’ या घी त्यार नाम दिये जाने का कारण यह है कि इस दिन मातायें अपने बच्चों के सर में ताजा घी मलती हैं तथा इसके साथ ही उनके स्वस्थ रहने एवं चिरायु होने की…
राहुल सांकृतायन जी ने अपनी किताब हिमालय परिचय में बद्रीनाथ के स्थानीय निवासी गंगा सिंह दुरियाल के संदर्भ से बद्रीनाथ जी के बारे में एक रोचक लोककथा का वर्णन किया है। बद्रीनाथ जी की इस लोक कथा का संबंध इतिहास से भी जुड़ता है। आभासी रूप से यह लोक कथा सत्य प्रतीत होती है। माणा क्षेत्र के मारछा समुदाय के लोगों का विश्वास है कि पहले बद्रीनाथ जी तिब्बतियों के देवता थे। और बद्रीनाथ से लगभग आठ किलोमीटर दूर थोलिंग मठ में रहते थे। उनका बद्रीनाथ जी को तिब्बती देवता मानने का मुख्य कारण यह था कि बद्रीनाथ जी यहाँ…
वृद्ध केदार मंदिर (vridh kedar ) या बूढ़ा केदार मंदिर कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले में भिकियासैण से 14 किलोमीटर आगे रामगंगा और विनोद नदी के संगम पर स्थित है। इस मंदिर में भी केदारनाथ धाम के सामान भगवान् शिव के धड़ की पूजा होती है। वृद्ध केदार मंदिर में भगवान शिव के धड़ के रूप में पूजित मूर्ति की गहराई असीमित है तथा धड़ की लम्बाई 6 फ़ीट है। वृद्ध केदार मंदिर का धार्मिक महत्व – यहाँ पर विशेष पर्वों और उत्सवों पर विशेष पूजा और जलभिषेक किया जाता है। यहाँ कार्तिक पूर्णिमा पर की गई विशेष पूजा से…
उत्तराखंड की भूमि अपने विशेष लोकपर्वों के लिए प्रसिद्ध है। इन्ही लोक पर्वों में से एक पर्व है सातो आठो लोक पर्व। भगवान् के साथ मानवीय रिश्ते बनाकर, उनकी पूजा अर्चना और उनके साथ आनंद मानाने का त्यौहार है सातू आठू त्यौहार। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ व कुमाऊँ के सीमांत क्षेत्र में मनाया जाने वाला यह त्यौहार प्रतिवर्ष भाद्रपद की पंचमी से शुरू होकर अष्टमी तक चलता है। सातो आठो 2025 में 28 अगस्त 2025 बिरुड़ पंचमी ( birud panchami 2025) से शुरू होगा। 30 अगस्त 2025 को सातो और 31 अगस्त को आठो मनाया जाएगा। सातू आठू पर्व में महादेव…
गढ़वाली लोक कथा – उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों का प्रकृति के साथ विशेष स्नेह रहा है। यही स्नेह यहाँ के निवासियों की लोक कथाओं में भी झलकता है पहाड़ी क्षेत्र की लोक कथाओं के पात्र अमूनन विभिन्न स्वर निकालने वाली चिड़िया या पेड़ पौधे या जगली जानवर होते हैं। प्रस्तुत गढ़वाली लोक कथा की पात्र भी एक चिड़िया है। जिसे हिंदी में चातक पक्षी कहते हैं। और जैसा की हमको पता है चातक पक्षी स्वाति नक्षत्र में आसमान से पड़ी पानी की बूंद को पीता है। और उस बूंद को प्राप्त करने वो जंगलो में निरंतर एक विशेष…
कुमाऊनी जागर ( Kumauni jagar ) : जागर उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति की एक अद्वितीय पहचान है। उत्तराखंड में जागर विधा उत्तराखंड के दोनों मंडलों कुमाऊं और गढ़वाल में अलग तरीके से गायी और संपादित की जाती है। प्रस्तुत आलेख में जागर का अर्थ और कुमाऊनी जागर की संपादन पर प्रकाश डालने की कोशिश की गई है। इस लेख को सम्पादित करने में स्थानीय जानकारियों के साथ साथ उत्तराखंड ज्ञानकोष पुस्तक का सहयोग लिया गया है। जागर का अर्थ – जागर का अर्थ है घर परिवार में सुख शांति और मंगल हेतु दैवी शक्ति को जागृत करना। उत्तराखंड में देवी-देवताओं…