देहरादून: उत्तराखंड सरकार समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘विधवा पेंशन योजना’ का नाम बदलने जा रही है। अब इस योजना को ‘मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना’ के नाम से जाना जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य योजना को अधिक समावेशी, व्यापक और महिलाओं को सामाजिक रूप से सम्मानजनक पहचान देना है।
राज्य के समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर उन्होंने हाल ही में राजस्थान का अध्ययन दौरा किया था। वहां संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अध्ययन के दौरान उन्होंने पाया कि राजस्थान में इस योजना का नाम ‘एकल नारी पेंशन योजना’ रखा गया है।
‘विधवा’ शब्द की जगह सम्मानजनक पहचान देने की पहल
समाज कल्याण मंत्री के अनुसार, सामाजिक दृष्टिकोण से ‘विधवा’ शब्द पूरी तरह उपयुक्त प्रतीत नहीं होता। महिलाओं को समाज में गरिमा और सम्मानजनक पहचान दिलाने के लिए राजस्थान मॉडल की तर्ज पर उत्तराखंड में भी इसका नाम बदलने का निर्णय लिया गया है।
यह भी पढ़े: लाल रंग की साड़ी मां भजन लिरिक्स | खुशी जोशी का पहाड़ी माता भजन | 2026 का वायरल पहाड़ी भजन
हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक और प्रस्तुतीकरण के दौरान समाज कल्याण मंत्री ने इस योजना के नामकरण में बदलाव का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री धामी ने इस पर सहमति जताते हुए आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पारित कर औपचारिक मंजूरी देने का आश्वासन दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि राज्य की एकल महिलाओं को न केवल सामाजिक सम्मान मिले, बल्कि उन्हें आर्थिक संबल भी प्राप्त हो।
किन्हें मिलता है योजना का लाभ?
वर्तमान नियमों के तहत यह पेंशन उन पात्र महिलाओं को मासिक रूप से दी जाती है:
- जिनकी पारिवारिक मासिक आय अधिकतम 4,000 रुपये तक है, या
- जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी में आती हैं, और
- जो वर्तमान में किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ नहीं ले रही हैं।
कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही विभाग शासनादेश जारी कर योजना को नए स्वरूप और नाम के साथ लागू करेगा।




