हा हा मोहन गिरधारी” कुमाऊँ अंचल की एक बेहद लोकप्रिय कुमाऊनी खड़ी होली है। यह गीत कई स्थानों पर बैठकी होली में भी गाया जाता है। कुमाऊनी होली की खासियत यही है कि यहाँ पहाड़ी क्षेत्र में अवधी और ब्रज भाषा के होली गीतों को शास्त्रीय सुरों में गाया जाता है।
यह गीत भगवान श्रीकृष्ण के चंचल, नटखट और प्रेममय स्वरूप का वर्णन करता है, जहाँ गोपियों के साथ उनकी होली की लीला का मधुर चित्रण मिलता है।
Table of Contents
हा हा मोहन गिरधारी लिरिक्स ( ha ha mohan girdhari holi lyrics )
हाँ हाँ हाँ मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन …।।
ऐसो अनाड़ी चुनर गयो फाड़ी
ओ हो हंसी हंसी दे गयो गारी ,
मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन … II I
चीर चुराय कदम चढ़ी बैठ्यो ,
पातन जाय छिपोई ,
मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन … II
बांह पकड़ मोरी अंगुली मरोड़ी,
नाहक रार मचाय,
मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन … II
दधि मेरो खाय मटकी मेरी तोड़ी
हसी हसी दे गयो गारी
मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन … II
जमुना के तट पर बंसी के बट पर ,
अंगियां भिगागयो सारी
मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन … II
आवन कह गए अजहु न आवै
झूठी प्रीत लगायी ,
मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन … II
सांवल रूप अहीर को छोरो
नैनन की छवि न्यारी
मोहन गिरधारी II हाँ हाँ हाँ मोहन … II
हा हा मोहन गिरधारी लिरिक्स का हिंदी अर्थ (अनुवाद) :
- हाँ हाँ हाँ मोहन गिरधारी
– हे मोहन गिरधारी (श्रीकृष्ण), तुम्हारी लीला निराली है।
- ऐसो अनाड़ी चुनर गयो फाड़ी
– ऐसे अनाड़ी बने कि मेरी चुनरी फाड़ दी।
- हंसी हंसी दे गयो गारी
– और हँसते-हँसते उलाहना भी दे गए।
- चीर चुराय कदम चढ़ी बैठ्यो
– वस्त्र चुराकर पेड़ पर चढ़कर बैठ गए।
- पातन जाय छिपोई
– और पत्तों में जाकर छिप गए।
- बांह पकड़ मोरी अंगुली मरोड़ी
– मेरी बाँह पकड़कर उँगली मरोड़ दी।
- नाहक रार मचाय
– यूँ ही झगड़ा खड़ा कर दिया।
- दधि मेरो खाय मटकी मेरी तोड़ी
– मेरा दही खा लिया और मटकी तोड़ दी।
- हसी हंसी दे गयो गारी
– और हँसते हुए चिढ़ाकर चले गए।
- जमुना के तट पर बंसी के बट पर
– यमुना के किनारे बंसी बजाते हुए।
- अंगियां भिगागयो सारी
– मेरी सारी अँगिया भिगो दी (रंग/पानी से)।
- आवन कह गए अजहु न आवै
– आने का वचन देकर भी अब तक नहीं आए।
- झूठी प्रीत लगायी
– झूठा प्रेम जताया।
- सांवल रूप अहीर को छोरो
– वह सांवला अहीर (ग्वाला) का छोरा।
- नैनन की छवि न्यारी
– जिसकी आँखों की छवि अद्भुत है।
कुमाऊनी होली की विशेषता :
उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि संगीत और शास्त्रीय रागों की परंपरा है। यहाँ होली तीन प्रमुख रूपों में मनाई जाती है:
- बैठकी होली – शास्त्रीय रागों में बैठकर गाई जाती है।
- खड़ी होली – ढोलक और हुड़के के साथ खड़े होकर सामूहिक गायन
- महिला होली – महिलाओं द्वारा गाई जाने वाली पारंपरिक होली।
हा हा मोहन गिरधारी होली , विशेष रूप से खड़ी होली में लोकप्रिय है, जहाँ पूरे गाँव के लोग गोल घेरा बनाकर गाते और नाचते हैं। इस गीत में श्रीकृष्ण की नटखट छवि के माध्यम से प्रेम, हास्य और भक्ति का सुंदर संगम दिखाई देता है।
कुमाऊनी होली गीत लिरिक्स | Top10 best Kumaoni holi song lyrics
कुमाऊनी होली पोस्टर देखें यहां
