गोपेश्वर (चमोली): चतुर्थ केदार के नाम से विख्यात भगवान श्री रुद्रनाथ जी की चल विग्रह उत्सव डोली आज अपने शीतकालीन प्रवास स्थल, गोपेश्वर स्थित ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में विधि-विधान और पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विराजमान हो गई है। डोली के मंदिर प्रांगण में पहुंचते ही पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा रुद्रनाथ’ के जयकारों से गूंज उठा। इस पावन अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान रुद्रनाथ के दर्शन किए और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
धाम के कपाट शनिवार देर शाम शीतकाल के लिए विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए थे। कपाट बंद होने के बाद देव निशानों के साथ भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली ने विभिन्न पड़ावों से होते हुए पैदल यात्रा शुरू की। आज जैसे ही डोली गोपेश्वर पहुंची, स्थानीय ग्रामीणों और तीर्थयात्रियों ने ढोल-दमाऊँ की थाप, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भजनों के साथ डोली का भव्य एवं भावुक स्वागत किया।
परंपरानुसार, अब आगामी छह माह के शीतकालीन प्रवास के दौरान भगवान रुद्रनाथ जी की नित्य पूजा-अर्चना और भोग-आरती इसी गोपीनाथ मंदिर परिसर में संपन्न की जाएगी। भक्त शीतकाल के दौरान गोपेश्वर में ही भगवान शिव के ‘एकानन’ (मुख) स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे।
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प्रशासन और मंदिर समिति के अनुसार, इस वर्ष यात्राकाल के दौरान रुद्रनाथ धाम में श्रद्धालुओं का भारी उत्साह देखने को मिला। दुर्गम और लंबी पैदल चढ़ाई के बावजूद लाखों की संख्या में देश-विदेश से भक्त धाम पहुंचे और भगवान शिव के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। डोली के शीतकालीन गद्दी पर विराजमान होने के साथ ही इस वर्ष की रुद्रनाथ धाम यात्रा का औपचारिक समापन हो गया है।





