देहरादून: उत्तराखंड में लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हजारों उपनल और संविदा कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार की ओर से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मंत्रिमंडलीय उपसमिति की हालिया बैठक में उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने और लगभग 10 हजार संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के प्रस्ताव पर अहम सहमति बन गई है।
सरकार के इस बड़े कदम से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 22 हजार से अधिक उपनल कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
कैबिनेट उपसमिति के मुख्य फैसले
- कट-ऑफ डेट में बदलाव: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट ने पहले ही वेतन संबंधी कट-ऑफ डेट को 12 नवंबर 2018 से बढ़ाकर 15 अक्टूबर 2024 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।
- चरणबद्ध तरीके से लागू होगी व्यवस्था: वर्ष 2024 तक नियुक्त सभी उपनल कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ दिया जाएगा।
- 1 मार्च 2026 से मिलेगा लाभ: उपसमिति ने यह तय किया है कि नई वेतन व्यवस्था 1 मार्च 2026 से लागू कर दी जाएगी। कुछ विभागों और निगमों में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है, जबकि शेष विभागों में इसे जल्द ही अमल में लाया जाएगा।
10 हजार संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की तैयारी
उपनल कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य के लगभग 10,000 संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की राह भी आसान हो गई है। एक अलग बैठक में इस मुद्दे पर भी सहमति बनी है। हालांकि, नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया, पात्रता शर्तें और इसकी समय-सीमा को लेकर विस्तृत शासनादेश (Government Order) जारी होना अभी बाकी है।
बैठक में ये रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण फैसले को लेकर हुई मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने की। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, सचिव (कार्मिक) शैलेश बगौली सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आगे क्या?
अब सभी कर्मचारियों की नजरें राज्य सरकार के औपचारिक शासनादेश और इसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर टिकी हैं। सरकार के इस फैसले को मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर प्रदेश के हजारों परिवारों के जीवन स्तर पर पड़ेगा।


