उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश को अनेक साहसी सैनिक दिए हैं। उन्हीं में से एक थे राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के बहादुर कमांडो सूरजन सिंह भंडारी, जिन्होंने 2002 के अक्षरधाम आतंकवादी हमले के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया और देश की रक्षा करते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए।
सूरजन सिंह भंडारी चमोली जिले के गोचर क्षेत्र के रानो गांव के निवासी थे। वे भारतीय सेना की गढ़वाल स्काउट्स रेजिमेंट से वर्ष 2000 में एनएसजी के लिए चयनित हुए थे। 24 सितंबर 2002 को गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर परिसर पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। हमले में श्रद्धालुओं और सुरक्षा कर्मियों सहित कई लोगों की जान चली गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एनएसजी की विशेष टीम को तत्काल गुजरात भेजा गया, जिसमें कमांडो सूरजन सिंह भंडारी भी शामिल थे।
25 सितंबर की सुबह तक चले ऑपरेशन में एनएसजी ने दोनों आतंकवादियों को मार गिराया और परिसर को सुरक्षित कर लिया। इसी अभियान के दौरान सूरजन सिंह भंडारी के सिर में गोली लग गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे कोमा में चले गए।
इसके बाद लगभग 600 दिनों तक उनका उपचार चलता रहा। इस दौरान वे कभी होश में नहीं आ सके। बाद में अक्टूबर 2003 में उन्हें नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में स्थानांतरित किया गया। अस्पताल में उनके इलाज के दौरान अनेक लोग, जिनमें स्कूली बच्चे और शुभचिंतक भी शामिल थे, उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते रहे।
19 मई 2004 की सुबह 4:25 बजे AIIMS में उनका निधन हो गया। उस समय उनकी आयु मात्र 26 वर्ष थी। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अंतिम दिनों में वे गुर्दे संबंधी समस्याओं और तेज बुखार से भी जूझ रहे थे।
सूरजन सिंह भंडारी के दो भाई भी रक्षा सेवाओं से जुड़े रहे हैं। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव उत्तराखंड लाया गया।
देश के प्रति उनकी असाधारण वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत “कीर्ति चक्र” से सम्मानित किया। यह भारत का दूसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
सूरजन सिंह भंडारी की कहानी केवल एक सैनिक की नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा, साहस और राष्ट्रभक्ति की मिसाल है। अक्षरधाम ऑपरेशन में घायल होने के बाद 600 दिनों तक जीवन से संघर्ष करने वाले इस वीर सपूत का बलिदान हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।
वीर कमांडो सूरजन सिंह भंडारी को शत-शत नमन।
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