जनगणना 2027: भारत की पहली डिजिटल और 16वीं जनगणना का बिगुल उत्तराखंड में बज चुका है। सचिव जनगणना श्री दीपक कुमार ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में बताया कि जनगणना-2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण) की शुरुआत 10 अप्रैल, 2026 से होने जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी तरह से मोबाइल एप्लिकेशन पर आधारित होगी।
महत्वपूर्ण तिथियां और चरण
- स्व-गणना (Self Enumeration): 10 अप्रैल से 24 अप्रैल, 2026 तक।
- प्रगणकों द्वारा घर-घर गणना: 25 अप्रैल से 24 मई, 2026 तक।
- द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): 9 फरवरी से 28 फरवरी, 2027 तक।
- हिमाच्छादित क्षेत्र: बर्फबारी वाले 131 गांवों और 3 नगरों में विशेष गणना 11 से 30 सितंबर, 2026 तक होगी।
पहली बार ‘स्व-गणना’ का विकल्प
इतिहास में पहली बार नागरिकों को वेब पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से अपनी जानकारी खुद दर्ज करने का विकल्प दिया गया है।
- इसके लिए परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर अनिवार्य है।
- पंजीकरण के बाद मुखिया का नाम और चुनी गई भाषा बदली नहीं जा सकेगी।
- पूरी प्रक्रिया में मात्र 15-20 मिनट का समय लगेगा और डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा।
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100% डिजिटल और जातिगत जनगणना
आजादी के बाद की यह 8वीं जनगणना होगी, जिसमें पहली बार जातिगत जनगणना भी शामिल की गई है। इस बार प्रगणक (Enumerator) कागज-पेन के बजाय मोबाइल ऐप के जरिए डेटा जुटाएंगे। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए CMMS पोर्टल का उपयोग किया जाएगा।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री करेंगे शुरुआत
उत्तराखंड के प्रथम नागरिक के रूप में राज्यपाल और मुख्यमंत्री 10 अप्रैल को स्वयं की गणना कर इस महाभियान का शुभारंभ करेंगे। प्रशासन ने इसके लिए 23 मास्टर ट्रेनर्स और 555 फील्ड ट्रेनर्स को तैयार किया है।
सचिव जनगणना ने राज्य के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे घर आने वाले प्रगणकों को सही जानकारी देकर सहयोग करें और अधिक से अधिक संख्या में पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना का लाभ उठाएं।
