देहरादून: राज्य में संभावित अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने और आम जनमानस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने प्रदेश के सभी सरकारी और गैर-सरकारी भवनों में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) मानकों को पुख्ता करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
इस संबंध में उन्होंने शासन के सभी सचिवों और जिलाधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर जमीनी स्तर पर कार्य करने को कहा है।
इन क्षेत्रों का होगा अनिवार्य स्थलीय सर्वे
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील इमारतों का तत्काल स्थलीय (ऑन-साइट) सर्वे किया जाए। इस अभियान के तहत विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों और इमारतों पर फोकस किया जाएगा:
- गगनचुंबी इमारतें: अधिक ऊंचाई वाले भवन (हाई-राइज बिल्डिंग्स)।
- भीड़भाड़ वाले इलाके: अत्यधिक जनघनत्व और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित व्यावसायिक व आवासीय परिसर।
- संकरे रास्ते: तंग गलियों और रास्तों में स्थित वे इमारतें जहां दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल होता है।
- असुरक्षित निकासी: ऐसे परिसर जहां आपातकालीन स्थिति के लिए सुरक्षित निकासी मार्ग (एग्जिट रूट) नहीं हैं।
इस वृहद अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित अग्नि दुर्घटना के खतरे की समय रहते पहचान करना और उसे पूरी तरह से समाप्त करना है।
यह भी पढ़े: सिर में गोली लगी, 600 दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ता रहा उत्तराखंड का यह वीर जवान सुरजन सिंह भंडारी
सभी विभागों का होगा ‘सेफ्टी ऑडिट’
मुख्य सचिव श्री बर्द्धन ने शासन के सभी सचिवों को भी एक अहम जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें अपने-अपने विभागों और उनसे संबंधित सभी क्षेत्रों (सेक्टर्स) का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को सख्त हिदायत
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सर्वे और ऑडिट के बाद कागजी खानापूर्ति न हो, बल्कि सभी जरूरी अग्नि सुरक्षा मानकों (फायर सेफ्टी नॉर्म्स) को धरातल पर सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को नियमों का निरंतर पालन (फॉलो-अप) करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह सख्त हिदायत भी दी है कि आमजन की सुरक्षा से जुड़े इस मसले पर मानकों की अनदेखी या किसी भी तरह की लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
