हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में हुए 54 करोड़ रुपये के बहुचर्चित भूमि खरीद घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विजिलेंस जांच में करोड़ों रुपये के वित्तीय हेरफेर और आपराधिक षड्यंत्र की पुष्टि होने के बाद, राज्य सरकार ने आईएएस और पीसीएस अधिकारियों समेत कई जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसे राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
क्या है पूरा घोटाला?
हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए लगभग 33 बीघा जमीन 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। इस खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली को अंजाम दिया गया:
- सर्किल रेट में हेरफेर: साजिश के तहत जमीन का ‘लैंड यूज’ (Land Use) कृषि से बदलकर व्यावसायिक कर दिया गया।
- कीमतों में भारी उछाल: इस बदलाव के कारण जमीन का सर्किल रेट 6,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर से सीधे 25,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया, जिससे नगर निगम और सरकारी खजाने को करोड़ों की आर्थिक क्षति हुई।
विजिलेंस की विस्तृत जांच में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।
शीर्ष अधिकारियों पर गिरी गाज
विजिलेंस ने हाल ही में मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं:
- IAS वरुण चौधरी (तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी): सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की गई है।
- कर्मेंद्र सिंह (तत्कालीन जिलाधिकारी, हरिद्वार): ‘मेजर पनिशमेंट’ (कठोर दंड) देने का फैसला लिया गया है।
- PCS अजय वीर: विभागीय कार्रवाई करते हुए इनकी तीन वेतन वृद्धियां (Increments) रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इन पर दर्ज होगा मुकदमा (FIR)
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मुख्यमंत्री धामी ने मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज करने का अनुमोदन कर दिया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
नामित अधिकारी व कर्मचारी:
- तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी
- तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल
- तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट
- तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण
- तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल
- तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल
भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्ति:
- श्रीमती सुमन देवी
- जितेन्द्र कुमार
- श्री अभिषेक यादव
- सुजीत कुमार सिंह
सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही या रियायत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
